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Delhi NCR News: डीजेबी ने एनजीटी से कहा, कचरा प्रबंधन हमारी जिम्मेदारी नहीं
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-ओखला लैंडफिल मामले में बोर्ड बोला-हमारा काम केवल पानी की आपूर्ति और सीवर व्यवस्था, कचरा उठाने का जिम्मा एमसीडी का
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ओखला लैंडफिल और यमुना के डूब क्षेत्र के पास कचरा डंप किए जाने के मामले में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ठोस कचरा प्रबंधन उसकी जिम्मेदारी नहीं है। डीजेबी ने एनजीटी में दाखिल शपथ पत्र में कहा कि कचरा उठाने, उसका परिवहन, छंटाई और निपटान का कार्य दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और अन्य संबंधित एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में आता है। बोर्ड का मुख्य दायित्व केवल दिल्लीवासियों को पेयजल उपलब्ध कराना और सीवर व्यवस्था का संचालन करना है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यमुना के किनारे कचरा डंप करने की घटना में उसकी कोई भूमिका नहीं है। इसलिए उसे इस मामले से अलग किया जाए और सुनवाई में उसका नाम पक्षकारों की सूची से हटाया जाए। दो अप्रैल 2026 को इस संबंध में एक मीडिया रिपोर्ट पर एनजीटी ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की थी। उसके बाद 10 अप्रैल 2026 को एनजीटी ने डीजेबी को भी पक्षकार बनाया था।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ओखला लैंडफिल और यमुना के डूब क्षेत्र के पास कचरा डंप किए जाने के मामले में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ठोस कचरा प्रबंधन उसकी जिम्मेदारी नहीं है। डीजेबी ने एनजीटी में दाखिल शपथ पत्र में कहा कि कचरा उठाने, उसका परिवहन, छंटाई और निपटान का कार्य दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और अन्य संबंधित एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में आता है। बोर्ड का मुख्य दायित्व केवल दिल्लीवासियों को पेयजल उपलब्ध कराना और सीवर व्यवस्था का संचालन करना है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यमुना के किनारे कचरा डंप करने की घटना में उसकी कोई भूमिका नहीं है। इसलिए उसे इस मामले से अलग किया जाए और सुनवाई में उसका नाम पक्षकारों की सूची से हटाया जाए। दो अप्रैल 2026 को इस संबंध में एक मीडिया रिपोर्ट पर एनजीटी ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की थी। उसके बाद 10 अप्रैल 2026 को एनजीटी ने डीजेबी को भी पक्षकार बनाया था।