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न मां से मेल, न पिता से: IVF से जन्मी बच्चियों की DNA रिपोर्ट से मचा हड़कंप, दंपती को नहीं पता ये किसके बच्चे?

पीटीआई, गुरुग्राम Published by: विकास कुमार Updated Mon, 15 Jun 2026 08:43 PM IST
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सार

दंपती का आरोप है कि इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन प्रक्रिया से जन्मे उनके जुड़वां बच्चों का डीएनए उनसे मेल नहीं खाता। इस घटना ने अस्पताल में भ्रूण प्रबंधन प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

DNA test reveals twins through IVF share genetic mismatch Delhi couple files complaint
दंपती ने आईवीएफ की प्रक्रिया पर उठाए सवाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

दिल्ली के एक दंपती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन प्रक्रिया से जन्मे उनके जुड़वां बच्चों का डीएनए उनसे मेल नहीं खाता। इस घटना ने अस्पताल में भ्रूण प्रबंधन प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दंपती ने अपने जैविक बच्चों को वापस पाने की मांग की है।

पुलिस नहीं कर रही कोई कार्रवाई
बिल्डर राहुल राठौर (41) और उनकी पत्नी मीनू (39) ने फर्टिलिटी केंद्र पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राठौर ने बताया कि दिल्ली अदालत के आदेश पर 31 मार्च 2026 को ग्रेटर कैलाश पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। दंपती पर हर तरफ से दबाव बनाया जा रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह मामला दिसंबर 2024 में शुरू हुआ था। दंपती ने डॉक्टर रितु गर्ग से सलाह ली थी। उन्होंने दंपती को डॉक्टर मनप्रीत कौर से मिलवाया। इसके बाद उन्हें नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1 स्थित एससीआई अस्पताल भेजा गया। वहां उन्हें इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन विशेषज्ञ डॉक्टर शिवानी सचदेवा से मिलवाया गया।

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इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन प्रक्रिया और संदेह
9 जनवरी 2025 को एससीआई अस्पताल में मेडिकल टेस्ट हुए थे। डॉक्टरों और कर्मचारियों ने दंपती को नैतिक प्रक्रिया का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था कि केवल उनके जैविक सामग्री का उपयोग होगा। 13 फरवरी 2025 को पत्नी के अंडे और पति के शुक्राणु एकत्र किए गए। राठौर ने दावा किया कि अस्पताल को उनकी जैविक सामग्री की विशेष संपत्ति सौंपी गई थी। 14 फरवरी 2025 को लेप्रोस्कोपी प्रक्रिया की गई थी।

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भ्रूण प्रतिस्थापन का आरोप
मार्च 2025 में अस्पताल ने पांच भ्रूण बनने की सूचना दी। इनमें से तीन भ्रूण 14 मई 2025 को पत्नी के गर्भ में स्थानांतरित किए गए। दंपती ने आरोप लगाया कि उनके आनुवंशिक सामग्री से बने भ्रूण अवैध रूप से हटा दिए गए। उनकी जगह ऐसे भ्रूण प्रत्यारोपित किए गए जिनका उनसे कोई संबंध नहीं था। 24 मई 2025 को गर्भावस्था की पुष्टि हुई। 5 जनवरी 2026 को उनकी पत्नी ने दो जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया।

डीएनए रिपोर्ट और अस्पताल का रवैया
दंपती को विश्वास दिलाया गया था कि दोनों बच्चे उनके जैविक संतान हैं। गंभीर चिकित्सा विसंगतियों के कारण उन्हें संदेह हुआ। 7 जनवरी 2026 को उन्होंने दो स्वतंत्र डीएनए परीक्षण कराए। रिपोर्टों से पता चला कि कोई भी बच्चा माता या पिता से आनुवंशिक रूप से संबंधित नहीं था। राठौर ने दावा किया कि उनके भ्रूण को अवैध रूप से बदला गया था। अस्पताल ने उन्हें मुआवजा देने की पेशकश की और मामले को आगे न बढ़ाने की धमकी दी।

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