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Ghaziabad News: फ्लैट आवंटित नहीं किया, आवास विकास परिषद को ब्याज समेत लौटानी होगी रकम
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गाजियाबाद। वसुंधरा योजना में फ्लैट के लिए आवेदन और निर्धारित धनराशि जमा करने के बावजूद आवंटन पत्र जारी नहीं करना उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए परिषद को उपभोक्ता की जमा धनराशि 43,233 रुपये के साथ ही 18 जनवरी 2023 से वास्तविक भुगतान तक छह प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है। इसके अलावा मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न के लिए 10 हजार रुपये और वाद खर्च के पांच हजार रुपये भी देने होंगे।
आयोग में दर्ज परिवाद के अनुसार, वैशाली निवासी हर्ष गुप्ता ने वसुंधरा योजना-3 में फ्लैट संख्या 16/604 के लिए आवेदन किया था। फ्लैट की कीमत 8,64,660 रुपये निर्धारित थी। उपभोक्ता ने पांच प्रतिशत के हिसाब से 43,233 रुपये 18 जनवरी 2023 को जमा किए थे। इसके बावजूद उन्हें आवंटन पत्र जारी नहीं किया गया।
हर्ष का कहना था कि आवंटन पत्र के लिए वह कई बार परिषद कार्यालय गए और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने एक जुलाई 2024 को कानूनी नोटिस भेजा, जो तीन जुलाई को स्पीड पोस्ट से परिषद को पहुंच गया। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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आवंटन के बजाय रकम लौटाने का आदेश
आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि उपभोक्ता की ओर से धनराशि जमा करने के साक्ष्य उपलब्ध हैं, लेकिन संबंधित फ्लैट की मौजूदा उपलब्धता और उसके आवंटन की स्थिति स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। ऐसे में आयोग ने फ्लैट आवंटित करने का आदेश देना उचित नहीं समझा। हालांकि, आवंटन पत्र जारी नहीं किए जाने को सेवा में कमी मानते हुए जमा धनराशि ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया। परिषद को आदेश की तारीख से 30 दिन के भीतर भुगतान करना होगा। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर जमा धनराशि पर नौ प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा।
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आयोग में दर्ज परिवाद के अनुसार, वैशाली निवासी हर्ष गुप्ता ने वसुंधरा योजना-3 में फ्लैट संख्या 16/604 के लिए आवेदन किया था। फ्लैट की कीमत 8,64,660 रुपये निर्धारित थी। उपभोक्ता ने पांच प्रतिशत के हिसाब से 43,233 रुपये 18 जनवरी 2023 को जमा किए थे। इसके बावजूद उन्हें आवंटन पत्र जारी नहीं किया गया।
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हर्ष का कहना था कि आवंटन पत्र के लिए वह कई बार परिषद कार्यालय गए और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने एक जुलाई 2024 को कानूनी नोटिस भेजा, जो तीन जुलाई को स्पीड पोस्ट से परिषद को पहुंच गया। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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आवंटन के बजाय रकम लौटाने का आदेश
आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि उपभोक्ता की ओर से धनराशि जमा करने के साक्ष्य उपलब्ध हैं, लेकिन संबंधित फ्लैट की मौजूदा उपलब्धता और उसके आवंटन की स्थिति स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। ऐसे में आयोग ने फ्लैट आवंटित करने का आदेश देना उचित नहीं समझा। हालांकि, आवंटन पत्र जारी नहीं किए जाने को सेवा में कमी मानते हुए जमा धनराशि ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया। परिषद को आदेश की तारीख से 30 दिन के भीतर भुगतान करना होगा। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर जमा धनराशि पर नौ प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा।