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Gurugram News: वादों की नुमाइश में बिक रहे सपने
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चार सोसाइटी के बिल्डरों ने किया था 24 मीटर रोड का वादा, हकीकत में मिली जर्जर सड़क
संवाद न्यूज एजेंसी
न्यू गुरुग्राम। सेक्टर-103 स्थित सत्या द हर्मिटेज, सिग्नेचर ग्रैंड आईव, लैंडमार्क द रेजिडेंसी जैसी हाइराईज सोसाइटियों में रहने वाले लोग बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीने के लिए मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि यहां सार्वजनिक परिवहन, 24 मीटर सेक्टर रोड, पीएनजी, जगह-जगह कूड़ा-कचरा, सीवर लाइन और सुरक्षा जैसी समस्याओं से परेशान हैं। लोगों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर सपनों का घर खरीदा था। वहीं, बिल्डर ने भी सभी जरूरी सुविधाएं देने का वादा किया था लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ नहीं मिला। उनका कहना है कि यहां घर नहीं वादों की नुमाइश में लोगों के सपने बेचे जा रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि बिल्डरों ने लाखों रुपये के फ्लैट बेचते समय 24 मीटर रोड वादा किया था लेकिन 24 मीटर रोड न होने के कारण गांव की सड़क पर निर्भर रहना पड़ रहा है। यह सड़क भी कई जगहों से जर्जर हालत में है। सड़क पर बने छोटे-बड़े गढ्डों के कारण आवाजाही में परेशानी हो रही है। वहीं, कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण निजी वाहन और महंगे कैब पर निर्भर रहना पड़ता है। लोगों ने बताया कि सेक्टर-103 से मेट्रो स्टेशन, सदर बाजार, ओल्ड गुरुग्राम आने-जाने के लिए अगर कैब करते हैं तो 500 रुपये से अधिक किराया लग जाता है। वहीं, लोगों ने यह भी बताया कि बारिश के समय यह समस्याओं भी गंभीर हो जाती है। इससे लोगों में हादसे का खतरा भी बढ़ रहा है।
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लोगों ने की जल्द समाधान की मांग
जगह-जगह टूटी सड़क के कारण दोपहिया और राहगीरों को आवाजाही करने में परेशानी हो रही है। प्रशासन से अनुरोध है कि जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान किया जाए। -अमिताभ सिंह, सत्या द हर्मिटेज सोसाइटी
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सरकार को बाह्य विकास शुल्क (ईडीसी) देने के बाद भी कई समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सेक्टर-103 में कोई सिटी बस सेवा न होने के कारण महंगे ऑटो पर निर्भर रहता पड़ता है। -ब्रिज किशोर, सत्या द हर्मिटेज सोसाइटी
गांव के जगह पर कूड़ा-कचरा फैला रहता है। उससे कूड़ों से उठने वाली बदबू के कारण रहना मुश्किल हो जाता है। वहीं, इस बार संपत्ति टैक्स के साथ कचरा टैक्स भी लिया जा रहा है। -डॉ. आलोक अस्थाना, लैंडमार्क द रेजिडेंसी
24 मीटर की रोड नहीं होने के कारण रेवेन्यू रोड का उपयोग करना पड़ रहा है। कहीं भी निजी वाहन से आना पड़ता है, इससे महिलाओं आवाजाही में करनी ज्यादा परेशानी होती है। -दीपक, लैंडमार्क द रेजिडेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी
न्यू गुरुग्राम। सेक्टर-103 स्थित सत्या द हर्मिटेज, सिग्नेचर ग्रैंड आईव, लैंडमार्क द रेजिडेंसी जैसी हाइराईज सोसाइटियों में रहने वाले लोग बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीने के लिए मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि यहां सार्वजनिक परिवहन, 24 मीटर सेक्टर रोड, पीएनजी, जगह-जगह कूड़ा-कचरा, सीवर लाइन और सुरक्षा जैसी समस्याओं से परेशान हैं। लोगों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर सपनों का घर खरीदा था। वहीं, बिल्डर ने भी सभी जरूरी सुविधाएं देने का वादा किया था लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ नहीं मिला। उनका कहना है कि यहां घर नहीं वादों की नुमाइश में लोगों के सपने बेचे जा रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि बिल्डरों ने लाखों रुपये के फ्लैट बेचते समय 24 मीटर रोड वादा किया था लेकिन 24 मीटर रोड न होने के कारण गांव की सड़क पर निर्भर रहना पड़ रहा है। यह सड़क भी कई जगहों से जर्जर हालत में है। सड़क पर बने छोटे-बड़े गढ्डों के कारण आवाजाही में परेशानी हो रही है। वहीं, कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण निजी वाहन और महंगे कैब पर निर्भर रहना पड़ता है। लोगों ने बताया कि सेक्टर-103 से मेट्रो स्टेशन, सदर बाजार, ओल्ड गुरुग्राम आने-जाने के लिए अगर कैब करते हैं तो 500 रुपये से अधिक किराया लग जाता है। वहीं, लोगों ने यह भी बताया कि बारिश के समय यह समस्याओं भी गंभीर हो जाती है। इससे लोगों में हादसे का खतरा भी बढ़ रहा है।
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लोगों ने की जल्द समाधान की मांग
जगह-जगह टूटी सड़क के कारण दोपहिया और राहगीरों को आवाजाही करने में परेशानी हो रही है। प्रशासन से अनुरोध है कि जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान किया जाए। -अमिताभ सिंह, सत्या द हर्मिटेज सोसाइटी
सरकार को बाह्य विकास शुल्क (ईडीसी) देने के बाद भी कई समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सेक्टर-103 में कोई सिटी बस सेवा न होने के कारण महंगे ऑटो पर निर्भर रहता पड़ता है। -ब्रिज किशोर, सत्या द हर्मिटेज सोसाइटी
गांव के जगह पर कूड़ा-कचरा फैला रहता है। उससे कूड़ों से उठने वाली बदबू के कारण रहना मुश्किल हो जाता है। वहीं, इस बार संपत्ति टैक्स के साथ कचरा टैक्स भी लिया जा रहा है। -डॉ. आलोक अस्थाना, लैंडमार्क द रेजिडेंसी
24 मीटर की रोड नहीं होने के कारण रेवेन्यू रोड का उपयोग करना पड़ रहा है। कहीं भी निजी वाहन से आना पड़ता है, इससे महिलाओं आवाजाही में करनी ज्यादा परेशानी होती है। -दीपक, लैंडमार्क द रेजिडेंसी