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Ghaziabad News: चांद छिपा बादल में...आस्था की लौ रही रोशन
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गाजियाबाद। सुबह से आसमान में छाए बादलों ने सुहागिनों की चिंता बढ़ा रखी थी। शाम को बारिश हुई तो चांद के दीदार की उम्मीद और धुंधली पड़ गई, लेकिन पति की लंबी उम्र की कामना के साथ रखा गया व्रत व आस्था का विश्वास डिगा नहीं। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद रात में महिलाएं छतों और बालकनी में आसमान की ओर टकटकी लगाए रहीं। बार-बार निगाहें उठतीं, बादलों के छंटने की उम्मीद बंधती, लेकिन चांद नजर नहीं आया। आखिरकार महिलाओं ने विधि-विधान से पूजन कर पति की लंबी उम्र व सुखी दांपत्य जीवन की कामना की और व्रत का पारण किया।
सोलह शृंगार कर सजी महिलाओं ने घरों में भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमा और करवा चौथ के चित्र के सामने पूजन किया। करवे में मिष्ठान आदि रखकर व्रत की कथा सुनी। मंदिरों और गुरुद्वारों में भी सामूहिक पूजन हुआ। महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ थाली बदलकर परंपरा निभाई। कविनगर बी-ब्लॉक के मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर समेत अन्य मंदिरों में महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। पुजारियों ने करवा चौथ की कथा सुनाई। गंगापुरम समेत विभिन्न सोसायटियों में महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजन किया।
घंटों आसमान निहारा, फिर भी नहीं टूटी आस
रात आठ बजे से ही कई घरों की छतों और बालकनी में चांद के दीदार का इंतजार शुरू हो गया था। महिलाएं आसमान में बादलों के छंटने की राह देखती रहीं। कोई छत से चांद निकलने की दिशा में निगाहें जमाए था तो कोई बालकनी से आसमान का हाल देख रहा था। बीच-बीच में उम्मीद बंधती कि शायद अब बादल हटेंगे और चांद दिखाई देगा, लेकिन बारिश के बाद बादलों का जमावड़ा बढ़ने से सारी उम्मीदें धुंधली पड़ गईं।
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बाजारों में रही रौनक, मेहंदी और मेकअप के लिए लगी भीड़
करवा चौथ पर बाजारों में पूजन सामग्री और अन्य सामान की खरीदारी के लिए भीड़ रही। तुराबनगर, मालीवाड़ा, कविनगर, राजनगर और शास्त्रीनगर के बाजारों में महिलाओं ने करवा, मीठे करवे, पूजन के चित्र, सींखें और फल खरीदे। वहीं, मेहंदी लगवाने और मेकअप कराने के लिए भी महिलाओं की भीड़ लगी रही। जो महिलाएं करवा चौथ की पूर्व संध्या पर मेहंदी नहीं लगवा पाई थीं, उन्होंने बृहस्पतिवार को हथेलियों पर मेहंदी रचाई। विभिन्न विभागों में काम करने वाली महिलाओं ने भी व्रत रखकर पर्व मनाया।
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सोलह शृंगार कर सजी महिलाओं ने घरों में भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमा और करवा चौथ के चित्र के सामने पूजन किया। करवे में मिष्ठान आदि रखकर व्रत की कथा सुनी। मंदिरों और गुरुद्वारों में भी सामूहिक पूजन हुआ। महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ थाली बदलकर परंपरा निभाई। कविनगर बी-ब्लॉक के मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर समेत अन्य मंदिरों में महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। पुजारियों ने करवा चौथ की कथा सुनाई। गंगापुरम समेत विभिन्न सोसायटियों में महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजन किया।
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घंटों आसमान निहारा, फिर भी नहीं टूटी आस
रात आठ बजे से ही कई घरों की छतों और बालकनी में चांद के दीदार का इंतजार शुरू हो गया था। महिलाएं आसमान में बादलों के छंटने की राह देखती रहीं। कोई छत से चांद निकलने की दिशा में निगाहें जमाए था तो कोई बालकनी से आसमान का हाल देख रहा था। बीच-बीच में उम्मीद बंधती कि शायद अब बादल हटेंगे और चांद दिखाई देगा, लेकिन बारिश के बाद बादलों का जमावड़ा बढ़ने से सारी उम्मीदें धुंधली पड़ गईं।
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बाजारों में रही रौनक, मेहंदी और मेकअप के लिए लगी भीड़
करवा चौथ पर बाजारों में पूजन सामग्री और अन्य सामान की खरीदारी के लिए भीड़ रही। तुराबनगर, मालीवाड़ा, कविनगर, राजनगर और शास्त्रीनगर के बाजारों में महिलाओं ने करवा, मीठे करवे, पूजन के चित्र, सींखें और फल खरीदे। वहीं, मेहंदी लगवाने और मेकअप कराने के लिए भी महिलाओं की भीड़ लगी रही। जो महिलाएं करवा चौथ की पूर्व संध्या पर मेहंदी नहीं लगवा पाई थीं, उन्होंने बृहस्पतिवार को हथेलियों पर मेहंदी रचाई। विभिन्न विभागों में काम करने वाली महिलाओं ने भी व्रत रखकर पर्व मनाया।