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Ghaziabad News: कड़ाके की सर्दी और प्रदूषण से बढ़े कान में संक्रमण के मरीज

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 02 Jan 2026 12:48 AM IST
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The number of ear infections has increased due to the harsh winter and pollution.
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गाजियाबाद। कड़ाके की ठंड और बढ़ते वायु प्रदूषण से जिले में कान के संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। ओपीडी में बच्चों और युवाओं की संख्या सबसे अधिक सामने आ रही है। सर्द मौसम में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने प्रदूषित हवा के कारण नाक और गले में संक्रमण बढ़ा है। इसका सीधा असर कान पर पड़ रहा है। सिर्फ एमएमजी अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 60 से 70 मरीज आ रहे हैं। निजी अस्पतालों, संजय नगर स्थित संयुक्त अस्पताल के आंकड़ों को जोड़ा जाए तो जिले में रोजाना 150 से 160 मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं।
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एमएमजी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक व वरिष्ठ नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि इन दिनों बाहरी कान के संक्रमण के साथ-साथ मध्य कान में सूजन के मरीज 30 फीसदी बढ़े हैं। सर्द और धूल भरी हवा के कारण कान की नली में सूखापन और जलन होती है। इससे बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं। बच्चों में सर्दी जुकाम बार-बार होने से नाक और कान को जोड़ने वाली नली प्रभावित होती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
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ईयरफोन का अधिक इस्तेमाल बना रहा मरीज
वरिष्ठ नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. बीपी त्यागी के अनुसार युवाओं में लंबे समय तक ईयरफोन का इस्तेमाल भी समस्या को गंभीर बना रहा है। ठंड के मौसम में कान को ढक कर न रखने और ठंडी हवा के सीधे संपर्क में आने से भी कान में दर्द और बहाव की शिकायत बढ़ जाती है। कई लोग दर्द होने पर खुद ही दवा डाल लेते हैं जो स्थिति को और बिगाड़ देती है। कान में संक्रमण के प्रमुख लक्षणों में दर्द, खुजली, कान से पानी या मवाद आना, सुनाई कम देना, कभी-कभी चक्कर आना शामिल है। यदि समय पर इलाज न कराया जाए तो कान का पर्दा प्रभावित हो सकता है। सुनने की क्षमता पर स्थायी असर पड़ने की आशंका रहती है।


इस कारण बढ़ी है परेशानी
सर्दी और प्रदूषण के अलावा गंदे पानी से नहाना, कान में नुकीली या गंदी वस्तु डालना, बार-बार सर्दी जुकाम होना, बिना सलाह के दवाइयों का इस्तेमाल प्रमुख कारण हैं। छोटे बच्चों में कान साफ करने के दौरान लापरवाही भी संक्रमण को बढ़ावा देती है।


इस तरह से करें बचाव

ठंड के मौसम में कानों को ढक कर रखें। सर्दी जुकाम होने पर समय पर इलाज कराएं। कान में तेल या कोई भी दवा बिना डॉक्टर की सलाह के न डालें। नहाते समय गंदा पानी कान में जाने से बचाएं। बच्चों के कान में कुछ भी डालने से रोकें। प्रदूषण से बचने के लिए बाहर निकलते समय सावधानी बरतें। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार लें। सीएमएस का कहना है कि कान में हल्की सी भी परेशानी होने पर नजदीकी ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें, ताकि समय रहते सही इलाज हो सके और सुनने की क्षमता सुरक्षित रह सके।
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