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Faridabad News: जेवर एयरपोर्ट कॉरिडोर की राह होगी साफ, सोतई के जमीन विवाद को सुलझाएंगे उपायुक्त
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एनएचएआई की तरफ से उपायुक्त को दिया गया है आवेदन
डीसी स्तर पर शुरू हुई प्रक्रिया से समाधान की उम्मीद
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फरीदाबाद को सीधे जोड़ने वाली ग्रीनफील्ड कॉरिडोर परियोजना को संशोधित बजट की मंजूरी मिलने के बाद जिले में लंबे समय से अटकी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद भी बढ़ गई है। विशेष रूप से सोतई गांव के पास जमीन से जुड़ा मुद्दा अब प्रशासन की सक्रियता के कारण सुलझने की दिशा में बढ़ रहा है। एनएचएआई की तरफ से उपायुक्त को आवेदन दिया गया है, वहीं उपायुक्त आयुष सिन्हा मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर काम कर रहे हैं।
करीब 3630 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस कॉरिडोर का लगभग आठ किलोमीटर हिस्सा फरीदाबाद जिले में पड़ेगा। यह मार्ग फरीदाबाद के सेक्टर-65 के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे लिंक रोड से शुरू होकर सीधे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ेगा। परियोजना के पूरा होने पर फरीदाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने का समय काफी कम होने की उम्मीद है, जिससे रोजाना आने-जाने वाले हजारों लोगों को राहत मिलेगी।
सोतई में डेढ़ किलोमीटर जमीन पर चल रही प्रक्रिया
परियोजना का लगभग डेढ़ किलोमीटर हिस्सा सोतई गांव की जमीन से होकर गुजरना है। इस हिस्से में जमीन के स्वामित्व और उपयोग को लेकर नगर निगम और स्थानीय पक्षों के बीच कुछ समय से मतभेद की स्थिति बनी हुई थी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस हिस्से की जमीन के लिए आवश्यक मुआवजे की राशि जारी कर दी है। हालांकि स्वामित्व से जुड़े पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया चल रही है। अब जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से इस मामले में समाधान की दिशा में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
डीसी स्तर पर शुरू हुई पहल
सूत्रों के अनुसार एनएचएआई ने मामले को लेकर जिला प्रशासन से सहयोग का अनुरोध किया था। इसके बाद उपायुक्त आयुष सिन्हा ने स्थिति की समीक्षा कर समाधान के लिए कई स्तर पर प्रक्रिया शुरू करवाई है। प्रशासन की ओर से दोनों पक्षों की बात सुनने के साथ जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच और कागजी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि संवाद और दस्तावेजी स्पष्टता के माध्यम से विवाद का समाधान निकाला जा सकता है, जिससे परियोजना के निर्माण कार्य को गति मिलेगी।
मुआवजे की राशि कोर्ट में जमा
जानकारी के अनुसार एनएचएआई की ओर से भूमि अधिग्रहण से संबंधित अधिकारी (लैंड डीआरओ) के माध्यम से मुआवजे की राशि अदालत में जमा करवाई जा चुकी है। अब अंतिम निर्णय आने के बाद यह राशि वैध और पात्र जमीन मालिकों को दी जाएगी। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ने से जमीन से जुड़ी बाधा जल्द दूर होने की संभावना है, जिससे निर्माण कार्य को भी गति मिल सकेगी।
रोजाना यात्रियों को मिलेगी राहत
फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और पलवल क्षेत्र से रोजाना बड़ी संख्या में लोग नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक और आईटी क्षेत्रों में काम के लिए आते-जाते हैं। फिलहाल उन्हें दिल्ली या नोएडा के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ता है जहां अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है और यात्रा में डेढ़ से दो घंटे तक लग जाते हैं। ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनने के बाद यह दूरी काफी कम हो जाएगी और यात्रा का समय भी घटेगा। इससे दैनिक यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और उद्योग से जुड़े लोगों को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
यह मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में भी लाया गया है। जल्द ही इसका समाधान निकालकर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
धीरज सिंह, उपमहाप्रबंधक, एनएचएआई
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डीसी स्तर पर शुरू हुई प्रक्रिया से समाधान की उम्मीद
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फरीदाबाद को सीधे जोड़ने वाली ग्रीनफील्ड कॉरिडोर परियोजना को संशोधित बजट की मंजूरी मिलने के बाद जिले में लंबे समय से अटकी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद भी बढ़ गई है। विशेष रूप से सोतई गांव के पास जमीन से जुड़ा मुद्दा अब प्रशासन की सक्रियता के कारण सुलझने की दिशा में बढ़ रहा है। एनएचएआई की तरफ से उपायुक्त को आवेदन दिया गया है, वहीं उपायुक्त आयुष सिन्हा मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर काम कर रहे हैं।
करीब 3630 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस कॉरिडोर का लगभग आठ किलोमीटर हिस्सा फरीदाबाद जिले में पड़ेगा। यह मार्ग फरीदाबाद के सेक्टर-65 के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे लिंक रोड से शुरू होकर सीधे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ेगा। परियोजना के पूरा होने पर फरीदाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने का समय काफी कम होने की उम्मीद है, जिससे रोजाना आने-जाने वाले हजारों लोगों को राहत मिलेगी।
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सोतई में डेढ़ किलोमीटर जमीन पर चल रही प्रक्रिया
परियोजना का लगभग डेढ़ किलोमीटर हिस्सा सोतई गांव की जमीन से होकर गुजरना है। इस हिस्से में जमीन के स्वामित्व और उपयोग को लेकर नगर निगम और स्थानीय पक्षों के बीच कुछ समय से मतभेद की स्थिति बनी हुई थी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस हिस्से की जमीन के लिए आवश्यक मुआवजे की राशि जारी कर दी है। हालांकि स्वामित्व से जुड़े पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया चल रही है। अब जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से इस मामले में समाधान की दिशा में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
डीसी स्तर पर शुरू हुई पहल
सूत्रों के अनुसार एनएचएआई ने मामले को लेकर जिला प्रशासन से सहयोग का अनुरोध किया था। इसके बाद उपायुक्त आयुष सिन्हा ने स्थिति की समीक्षा कर समाधान के लिए कई स्तर पर प्रक्रिया शुरू करवाई है। प्रशासन की ओर से दोनों पक्षों की बात सुनने के साथ जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच और कागजी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि संवाद और दस्तावेजी स्पष्टता के माध्यम से विवाद का समाधान निकाला जा सकता है, जिससे परियोजना के निर्माण कार्य को गति मिलेगी।
मुआवजे की राशि कोर्ट में जमा
जानकारी के अनुसार एनएचएआई की ओर से भूमि अधिग्रहण से संबंधित अधिकारी (लैंड डीआरओ) के माध्यम से मुआवजे की राशि अदालत में जमा करवाई जा चुकी है। अब अंतिम निर्णय आने के बाद यह राशि वैध और पात्र जमीन मालिकों को दी जाएगी। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ने से जमीन से जुड़ी बाधा जल्द दूर होने की संभावना है, जिससे निर्माण कार्य को भी गति मिल सकेगी।
रोजाना यात्रियों को मिलेगी राहत
फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और पलवल क्षेत्र से रोजाना बड़ी संख्या में लोग नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक और आईटी क्षेत्रों में काम के लिए आते-जाते हैं। फिलहाल उन्हें दिल्ली या नोएडा के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ता है जहां अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है और यात्रा में डेढ़ से दो घंटे तक लग जाते हैं। ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनने के बाद यह दूरी काफी कम हो जाएगी और यात्रा का समय भी घटेगा। इससे दैनिक यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और उद्योग से जुड़े लोगों को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
यह मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में भी लाया गया है। जल्द ही इसका समाधान निकालकर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
धीरज सिंह, उपमहाप्रबंधक, एनएचएआई