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Faridabad News: क्रोशिया के धागों से बुन रहीं भविष्य का सपना
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क्रोशिया से आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं
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शहर की महिलाएं खिलौने, बैग, सजावटी फूल कर रहीं हैं तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर की महिलाएं अब क्रोशिया के धागों से न सिर्फ सुंदर वस्तुएं बना रही हैं, बल्कि अपने खाली समय को कमाई का जरिया भी बना रही हैं। सेक्टर- तीन स्थित बल्लभगढ़ की कई महिलाएं छोटे-छोटे समूहों में मिलकर खिलौने, बैग, सजावटी फूल और घरेलू उपयोग की आकर्षक वस्तुएं तैयार कर रही हैं।
इन महिलाओं के लिए यह काम सिर्फ शौक नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का एक मजबूत साधन बन चुका है। पुष्पा, ज्योति, संगीता और आशा अपने घर के कामों के बाद बचे हुए समय में यह काम करके हर महीने लगभग सात से आठ हजार रुपये तक की कमाई कर रही हैं। यह अतिरिक्त आय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद कर रही है।
पहले जहां कई महिलाएं घर तक सीमित थीं, वहीं अब वे अपने बनाए हुए उत्पादों को स्थानीय बाजारों, मेलों और कभी-कभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचकर पहचान बना रही हैं। क्रोशिया वर्क ने उन्हें न केवल आर्थिक मजबूती दी है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाया है।
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वे इस काम के लिए अलग से समय नहीं निकालतीं, बल्कि अपने घरेलू कामों को पूरा करने के बाद बचे हुए खाली समय में क्रोशिया का काम करती हैं। इस तरह वे घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने हुनर को भी समय देती हैं और उसी खाली समय को कमाई का जरिया बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
फरीदाबाद की ये महिलाएं साबित कर रही हैं कि सही अवसर और हुनर के साथ छोटे प्रयास भी बड़ी बदलाव की कहानी लिख सकते हैं।
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर की महिलाएं अब क्रोशिया के धागों से न सिर्फ सुंदर वस्तुएं बना रही हैं, बल्कि अपने खाली समय को कमाई का जरिया भी बना रही हैं। सेक्टर- तीन स्थित बल्लभगढ़ की कई महिलाएं छोटे-छोटे समूहों में मिलकर खिलौने, बैग, सजावटी फूल और घरेलू उपयोग की आकर्षक वस्तुएं तैयार कर रही हैं।
इन महिलाओं के लिए यह काम सिर्फ शौक नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का एक मजबूत साधन बन चुका है। पुष्पा, ज्योति, संगीता और आशा अपने घर के कामों के बाद बचे हुए समय में यह काम करके हर महीने लगभग सात से आठ हजार रुपये तक की कमाई कर रही हैं। यह अतिरिक्त आय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद कर रही है।
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पहले जहां कई महिलाएं घर तक सीमित थीं, वहीं अब वे अपने बनाए हुए उत्पादों को स्थानीय बाजारों, मेलों और कभी-कभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचकर पहचान बना रही हैं। क्रोशिया वर्क ने उन्हें न केवल आर्थिक मजबूती दी है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाया है।
वे इस काम के लिए अलग से समय नहीं निकालतीं, बल्कि अपने घरेलू कामों को पूरा करने के बाद बचे हुए खाली समय में क्रोशिया का काम करती हैं। इस तरह वे घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने हुनर को भी समय देती हैं और उसी खाली समय को कमाई का जरिया बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
फरीदाबाद की ये महिलाएं साबित कर रही हैं कि सही अवसर और हुनर के साथ छोटे प्रयास भी बड़ी बदलाव की कहानी लिख सकते हैं।