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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Former councillor among two acquitted in 16-year-old Bharat Bandh violence case

Delhi NCR News: भारत बंद के दौरान हिंसा के 16 साल पुराने मामले में पूर्व पार्षद समेत दो बरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 12 Oct 2026 06:33 PM IST
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-कोर्ट ने कहा-सिर्फ भीड़ में शामिल होने से कोई दोषी नहीं, आरोपियों की पहचान और भूमिका साबित करने में नाकाम रहा अभियोजन पक्ष
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अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली।
2010 में भारत बंद के दौरान दंगा, सड़क जाम और डीटीसी बसों के टायरों की हवा निकालने के 16 साल पुराने मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद विनोद कुमार मोंगा और राम सेवक को बरी किया है। अदालत ने कहा कि केवल भीड़ का हिस्सा होने से किसी व्यक्ति को दंगे या भीड़ के अन्य कथित अपराधों के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रेरणा राय की अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की पहचान और अपराध में उनकी भूमिका को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
अदालत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का भी उल्लेख किया। सुप्रीम कोर्ट के रामलीला मैदान मामले का हवाला देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत संरक्षित है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पांच जुलाई 2010 को भारत बंद के दौरान गीता कॉलोनी के श्मशान घाट चौक पर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए थे। आरोप था कि तत्कालीन पार्षद विनोद कुमार मोंगा और राम सेवक अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। भीड़ ने सड़क पर पत्थर रखकर और टायर जलाकर रास्ता बाधित किया। साथ ही डीटीसी बसों को रोककर उनके टायरों की हवा निकाल दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 149, 341 और 427 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मामले को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए, जिनमें तीन डीटीसी बस चालक शामिल थे।
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बस चालकों ने आरोपियों को पहचानने से किया इन्कार :
सुनवाई में बस चालक और शिकायतकर्ता योगेंद्र कुमार ने बताया कि घटनास्थल पर करीब 70 से 80 लोगों की भीड़ थी, लेकिन वह आरोपियों की पहचान नहीं कर सकता। दूसरे बस चालक कप्तान सिंह ने भी विनोद कुमार मोंगा और राम सेवक को पहचानने में असमर्थता जताई। तीसरे चालक गोविंद ने घटना की जानकारी होने से ही इन्कार कर दिया। जांच अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि मामले में किसी यात्री या आम व्यक्ति ने शिकायत नहीं की थी। घटना में किसी के घायल होने की जानकारी भी नहीं थी और संबंधित बसों का मैकेनिकल निरीक्षण नहीं कराया गया था।
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