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Gurugram News: गुरुग्राम में जीवंत बंगाल...पांच दशक बाद भी संस्कृति बरकरार
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40 एसोसिएशनों का प्रयास, भाषा, संस्कृति, संगीत-नृत्य और कला को बनाए रखा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बंगाली समुदाय पिछले पांच दशकों से सरस्वती पूजा और अन्य उत्सवों के जरिये बंगाल की समृद्ध परंपराओं को जीवंत रखे हुए है। यहां की करीब 40 एसोसिएशनों से जुड़े स्थानीय कलाकार रवींद्र संगीत, लोक संगीत और शास्त्रीय नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां देते हैं। खास बात यह है कि ये गैर-व्यावसायिक कलाकार अपनी दो पीढ़ियों से माटी की महक और मौलिक पूजा पद्धति को संजोए हुए हैं। पंडालों की कलाकारी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से गुरुग्राम में हर साल बंगाल की सांस्कृतिक एकता का जीवंत दर्शन होता है।
वीकेंड और छुटि्टयों में बांग्ला कक्षाएं
पूर्वापल्ली दुर्गाबाड़ी एसोसिएशन ने कोरोना काल में बंगाली भाषा और लिपि सिखाने के लिए ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की थीं। संगठन के महासचिव राजर्षि सेनगुप्ता बताते हैं कि इन निशुल्क कक्षाओं का उद्देश्य बंगाल से बाहर रहकर जो लोग बांग्ला लिपि और भाषा नहीं जानते, उन्हें भाषा ज्ञान कराना है। ये कक्षाओं से काफी संख्या में युवाओं और बच्चों ने बंगाली सीखी है।
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वीकेंड पर सिखाते हैं बंगाली बोलना व लिखना
मैं अंग्रेजी की शिक्षिका हूं मगर रविंद्र संगीत का शौक रहा है। गुरुग्राम में बंगाली समुदाय का समूह बनाया है। हम लोग दुर्गा पूजा और अन्य अवसरों पर रविंद्र संगीत प्रस्तुत करते हैं। - महुआ घोष, रविंद्र संगीत गायिका, डीएलएफ दुर्गापूजा
हमारी कोशिश है कि गुरुग्राम में रहने वाले जो लोग बंगाली भाषा लिखना और बोलना नहीं जानते हैं, उन्हें यह भाषा सिखाई जाए। बंगाल के परिवार के लोगों के लिए निशुल्क ऑनलाइन कक्षाएं हर वीकेंड पर चलती हैं। - सायंतनी सेनगुप्ता, अध्यापिका बांग्ला
केवल बांग्ला भाषा ही नहीं जिन्हें बंगाली बोलना पढ़ना सिखाते हैं, उनसे दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा और अन्य कार्यक्रमों बंगाली संगीत, नृत्य और नाटक के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी करवाते हैं। - शंपा सान्याल, अध्यापिका बांग्ला
हमारा एक गैर प्रोफेशनल नृत्य संगीत का बड़ा समूह है। दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा जैसे आयोजनों में शास्त्रीय, सुगम, लोक संगीत, नृत्य और बांग्ला और बॉलीवुड के गायकों के गीत गाने वाले कई लोग हैं। - रूमी दास, सांस्कृतिक सचिव, पूर्वा पल्ली दुर्गा बाड़ी
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बंगाली समुदाय पिछले पांच दशकों से सरस्वती पूजा और अन्य उत्सवों के जरिये बंगाल की समृद्ध परंपराओं को जीवंत रखे हुए है। यहां की करीब 40 एसोसिएशनों से जुड़े स्थानीय कलाकार रवींद्र संगीत, लोक संगीत और शास्त्रीय नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां देते हैं। खास बात यह है कि ये गैर-व्यावसायिक कलाकार अपनी दो पीढ़ियों से माटी की महक और मौलिक पूजा पद्धति को संजोए हुए हैं। पंडालों की कलाकारी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से गुरुग्राम में हर साल बंगाल की सांस्कृतिक एकता का जीवंत दर्शन होता है।
वीकेंड और छुटि्टयों में बांग्ला कक्षाएं
पूर्वापल्ली दुर्गाबाड़ी एसोसिएशन ने कोरोना काल में बंगाली भाषा और लिपि सिखाने के लिए ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की थीं। संगठन के महासचिव राजर्षि सेनगुप्ता बताते हैं कि इन निशुल्क कक्षाओं का उद्देश्य बंगाल से बाहर रहकर जो लोग बांग्ला लिपि और भाषा नहीं जानते, उन्हें भाषा ज्ञान कराना है। ये कक्षाओं से काफी संख्या में युवाओं और बच्चों ने बंगाली सीखी है।
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वीकेंड पर सिखाते हैं बंगाली बोलना व लिखना
मैं अंग्रेजी की शिक्षिका हूं मगर रविंद्र संगीत का शौक रहा है। गुरुग्राम में बंगाली समुदाय का समूह बनाया है। हम लोग दुर्गा पूजा और अन्य अवसरों पर रविंद्र संगीत प्रस्तुत करते हैं। - महुआ घोष, रविंद्र संगीत गायिका, डीएलएफ दुर्गापूजा
हमारी कोशिश है कि गुरुग्राम में रहने वाले जो लोग बंगाली भाषा लिखना और बोलना नहीं जानते हैं, उन्हें यह भाषा सिखाई जाए। बंगाल के परिवार के लोगों के लिए निशुल्क ऑनलाइन कक्षाएं हर वीकेंड पर चलती हैं। - सायंतनी सेनगुप्ता, अध्यापिका बांग्ला
केवल बांग्ला भाषा ही नहीं जिन्हें बंगाली बोलना पढ़ना सिखाते हैं, उनसे दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा और अन्य कार्यक्रमों बंगाली संगीत, नृत्य और नाटक के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी करवाते हैं। - शंपा सान्याल, अध्यापिका बांग्ला
हमारा एक गैर प्रोफेशनल नृत्य संगीत का बड़ा समूह है। दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा जैसे आयोजनों में शास्त्रीय, सुगम, लोक संगीत, नृत्य और बांग्ला और बॉलीवुड के गायकों के गीत गाने वाले कई लोग हैं। - रूमी दास, सांस्कृतिक सचिव, पूर्वा पल्ली दुर्गा बाड़ी