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Ghaziabad News: गरिमा के साथ अंतिम सफर की ओर हरीश...
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गाजियाबाद। सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु पाने वाले हरीश को दिल्ली स्थित एम्स के इंटरनेशनल रेगुलेटरी कोऑपरेशन फॉर हर्बल मेडिसिन्स (आईआरसीएच) सेंटर में रखा गया है। यहां गंभीर और अंतिम अवस्था के मरीजों को पैलिएटिव केयर के तहत देखभाल दी जा रही है। इस व्यवस्था में उपचार का उद्देश्य मरीज की जिंदगी को कृत्रिम उपकरणों के सहारे बढ़ाना नहीं, बल्कि उसे कम से कम पीड़ा के साथ आरामदायक और गरिमापूर्ण जीवन देना होता है।
सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च को दिए गए पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति से संबंधित दिशा निर्देशों के तहत हरीश के जीवन रक्षक उपकरणों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान चिकित्सा टीम का प्रयास रहेगा कि मरीज को अधिकतम आराम और सम्मानजनक देखभाल मिल सके।
वर्तमान में कई चिकित्सकों की टीम हरीश की लगातार निगरानी कर रही है और उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। एम्स के एक चिकित्सक ने बताया कि यदि हरीश की हालत अचानक बिगड़ती है या उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है तो उन्हें वेंटिलेटर या आईसीयू में शिफ्ट नहीं किया जाएगा। ऐसी स्थिति में डॉक्टर केवल सहयोगी देखभाल करेंगे ताकि मरीज को कम से कम दर्द और असुविधा हो। इलाज का पूरा ध्यान इस बात पर रहेगा कि हरीश को आराम मिले। उन्हें अनावश्यक पीड़ा न हो और उनकी गरिमा बनी रहे।
डॉक्टरों के अनुसार इस दौरान खासतौर पर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मरीज को दर्द से राहत मिलती रहे। शरीर पर बेडसोर न बनें और किसी भी प्रकार के दर्द या कष्ट के लक्षण न बढ़ें। चिकित्सकों की टीम मरीज की शारीरिक और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए लगातार आवश्यक देखभाल करती रहेगी।
एम्स के पैलिएटिव केयर विभाग के एक चिकित्सक ने बताया कि इस तरह की देखभाल में मरीज की बार-बार जांच नहीं की जाती। इसके बजाय उसकी स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जाती है। जरूरत के अनुसार उपचार में बदलाव किया जाता है। पोषण की व्यवस्था भी अचानक बंद नहीं की जाती, बल्कि स्थिति के अनुसार धीरे-धीरे कम की जा सकती है। हालांकि इस बारे में अंतिम निर्णय मरीज की स्थिति को देखते हुए इलाज कर रही मेडिकल टीम ही लेती है।
डॉक्टरों का कहना है कि पैलिएटिव केयर के दौरान मरीज कितने समय तक जीवित रहेगा, इसका सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं होता। यह पूरी तरह मरीज की शारीरिक स्थिति और प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। कोई मरीज कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है तो कुछ मामलों में यह अवधि एक सप्ताह या उससे अधिक भी हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार हरीश के गले में एक ट्यूब डली हुई है, जिसके माध्यम से वह सांस लेते हैं। करीब 13 वर्ष पहले उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट दिए जाने के दौरान यह ट्यूब डाली गई थी और तब से यह लगी हुई है। फिलहाल वह बिना किसी कृत्रिम सहारे के खुद से सांस ले पा रहे हैं। पेट में लगी ट्यूब के माध्यम से उन्हें पोषण दिया जा रहा है और मूत्र निकासी के लिए कैथेटर लगाया गया है।
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यूके व मलेशिया के नंबरों पर भी भेजी गई सैन्य ठिकानों की लोकेशन-वीडियो
- जांच में दो अन्य देशों के नंबर भी आरोपियों के मोबाइल फोन से मिले
- दिल्ली में दो स्थानों पर कैमरे लगाने की पुष्टि, पुलिस ने एक बरामद किया
- 11वीं पास था सुहेल, ऑनलाइन खातों में ट्रांसफर करता था रकम
- सभी छह आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया हुई शुरू
माई सिटी रिपोर्टर
कौशांबी (गाजियाबाद)। देश के डिफेंस स्पेस व अन्य स्थानों की जानकारी केवल पाकिस्तान ही नहीं यूके और मलेशिया के नंबरों पर भी भेजी जा रही थी। देश की मुखबिरी करने के आरोप में पकड़े गए छह लोगों से पूछताछ में दूसरे दिन यह बात सामने आई है। इन जासूसों को ऑनलाइन बैंक खातों में भुगतान होता था। यह रकम सुहेल अपने दोस्तों के बैंक खातों से ट्रांसफर कराता था। पुलिस को शुरुआती जांच में इसका पता चला है। इस लेनदेन के लिए उसने अपना निजी खाता कभी इस्तेमाल नहीं किया।
कहने को बेरोजगार लेकिन समाज को दिखाने के लिए सुहेल और उसके साथी सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम करते थे। किसे पता था कि इन कैमरों का एक्सिस देश में ही नहीं करीबी मुल्क पाकिस्तान के पास भी होगा। वह भी ऐसे स्थानों का जहां सबसे ज्यादा सुरक्षा और सबसे ज्यादा भीड़भाड़ रहती है। पुलिस सूत्रों के अनुसार सुहेल 11वीं पास है। पुलिस ने सुहेल के परिवार वालों से संपर्क करने का प्रयास किया है। जांच में सामने आया है कि सुहेल और बाकी पांच आरोपियों को लोकेशन, वीडियो और फुटेज भेजने व सीसीटीवी कैमरों का एक्सिस देने के बदले ऑनलाइन भुगतान होता था। राज वाल्मीकि से लेकर बाकी अन्य पांच लोगों तक उनके बैंक खाते में रकम पहुंचती थी। यह रकम सुहेल अपने अन्य दोस्तों के खातों से ट्रांसफर कराता था। पुलिस ने सभी आरोपियों के खाते फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिन खातों से रकम ट्रांसफर हुई, पुलिस उन सभी खाताधारकों की भी जांच करेगी। आरोपियों से पूछताछ के लिए सोमवार को कोर्ट में रिमांड पत्र दाखिल किया जाएगा।
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विदेशी व्यक्ति को बुलाते थे सरदार, जो देता था टास्क
सभी छह आरोपियों के मोबाइल फोन से पुलिस को कई जानकारियां मिली हैं। सूत्रों के अनुसार सभी आरोपी जिस विदेशी व्यक्ति के संपर्क में थे उसे सरदार बुलाते थे। वही आरोपियों को व्हाट्सएप पर अलग-अलग स्थानों के टास्क देता था। टास्क पूरा होने पर ही आरोपियों को भुगतान मिलता था। यह भी पता चला है कि महिला आरोपी इरम सरदार से इंस्टाग्राम के जरिए पहले से जुड़ी थी। उसने ही सुहेल का संपर्क सरदार से कराया था।
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आई फोन की खरीद से शक में आया राज
गिरफ्तार हुआ आरोपी राज वाल्मीकि क्षेत्र में ही फास्ट फूड का स्टॉल लगाकर कमाई करता था। कुछ समय पहले ही आरोपी ने आईफोन खरीदा था। इसके बाद अपना फूड स्टॉल भी बंद कर दिया। यह बात जब शुक्रवार को हुई कार्रवाई में पुलिस के सामने आई तब उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इसके बाद एक-एक कर नाम सामने आने लगे।
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दिल्ली कैंट स्टेशन व आर्मी क्षेत्र के पास लगाया था सीसीटीवी कैमरा
पुलिस टीम को आरोपियों के मोबाइल फोन में यूके और मलेशिया के भी दो नंबर मिले हैं। सूत्रों के अनुसार जांच में पता चला है कि सभी आरोपियों को इन्हीं देशों के नंबर से निर्देश वाले मैसेज आते थे और टास्क दिया जाता था। इसके बाद आरोपी इन नंबरों पर सैन्य ठिकानों की वीडियो, लोकेशन और फोटो भेजते थे। सरदार के निर्देश पर ही आरोपियों ने दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन और आर्मी कैंट क्षेत्र के पास सीसीटीवी कैमरा लगाया था। इनका एक्सिस भी विदेशी व्यक्ति को दिया था। हालांकि पुलिस ने एक कैमरा बरामद कर लिया है, लेकिन इसके बारे में आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
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10वीं के छात्र को किया शामिल, 25 वर्ष तक हैं आरोपी
गिरफ्तार हुए सभी छह आरोपी 19 से 25 आयु वर्ष तक के हैं। वहीं एक आरोपी बदायूं जिले के उझानी का रहने वाला 20 वर्षीय शिवा वाल्मीकि 10वीं का छात्र है। इस वर्ष ही उसने बोर्ड की परीक्षाएं दी हैं। सबसे कम उम्र का आरोपी 19 वर्षीय भोवापुर निवासी प्रवीन है। इनके अलावा 23, 21 और 25 आयु वर्ष के लोग इस मामले में गिरफ्तार हुए हैं। ऐसे में युवाओं को रुपयों का लालच देकर या धार्मिकता के नाम पर ब्रेनवॉश कर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल करना बेहद चिंताजनक बनता जा रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च को दिए गए पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति से संबंधित दिशा निर्देशों के तहत हरीश के जीवन रक्षक उपकरणों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान चिकित्सा टीम का प्रयास रहेगा कि मरीज को अधिकतम आराम और सम्मानजनक देखभाल मिल सके।
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वर्तमान में कई चिकित्सकों की टीम हरीश की लगातार निगरानी कर रही है और उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। एम्स के एक चिकित्सक ने बताया कि यदि हरीश की हालत अचानक बिगड़ती है या उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है तो उन्हें वेंटिलेटर या आईसीयू में शिफ्ट नहीं किया जाएगा। ऐसी स्थिति में डॉक्टर केवल सहयोगी देखभाल करेंगे ताकि मरीज को कम से कम दर्द और असुविधा हो। इलाज का पूरा ध्यान इस बात पर रहेगा कि हरीश को आराम मिले। उन्हें अनावश्यक पीड़ा न हो और उनकी गरिमा बनी रहे।
डॉक्टरों के अनुसार इस दौरान खासतौर पर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मरीज को दर्द से राहत मिलती रहे। शरीर पर बेडसोर न बनें और किसी भी प्रकार के दर्द या कष्ट के लक्षण न बढ़ें। चिकित्सकों की टीम मरीज की शारीरिक और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए लगातार आवश्यक देखभाल करती रहेगी।
एम्स के पैलिएटिव केयर विभाग के एक चिकित्सक ने बताया कि इस तरह की देखभाल में मरीज की बार-बार जांच नहीं की जाती। इसके बजाय उसकी स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जाती है। जरूरत के अनुसार उपचार में बदलाव किया जाता है। पोषण की व्यवस्था भी अचानक बंद नहीं की जाती, बल्कि स्थिति के अनुसार धीरे-धीरे कम की जा सकती है। हालांकि इस बारे में अंतिम निर्णय मरीज की स्थिति को देखते हुए इलाज कर रही मेडिकल टीम ही लेती है।
डॉक्टरों का कहना है कि पैलिएटिव केयर के दौरान मरीज कितने समय तक जीवित रहेगा, इसका सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं होता। यह पूरी तरह मरीज की शारीरिक स्थिति और प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। कोई मरीज कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है तो कुछ मामलों में यह अवधि एक सप्ताह या उससे अधिक भी हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार हरीश के गले में एक ट्यूब डली हुई है, जिसके माध्यम से वह सांस लेते हैं। करीब 13 वर्ष पहले उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट दिए जाने के दौरान यह ट्यूब डाली गई थी और तब से यह लगी हुई है। फिलहाल वह बिना किसी कृत्रिम सहारे के खुद से सांस ले पा रहे हैं। पेट में लगी ट्यूब के माध्यम से उन्हें पोषण दिया जा रहा है और मूत्र निकासी के लिए कैथेटर लगाया गया है।
यूके व मलेशिया के नंबरों पर भी भेजी गई सैन्य ठिकानों की लोकेशन-वीडियो
- जांच में दो अन्य देशों के नंबर भी आरोपियों के मोबाइल फोन से मिले
- दिल्ली में दो स्थानों पर कैमरे लगाने की पुष्टि, पुलिस ने एक बरामद किया
- 11वीं पास था सुहेल, ऑनलाइन खातों में ट्रांसफर करता था रकम
- सभी छह आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया हुई शुरू
माई सिटी रिपोर्टर
कौशांबी (गाजियाबाद)। देश के डिफेंस स्पेस व अन्य स्थानों की जानकारी केवल पाकिस्तान ही नहीं यूके और मलेशिया के नंबरों पर भी भेजी जा रही थी। देश की मुखबिरी करने के आरोप में पकड़े गए छह लोगों से पूछताछ में दूसरे दिन यह बात सामने आई है। इन जासूसों को ऑनलाइन बैंक खातों में भुगतान होता था। यह रकम सुहेल अपने दोस्तों के बैंक खातों से ट्रांसफर कराता था। पुलिस को शुरुआती जांच में इसका पता चला है। इस लेनदेन के लिए उसने अपना निजी खाता कभी इस्तेमाल नहीं किया।
कहने को बेरोजगार लेकिन समाज को दिखाने के लिए सुहेल और उसके साथी सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम करते थे। किसे पता था कि इन कैमरों का एक्सिस देश में ही नहीं करीबी मुल्क पाकिस्तान के पास भी होगा। वह भी ऐसे स्थानों का जहां सबसे ज्यादा सुरक्षा और सबसे ज्यादा भीड़भाड़ रहती है। पुलिस सूत्रों के अनुसार सुहेल 11वीं पास है। पुलिस ने सुहेल के परिवार वालों से संपर्क करने का प्रयास किया है। जांच में सामने आया है कि सुहेल और बाकी पांच आरोपियों को लोकेशन, वीडियो और फुटेज भेजने व सीसीटीवी कैमरों का एक्सिस देने के बदले ऑनलाइन भुगतान होता था। राज वाल्मीकि से लेकर बाकी अन्य पांच लोगों तक उनके बैंक खाते में रकम पहुंचती थी। यह रकम सुहेल अपने अन्य दोस्तों के खातों से ट्रांसफर कराता था। पुलिस ने सभी आरोपियों के खाते फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिन खातों से रकम ट्रांसफर हुई, पुलिस उन सभी खाताधारकों की भी जांच करेगी। आरोपियों से पूछताछ के लिए सोमवार को कोर्ट में रिमांड पत्र दाखिल किया जाएगा।
विदेशी व्यक्ति को बुलाते थे सरदार, जो देता था टास्क
सभी छह आरोपियों के मोबाइल फोन से पुलिस को कई जानकारियां मिली हैं। सूत्रों के अनुसार सभी आरोपी जिस विदेशी व्यक्ति के संपर्क में थे उसे सरदार बुलाते थे। वही आरोपियों को व्हाट्सएप पर अलग-अलग स्थानों के टास्क देता था। टास्क पूरा होने पर ही आरोपियों को भुगतान मिलता था। यह भी पता चला है कि महिला आरोपी इरम सरदार से इंस्टाग्राम के जरिए पहले से जुड़ी थी। उसने ही सुहेल का संपर्क सरदार से कराया था।
आई फोन की खरीद से शक में आया राज
गिरफ्तार हुआ आरोपी राज वाल्मीकि क्षेत्र में ही फास्ट फूड का स्टॉल लगाकर कमाई करता था। कुछ समय पहले ही आरोपी ने आईफोन खरीदा था। इसके बाद अपना फूड स्टॉल भी बंद कर दिया। यह बात जब शुक्रवार को हुई कार्रवाई में पुलिस के सामने आई तब उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इसके बाद एक-एक कर नाम सामने आने लगे।
दिल्ली कैंट स्टेशन व आर्मी क्षेत्र के पास लगाया था सीसीटीवी कैमरा
पुलिस टीम को आरोपियों के मोबाइल फोन में यूके और मलेशिया के भी दो नंबर मिले हैं। सूत्रों के अनुसार जांच में पता चला है कि सभी आरोपियों को इन्हीं देशों के नंबर से निर्देश वाले मैसेज आते थे और टास्क दिया जाता था। इसके बाद आरोपी इन नंबरों पर सैन्य ठिकानों की वीडियो, लोकेशन और फोटो भेजते थे। सरदार के निर्देश पर ही आरोपियों ने दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन और आर्मी कैंट क्षेत्र के पास सीसीटीवी कैमरा लगाया था। इनका एक्सिस भी विदेशी व्यक्ति को दिया था। हालांकि पुलिस ने एक कैमरा बरामद कर लिया है, लेकिन इसके बारे में आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
10वीं के छात्र को किया शामिल, 25 वर्ष तक हैं आरोपी
गिरफ्तार हुए सभी छह आरोपी 19 से 25 आयु वर्ष तक के हैं। वहीं एक आरोपी बदायूं जिले के उझानी का रहने वाला 20 वर्षीय शिवा वाल्मीकि 10वीं का छात्र है। इस वर्ष ही उसने बोर्ड की परीक्षाएं दी हैं। सबसे कम उम्र का आरोपी 19 वर्षीय भोवापुर निवासी प्रवीन है। इनके अलावा 23, 21 और 25 आयु वर्ष के लोग इस मामले में गिरफ्तार हुए हैं। ऐसे में युवाओं को रुपयों का लालच देकर या धार्मिकता के नाम पर ब्रेनवॉश कर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल करना बेहद चिंताजनक बनता जा रहा है।