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Ghaziabad News: गर्भवतियों को जांच के लिए फिर चढ़नी पड़ रही चौथी मंजिल
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छह महीने पहले नीचे शिफ्ट हुई थी सैंपलिंग यूनिट
अब दोबारा लैब में भेजे जाने से बढ़ी परेशानी
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। महिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाली गर्भवतियों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। खून और पेशाब की जांच कराने के लिए अब उन्हें अस्पताल की चौथी मंजिल तक जाना पड़ रहा है। करीब छह महीने पहले मरीजों की सुविधा के लिए सैंपलिंग सेक्शन को नीचे ओपीडी के पास शुरू किया गया था, लेकिन अब इसे दोबारा लैब में शिफ्ट कर दिया गया। अस्पताल की लिफ्ट अक्सर खराब रहने से गर्भवती महिलाओं को रैंप से चौथी मंजिल तक पहुंचना पड़ रहा है।
महिला अस्पताल में रोजाना करीब 500 से 600 गर्भवती महिलाएं प्रसव पूर्व जांच और उपचार के लिए पहुंचती हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाओं को चिकित्सकीय सलाह के बाद खून और पेशाब की जांच करानी पड़ती है। ऐसे में सैंपलिंग सेक्शन के चौथी मंजिल पर चले जाने से उन्हें जांच के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
नीचे होने से आसानी से हो जाती थी जांच
अस्पताल में गर्भवतियों की सुविधा को देखते हुए अक्तूबर 2025 में सैंपलिंग सेक्शन को चौथी मंजिल से हटाकर ओपीडी के पास निचले तल पर शुरू किया गया था। इससे डॉक्टर को दिखाने के बाद महिलाओं को जांच के लिए ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ता था। अब सैंपलिंग सेक्शन दोबारा ऊपर होने से उन्हें रैंप के जरिए चौथी मंजिल तक पहुंचना पड़ रहा है।
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केस-1 :
डॉक्टर को दिखाने के बाद फिर ऊपर चढ़ना पड़ा
रोजी कालोनी निवासी 28 वर्षीय गर्भवती साबिया ने बताया कि वह प्रसव पूर्व जांच के लिए अस्पताल आई थी। डॉक्टर को दिखाने के बाद खून की जांच लिखी गई। पहले सैंपलिंग नीचे ही हो जाती थी, लेकिन अब चौथी मंजिल पर जाना पड़ा। लिफ्ट में भीड़ अधिक हो रही थी, इसलिए रैंप के सहारे ऊपर पहुंचना पड़ा। गर्भावस्था में इतनी चढ़ाई के बाद थकान और परेशानी हुई।
केस -2 :
जांच के बाद रिपोर्ट के लिए भी लग रही लाइन
साहिबाबाद निवासी 30 वर्षीय गर्भवती रेनू ने बताया कि जांच कराने के लिए चौथी मंजिल तक जाने के बाद सैंपल देने में भी समय लगा। जांच के बाद रिपोर्ट लेने के लिए दोबारा इंतजार करना पड़ा। उनका कहना था कि सैंपलिंग सेक्शन नीचे रहने पर डॉक्टर को दिखाने और जांच कराने की प्रक्रिया काफी आसान थी। अब एक ही काम के लिए अस्पताल में ज्यादा समय और ऊर्जा लग रही है।
लिफ्ट खराब होने से बढ़ जाती है मुश्किल
गर्भवतियों का कहना है कि अगर लिफ्ट नियमित रूप से चलती रहे तो चौथी मंजिल तक पहुंचना कुछ आसान हो सकता है, लेकिन लिफ्ट खराब होने पर रैंप ही सहारा रहता है। गर्भावस्था के दौरान रैंप से ऊपर जाना कई महिलाओं के लिए मुश्किल और थकाऊ साबित हो रहा है। मरीजों ने सैंपलिंग सेक्शन को दोबारा ओपीडी के पास शुरू करने की मांग की है।
अस्पताल प्रबंधन ने बताई यह वजह
अस्पताल के सीएमएस डॉ. प्रताप सिंह ने बताया कि निचले तल पर सैंपलिंग पंजीकरण काउंटर के ऊपर टीनशेड नहीं था। गर्मी और बारिश में मरीजों को परेशानी होती थी। इसके अलावा ओपीडी क्षेत्र में भीड़ बढ़ रही थी। मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सैंपलिंग का काम वापस लैब में कर दिया गया है।
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अब दोबारा लैब में भेजे जाने से बढ़ी परेशानी
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। महिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाली गर्भवतियों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। खून और पेशाब की जांच कराने के लिए अब उन्हें अस्पताल की चौथी मंजिल तक जाना पड़ रहा है। करीब छह महीने पहले मरीजों की सुविधा के लिए सैंपलिंग सेक्शन को नीचे ओपीडी के पास शुरू किया गया था, लेकिन अब इसे दोबारा लैब में शिफ्ट कर दिया गया। अस्पताल की लिफ्ट अक्सर खराब रहने से गर्भवती महिलाओं को रैंप से चौथी मंजिल तक पहुंचना पड़ रहा है।
महिला अस्पताल में रोजाना करीब 500 से 600 गर्भवती महिलाएं प्रसव पूर्व जांच और उपचार के लिए पहुंचती हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाओं को चिकित्सकीय सलाह के बाद खून और पेशाब की जांच करानी पड़ती है। ऐसे में सैंपलिंग सेक्शन के चौथी मंजिल पर चले जाने से उन्हें जांच के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
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नीचे होने से आसानी से हो जाती थी जांच
अस्पताल में गर्भवतियों की सुविधा को देखते हुए अक्तूबर 2025 में सैंपलिंग सेक्शन को चौथी मंजिल से हटाकर ओपीडी के पास निचले तल पर शुरू किया गया था। इससे डॉक्टर को दिखाने के बाद महिलाओं को जांच के लिए ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ता था। अब सैंपलिंग सेक्शन दोबारा ऊपर होने से उन्हें रैंप के जरिए चौथी मंजिल तक पहुंचना पड़ रहा है।
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केस-1 :
डॉक्टर को दिखाने के बाद फिर ऊपर चढ़ना पड़ा
रोजी कालोनी निवासी 28 वर्षीय गर्भवती साबिया ने बताया कि वह प्रसव पूर्व जांच के लिए अस्पताल आई थी। डॉक्टर को दिखाने के बाद खून की जांच लिखी गई। पहले सैंपलिंग नीचे ही हो जाती थी, लेकिन अब चौथी मंजिल पर जाना पड़ा। लिफ्ट में भीड़ अधिक हो रही थी, इसलिए रैंप के सहारे ऊपर पहुंचना पड़ा। गर्भावस्था में इतनी चढ़ाई के बाद थकान और परेशानी हुई।
केस -2 :
जांच के बाद रिपोर्ट के लिए भी लग रही लाइन
साहिबाबाद निवासी 30 वर्षीय गर्भवती रेनू ने बताया कि जांच कराने के लिए चौथी मंजिल तक जाने के बाद सैंपल देने में भी समय लगा। जांच के बाद रिपोर्ट लेने के लिए दोबारा इंतजार करना पड़ा। उनका कहना था कि सैंपलिंग सेक्शन नीचे रहने पर डॉक्टर को दिखाने और जांच कराने की प्रक्रिया काफी आसान थी। अब एक ही काम के लिए अस्पताल में ज्यादा समय और ऊर्जा लग रही है।
लिफ्ट खराब होने से बढ़ जाती है मुश्किल
गर्भवतियों का कहना है कि अगर लिफ्ट नियमित रूप से चलती रहे तो चौथी मंजिल तक पहुंचना कुछ आसान हो सकता है, लेकिन लिफ्ट खराब होने पर रैंप ही सहारा रहता है। गर्भावस्था के दौरान रैंप से ऊपर जाना कई महिलाओं के लिए मुश्किल और थकाऊ साबित हो रहा है। मरीजों ने सैंपलिंग सेक्शन को दोबारा ओपीडी के पास शुरू करने की मांग की है।
अस्पताल प्रबंधन ने बताई यह वजह
अस्पताल के सीएमएस डॉ. प्रताप सिंह ने बताया कि निचले तल पर सैंपलिंग पंजीकरण काउंटर के ऊपर टीनशेड नहीं था। गर्मी और बारिश में मरीजों को परेशानी होती थी। इसके अलावा ओपीडी क्षेत्र में भीड़ बढ़ रही थी। मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सैंपलिंग का काम वापस लैब में कर दिया गया है।