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Gurugram News: 24 एंबुलेंस के भरोसे चल रहे 43 स्वास्थ्य केंद्र
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल एंबुलेंस से बता रही है। 43 स्वास्थ्य केंद्रों के लिए महज 24 एंबुलेंस चल रही हैं। वैसे तो 28 एंबुलेंस हैं लेकिन इनमें से कई जर्जर हैं। अक्सर रास्ते में खराब हो जाती हैं। इससे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी और बढ़ जाती है। लघु सचिवालय के पार्किंग स्थल में चार एंबुलेंस लंबे समय से कबाड़ के रूप में खड़ी हैं।
स्वास्थ्य विभाग में मूलभूत सुविधाओं की कमी लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। खासकर एंबुलेंस सेवाओं की बदहाल स्थिति के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में समय पर एंबुलेंस उपलब्ध न होने से कई बार मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है गंभीर हालत के कारण मरीजों को निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है। हैरानी की बात यह है कि इनमें कुछ एंबुलेंस नई होने के बावजूद कभी सही तरीके से उपयोग में नहीं लाई गईं और अब अनुपयोगी हो चुकी हैं। यह लापरवाही स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है। सचिवालय में जर्जर एंबुलेंस खड़े रहने से पार्किंग का अभाव भी बना हुआ है।
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पेट्रोल कार्ड न मिलने से खड़ी थीं एंबुलेंस
बीते महीने बादशाहपुर में पेट्रोल कार्ड न मिलने के कारण दो एंबुलेंस दो महीने से अधिक समय तक खड़ी रहीं जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं। इस दौरान मरीजों को एंबुलेंस के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई मरीजों को मजबूरी में निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ा, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ा।
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नई एंबुलेंस का इंतजार
बीते डेढ़ वर्ष में जिले को एक भी नई एंबुलेंस नहीं मिली है जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बना हुआ है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष छह से सात नई एंबुलेंस मिलने की पूरी उम्मीद है।
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वर्जन
इस वर्ष स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए छह से सात नई एंबुलेंस लाई जाएंगी। इसके लिए मुख्यालय स्तर पर बातचीत पूरी हो चुकी है। वहीं लघु सचिवालय में खड़ी पुरानी एंबुलेंस जर्जर हालत में होने के कारण उन्हें सेवा से बाहर कर दिया गया है। - डाॅ. लोकवीर, सीएमओ, स्वास्थ्य विभाग
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गुरुग्राम। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल एंबुलेंस से बता रही है। 43 स्वास्थ्य केंद्रों के लिए महज 24 एंबुलेंस चल रही हैं। वैसे तो 28 एंबुलेंस हैं लेकिन इनमें से कई जर्जर हैं। अक्सर रास्ते में खराब हो जाती हैं। इससे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी और बढ़ जाती है। लघु सचिवालय के पार्किंग स्थल में चार एंबुलेंस लंबे समय से कबाड़ के रूप में खड़ी हैं।
स्वास्थ्य विभाग में मूलभूत सुविधाओं की कमी लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। खासकर एंबुलेंस सेवाओं की बदहाल स्थिति के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में समय पर एंबुलेंस उपलब्ध न होने से कई बार मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है गंभीर हालत के कारण मरीजों को निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है। हैरानी की बात यह है कि इनमें कुछ एंबुलेंस नई होने के बावजूद कभी सही तरीके से उपयोग में नहीं लाई गईं और अब अनुपयोगी हो चुकी हैं। यह लापरवाही स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है। सचिवालय में जर्जर एंबुलेंस खड़े रहने से पार्किंग का अभाव भी बना हुआ है।
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पेट्रोल कार्ड न मिलने से खड़ी थीं एंबुलेंस
बीते महीने बादशाहपुर में पेट्रोल कार्ड न मिलने के कारण दो एंबुलेंस दो महीने से अधिक समय तक खड़ी रहीं जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं। इस दौरान मरीजों को एंबुलेंस के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई मरीजों को मजबूरी में निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ा, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ा।
नई एंबुलेंस का इंतजार
बीते डेढ़ वर्ष में जिले को एक भी नई एंबुलेंस नहीं मिली है जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बना हुआ है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष छह से सात नई एंबुलेंस मिलने की पूरी उम्मीद है।
वर्जन
इस वर्ष स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए छह से सात नई एंबुलेंस लाई जाएंगी। इसके लिए मुख्यालय स्तर पर बातचीत पूरी हो चुकी है। वहीं लघु सचिवालय में खड़ी पुरानी एंबुलेंस जर्जर हालत में होने के कारण उन्हें सेवा से बाहर कर दिया गया है। - डाॅ. लोकवीर, सीएमओ, स्वास्थ्य विभाग