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UP: अफगानी मूल के है गिरफ्तार मां-बेटा, प्रति पासपोर्ट वसूलते थे दो लाख; आईबी-एटीएस ने आरोपियों से की पूछताछ

अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 03 Feb 2026 03:19 PM IST
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सार

गाजियाबाद में फर्जी पासपोर्ट मामले में आईबी और एटीएस ने आरोपियों से पूछताछ की है। लापरवाही में डाक मुंशी निलंबित कर दिया गया है। गिरफ्तार मां-बेटा अफगानी मूल के हैं। नौ सितंबर से 12 नवंबर के बीच फर्जी पासपोर्ट बने थे।

Ghaziabad fake passport IB and ATS interrogated accused and post office clerk was suspended for negligence
गाजियाबाद में पासपोर्ट घोटाले का पर्दाफाश - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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गाजियाबाद में फर्जी पासपोर्ट मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। सोमवार को एटीएस नोएडा के साथ ही आईबी व एलआईयू की टीम भोजपुर थाने पहुंची। उन्होंने गिरफ्तार आरोपियों विवेक गांधी, प्रकाश सुब्बा, पोस्टमैन अरुण कुमार, अमनदीप सिंह और सतवंत कौर से करीब दो घंटे पूछताछ की। इसमें सामने आया कि गिरफ्तार किए गए मां-बेटा सतवंत और अमनदीप अफगान मूल के हैं।
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मामले में डीसीपी देहात ने थाने के डाक मुंशी दीपक को निलंबित कर दिया है। चार अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच हो रही है। सूत्रों के अनुसार, मामला बढ़ने के बाद डाक मुंशी थाने नहीं आया। साथ ही प्रकरण की जांच भोजपुर थाने से क्राइम ब्रांच को दे दी गई है।
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अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि वर्ष 2025 में भोजपुर, त्यौड़ी व सैदपुर हुसैनपुर के पतों पर नौ सितंबर से 12 नवंबर के बीच 22 फर्जी पासपोर्ट तैयार किए गए थे। मामले में पासपोर्ट अथॉरिटी की तरफ से भोजपुर थाने में सूचना दी गई थी। इसमें पुलिस की तरफ से ही केस दर्ज कराया गया है।
 

उन्होंने बताया कि फर्जी पासपोर्ट तीन अलग-अलग मोबाइल नंबर से बने हैं। इसमें कूटरचित आधार कार्ड, पैन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र इस्तेमाल किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि दिल्ली के तीन परिवार इन फर्जी पासपोर्ट के जरिये दार्जिलिंग शिफ्ट हो गए हैं। साथ ही इनसे अफगानिस्तान में भी दिल्ली के कुछ लोगों का आना-जाना उजागर हुआ है। मामले में सत्यापन में इस्तेमाल किए गए चार टैबलेट की भी जांच की जा रही है। एलआईयू से भी जवाब मांगा गया है।

 

अंतरराज्यीय गिरोह ऐसे करता था काम
पुलिस सूत्रों के अनुसार, फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले इस गिरोह के तार कई राज्यों में फैले हैं। गिरोह न्यायिक कार्यवाही से बचने के लिए अपराधियों, वांछितों, पैरोल जंपर्स व अन्य लोगों के फर्जी पासपोर्ट तैयार कर उन्हें विदेश भेजने में सहयोग करता था। इसके लिए फर्जी आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड भी तैयार किए जाते थे।
 

प्रति पासपोर्ट एक से दो लाख रुपये वसूलते थे
पुलिस की प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह एक फर्जी पासपोर्ट बनाने के लिए एक से दो लाख रुपये तक वसूलता था। पुलिस को सत्यापन करने के नाम पर 15 हजार और पोस्टमैन को इसकी रिपोर्ट मुहैया कराने के लिए दो से पांच हजार रुपये प्रति पासपोर्ट रिश्वत दी जाती थी।
 

आईटी एक्सपर्ट भी गिरोह में शामिल
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह कंप्यूटर, स्कैनर, रंगीन प्रिंटर व अन्य संसाधनों का प्रयोग कर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड सहित अन्य दस्तावेज तैयार करता था। पासपोर्ट बनवाने का वाले का फोटो वास्तविक होता है, जबकि अन्य सभी दस्तावेज फर्जी।

मामले में लापरवाही करने वाले डाक मुंशी दीपक को निलंबित किया गया है। पुलिसकर्मियों की भूमिका की की जांच की जा रही है। पोस्टमैन पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया है। पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई निलंबन तक सीमित नहीं होगी। इनके खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। फिलहाल, एक पुलिसकर्मी को चिह्नित कर लिया गया है। चार की संलिप्तता उजागर हुई है। मंगलवार को रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी।-सुरेंद्र नाथ तिवारी, डीसीपी ग्रामीण

 

कई कुख्यात भी बनवा चुके हैं फर्जी पासपोर्ट
आपराधिक प्रवृत्ति के लोग गाजियाबाद ही नहीं, पश्चिमी यूपी के कई जिलों से फर्जी पासपोर्ट बनवा चुके हैं। इस तरह के प्रकरणों में कई पुलिसकर्मियों पर गाज भी गिर चुकी है। अब भोजपुर थाना क्षेत्र में 22 फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

पश्चिमी यूपी को हरियाणा के गैंगस्टर भी अपने मंसूबों को अंजाम देने के लिए सुरक्षित मानते हैं। हरियाणा का गैंगस्टर हिमांशु उर्फ भाऊ मुरादाबाद से फर्जी नाम और पते पर पासपोर्ट बनवाकर साल 2020 में अमेरिका भाग गया था। गैंगस्टर हिमांशु रोहतक के टिटौली गांव का निवासी है। उस पर हत्या, रंगदारी और जानलेवा हमले के दर्जनों मुकदमे है।

 

हरियाणा और दिल्ली पुलिस से बचने के लिए उसने यूपी के मुरादाबाद की नगर पंचायत अमवानपुर से कुनाल के नाम से फर्जी पासपोर्ट बनवाया। उसके बाद वह पुलिस को चकमा देकर अमेरिका भाग गया। इसी तरह हरियाणा के कुख्यात गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई के दो गुर्गे राहुल कुमार और महेंद्र कुमार मेरठ से पासपोर्ट बनवाकर 2024 में दुबई भाग गए। ऐसे कई बदमाश है, जो पश्चिमी यूपी के जिलों में फर्जी पासपोर्ट बनवाकर विदेश भाग चुके हैं।

 

नोएडा से भी फर्जीवाड़ा करने वाले हुए गिरफ्तार
गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट की थाना बिसरख पुलिस ने वीजा व पासपोर्ट बनाने वाले महिला समेत दो लोगों को साल 2025 में गिरफ्तार किया था। दिल्ली निवासी मुकेश और नेपाल निवासी सुषमा फर्जी पासपोर्ट व वीजा बनवाने और विदेश में नौकरी लगवाने के नाम पर मोटी रकम वसलूते थे। आरोपियों ने पासपोर्ट के एवज में करीब 50 लाख रुपये हड़पे थे।

 

पहले भी आए ऐसे मामले
साल 2025 में देहली गेट थाने में एक आरोपी भावनपुर के अब्दुल्लापुर निवासी असद राजा ने जानकारी छिपाकर पासपोर्ट बनवाया और विदेश भागने की फिराक में था। एक अन्य व्यक्ति ने पुलिस में केस दर्ज कराया तो मामले का खुलासा हुआ।

 

पांच रोहिंग्याओं के फर्जी पासपोर्ट हो चुके है जारी
मेरठ में साल 2013 से 2016 तक पांच रोहिंग्याओं के फर्जी पासपोर्ट जारी हो चुके हैं। इस मामले का साल 2021 में खुलासा हुआ था। एटीएस की जांच में मेरठ के पते पर हाफिज शफीक, जो लिसाड़ी गेट का दर्शाया गया था के नाम से पासपोर्ट बनाना सामने आया था। रोहिंग्या अबू आलम निवासी नया मकान अहमद नगर लिसाड़ी गेट, मोहम्मद अजीज, रिहाना मोहम्मद हसन निवासी जाटव स्ट्रीट बनियापाड़ा कोतवाली मोहम्मद उल्ली निवासी का फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट मेरठ से तैयार किया गया था।
 
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