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डिजिटल अरेस्ट : पहलगाम हमले से संबंध बता शिक्षा विभाग की रिटायर्ड महिला अफसर से सवा करोड़ की ठगी
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गाजियाबाद। साइबर ठगों ने बेसिक शिक्षा विभाग की रिटायर्ड महिला अफसर को पहलगाम हमले में उनका नाम आने की बात कहकर डिजिटल अरेस्ट करके उनसे सवा करोड़ रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। आरोपियों ने एक सप्ताह तक उनके अंदर इतना डर बनाकर रखा कि उन्होंने न किसी से कोई बात की और न ही कुछ खाया पिया। जब ठगों को और पैसा मिलने की उम्मीद खत्म हो गई तो उन्होंने संपर्क तोड़ दिया। इसके बाद उनको ठगी के बारे में पता चला। साइबर थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्जकर जांच शुरू की।
मुरादनगर निवासी 71 वर्षीय महिला बेसिक शिक्षा विभाग में अपर शिक्षा निदेशक पद से रिटायर्ड अधिकारी हैं। उन्होंने बताया कि 28 जुलाई को दोपहर करीब 12 बजे उनके मोबाइल फोन पर एक अज्ञात महिला का फोन आया। उसने खुद को सीनियर एटीएस निरीक्षक अनीता शर्मा बताया। उसने कहा कि पहलगाम के हमलावर उमर के पास उनके नाम से जारी हुआ सिम कार्ड मिला है। उन्होंने सिम के बारे में जानकारी से मना किया तो महिला ने एटीएस पुणे का अधिकारी बताते हुए विजय खन्ना से बात करने के लिए नंबर दिया। उसने दावा किया कि उनके नाम से मुंबई के कोलावा स्थित केनरा बैंक में खाता खोला गया है और उस खाते के जरिये पहलगाम के आतंकवादियों को पैसा भेजा गया है। यह सुनकर वह घबरा गईं। इसके तुरंत बाद आरोपियों ने कहा कि उनके खिलाफ सीबीआई
कार्यालय पुणे से गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। इसके बाद व्हाट्सएप पर कथित गिरफ्तारी वारंट की कॉपी भेज दी। इसे देख वह और डर गईं। फिर कॉल करके एक आरोपी ने कहा कि इस मामले में नरेश गोयल नाम का आरोपी गिरफ्तार हो चुका है। उसके पास उनका आधार कार्ड, केनरा बैंक का एटीएम कार्ड, चेकबुक और पासबुक मिली है। जब उन्होंने सवाल किया तो आरोपी ने कहा कि जांच में उनका नाम सामने आया है। इसके बाद उनको कुछ समझ नहीं आया। वीडियो कॉल पर उनसे बैंक खातों, एफडी, लॉकर, पीपीएफ और जमा धनराशि समेत पूरी वित्तीय जानकारी हासिल कर ली गई है।
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-फर्जी जज और करा दी पेशी :
29 जुलाई को वीडियो कॉल के माध्यम से सूर्यकांत नाम के व्यक्ति के सामने उनकी पेशी कराई गई। खुद को न्यायाधीश बताने वाले व्यक्ति ने उनसे कहा कि उनकी नरेश गोयल से 45 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई है और जांच के लिए मामले को फोरेंसिक भेजा गया है। इसके बाद फर्जी तौर पर गिरफ्तारी वारंट स्थगित करने की बात कही गई। उन्हें बताया गया कि जमानत तब तक नहीं मिलेगी, जब तक वह अपनी पूरी धनराशि रिजर्व बैंक में जमा नहीं कर देतीं। जांच के बाद पूरा पैसा रिलीज होगा। आरोपियों ने उनको अलग-अलग खाते दिए, इनमें पैसा जमा करने को कहा गया। उन्होंने सवा करोड़ रुपये दिए गए खातों में भेज दिए। चार अगस्त को खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाले आरोपी ने जमानत के नाम पर तत्काल 20 लाख रुपये और जमा कराने के लिए कहा। उन्होंने रकम की व्यवस्था अपने मित्रों से करने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान उन्हें अपने साथ धोखाधड़ी होने का संदेह हुआ। उन्होंने अपने भांजे को पूरी घटना की जानकारी दी और उसके साथ साइबर थाने पहुंचीं। इसके बावजूद पांच अगस्त को उनको अज्ञात नंबर से फोन आया और उनको डराने का प्रयास किया गया। डीसीपी धवल जायसवाल ने बताया कि खातों में जमा रकम को फ्रीज कराने की कार्रवाई शुरू करा दी गई है। आरोपियों के पहचान के लिए पुलिस की तीन टीमें काम कर रही हैं।
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मुरादनगर निवासी 71 वर्षीय महिला बेसिक शिक्षा विभाग में अपर शिक्षा निदेशक पद से रिटायर्ड अधिकारी हैं। उन्होंने बताया कि 28 जुलाई को दोपहर करीब 12 बजे उनके मोबाइल फोन पर एक अज्ञात महिला का फोन आया। उसने खुद को सीनियर एटीएस निरीक्षक अनीता शर्मा बताया। उसने कहा कि पहलगाम के हमलावर उमर के पास उनके नाम से जारी हुआ सिम कार्ड मिला है। उन्होंने सिम के बारे में जानकारी से मना किया तो महिला ने एटीएस पुणे का अधिकारी बताते हुए विजय खन्ना से बात करने के लिए नंबर दिया। उसने दावा किया कि उनके नाम से मुंबई के कोलावा स्थित केनरा बैंक में खाता खोला गया है और उस खाते के जरिये पहलगाम के आतंकवादियों को पैसा भेजा गया है। यह सुनकर वह घबरा गईं। इसके तुरंत बाद आरोपियों ने कहा कि उनके खिलाफ सीबीआई
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कार्यालय पुणे से गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। इसके बाद व्हाट्सएप पर कथित गिरफ्तारी वारंट की कॉपी भेज दी। इसे देख वह और डर गईं। फिर कॉल करके एक आरोपी ने कहा कि इस मामले में नरेश गोयल नाम का आरोपी गिरफ्तार हो चुका है। उसके पास उनका आधार कार्ड, केनरा बैंक का एटीएम कार्ड, चेकबुक और पासबुक मिली है। जब उन्होंने सवाल किया तो आरोपी ने कहा कि जांच में उनका नाम सामने आया है। इसके बाद उनको कुछ समझ नहीं आया। वीडियो कॉल पर उनसे बैंक खातों, एफडी, लॉकर, पीपीएफ और जमा धनराशि समेत पूरी वित्तीय जानकारी हासिल कर ली गई है।
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-फर्जी जज और करा दी पेशी :
29 जुलाई को वीडियो कॉल के माध्यम से सूर्यकांत नाम के व्यक्ति के सामने उनकी पेशी कराई गई। खुद को न्यायाधीश बताने वाले व्यक्ति ने उनसे कहा कि उनकी नरेश गोयल से 45 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई है और जांच के लिए मामले को फोरेंसिक भेजा गया है। इसके बाद फर्जी तौर पर गिरफ्तारी वारंट स्थगित करने की बात कही गई। उन्हें बताया गया कि जमानत तब तक नहीं मिलेगी, जब तक वह अपनी पूरी धनराशि रिजर्व बैंक में जमा नहीं कर देतीं। जांच के बाद पूरा पैसा रिलीज होगा। आरोपियों ने उनको अलग-अलग खाते दिए, इनमें पैसा जमा करने को कहा गया। उन्होंने सवा करोड़ रुपये दिए गए खातों में भेज दिए। चार अगस्त को खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाले आरोपी ने जमानत के नाम पर तत्काल 20 लाख रुपये और जमा कराने के लिए कहा। उन्होंने रकम की व्यवस्था अपने मित्रों से करने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान उन्हें अपने साथ धोखाधड़ी होने का संदेह हुआ। उन्होंने अपने भांजे को पूरी घटना की जानकारी दी और उसके साथ साइबर थाने पहुंचीं। इसके बावजूद पांच अगस्त को उनको अज्ञात नंबर से फोन आया और उनको डराने का प्रयास किया गया। डीसीपी धवल जायसवाल ने बताया कि खातों में जमा रकम को फ्रीज कराने की कार्रवाई शुरू करा दी गई है। आरोपियों के पहचान के लिए पुलिस की तीन टीमें काम कर रही हैं।