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अरुण जेटली स्टेडियम में भूजल बचाने के नियमों का हो रहा पालन : डीडीसीए
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डीडीसीए ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण में दाखिल की अपनी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में पानी के इस्तेमाल और भूजल प्रबंधन को लेकर दिल्ली जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में अपनी रिपोर्ट दाखिल की है। डीडीसीए ने कहा है कि स्टेडियम में पानी बचाने और भूजल के सही इस्तेमाल के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं और वह सभी नियमों का पालन कर रहा है। डीडीसीए ने बताया कि स्टेडियम में दो ट्यूबवेल ही चल रहे हैं। इन दोनों पर पानी की खपत पर नजर रखने के लिए डिजिटल फ्लो मीटर, टेलीमेट्री सिस्टम और भूजल स्तर की जांच करने वाले उपकरण लगाए गए हैं। वहीं, तीसरे ट्यूबवेल को नियमों के अनुसार बंद कर दिया गया है।
संस्था ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि स्टेडियम का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पूरी तरह काम कर रहा है। इससे साफ किए गए पानी का इस्तेमाल मैदान की सिंचाई में किया जा रहा है। रोजाना करीब 5 से 7 किलोलीटर उपचारित पानी मैदान के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। डीडीसीए के अनुसार, स्टेडियम परिसर में 17 रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी चालू हैं। संस्था ने फरवरी 2025 से मई 2026 तक पानी के इस्तेमाल का रिकॉर्ड भी एनजीटी को सौंपा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान स्टेडियम में कुल 51,456.57 घन मीटर भूजल का इस्तेमाल हुआ। इस अवधि में हर महीने औसतन करीब 3,216 घन मीटर पानी निकाला गया। इस मामले में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने जून 2026 में डीडीसीए से स्टेडियम में भूजल उपयोग, पानी के पुन: इस्तेमाल और जल संरक्षण से जुड़े उपायों की जानकारी मांगी थी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में पानी के इस्तेमाल और भूजल प्रबंधन को लेकर दिल्ली जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में अपनी रिपोर्ट दाखिल की है। डीडीसीए ने कहा है कि स्टेडियम में पानी बचाने और भूजल के सही इस्तेमाल के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं और वह सभी नियमों का पालन कर रहा है। डीडीसीए ने बताया कि स्टेडियम में दो ट्यूबवेल ही चल रहे हैं। इन दोनों पर पानी की खपत पर नजर रखने के लिए डिजिटल फ्लो मीटर, टेलीमेट्री सिस्टम और भूजल स्तर की जांच करने वाले उपकरण लगाए गए हैं। वहीं, तीसरे ट्यूबवेल को नियमों के अनुसार बंद कर दिया गया है।
संस्था ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि स्टेडियम का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पूरी तरह काम कर रहा है। इससे साफ किए गए पानी का इस्तेमाल मैदान की सिंचाई में किया जा रहा है। रोजाना करीब 5 से 7 किलोलीटर उपचारित पानी मैदान के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। डीडीसीए के अनुसार, स्टेडियम परिसर में 17 रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी चालू हैं। संस्था ने फरवरी 2025 से मई 2026 तक पानी के इस्तेमाल का रिकॉर्ड भी एनजीटी को सौंपा है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान स्टेडियम में कुल 51,456.57 घन मीटर भूजल का इस्तेमाल हुआ। इस अवधि में हर महीने औसतन करीब 3,216 घन मीटर पानी निकाला गया। इस मामले में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने जून 2026 में डीडीसीए से स्टेडियम में भूजल उपयोग, पानी के पुन: इस्तेमाल और जल संरक्षण से जुड़े उपायों की जानकारी मांगी थी।
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