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Gurugram News: सरस मेले में पढ़ी लिखी चूड़ियां बन रहीं आकर्षण का केंद्र
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मेले में देशभर की ग्रामीण संस्कृति और महिला उद्यमिता की जीवंत तस्वीर देखने को मिल रहीं
सौम्या गुुप्ता
गुरुग्राम। रंग-बिरंगी स्टॉलों, लोक संगीत की धुन और पारंपरिक हस्तशिल्प की खुशबू से सजा सेक्टर-29 स्थित लेजर वैली ग्राउंड इन दिनों सरस आजीविका मेला 2026 के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां देशभर की ग्रामीण संस्कृति और महिला उद्यमिता की जीवंत तस्वीर देखने को मिल रही हैं। इस बार मेले में पढ़ी-लिखी चूड़ियां खास चर्चा में हैं। यूपी के हापुड़ से आईं खुशी बताती हैं कि इन चूड़ियों को यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि ये कपड़ों में उलझती नहीं, काम करते समय खनकती नहीं और टिकाऊ भी हैं, जिससे महिलाएं इन्हें आराम से रोजमर्रा के काम में पहन सकती हैं।
ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित यह मेला 26 फरवरी तक चलेगा और प्रवेश निशुल्क रखा गया है। 32 राज्यों के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं 900 से अधिक लखपति दीदीयां 450 से ज्यादा स्टॉलों पर अपने उत्पाद प्रदर्शित कर रही हैं।
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आनंद और स्वाद का अनोखा संगम है मेला
मैं मेले में अपने साथियों के साथ सामान लेने आई हूं। यहां से घर सजाने के लिए सुंदर और उपयोगी सामान खरीदा है। मेले में विविध उत्पाद देखकर बहुत अच्छा लगा और खरीदारी का अनुभव यादगार रहा। -
मीनाक्षी
इस बार मेले के फूड कोर्ट में विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट पकवानों के स्टॉल लगाए गए हैं। देश के अलग-अलग राज्यों के व्यंजन एक ही स्थान पर मिल रहे हैं। यह अपने आप में आनंद और स्वाद का अनोखा संगम है। - मोनिका
मैं मेले में इस बार अकेला घूमने आया हूं, लेकिन अगली बार अपने दोस्तों के साथ जरूर आऊंगा। यहां काफी कुछ नया देखने और सीखने को मिला। ग्रामीण उत्पाद, कला और संस्कृति ने अनुभव को बेहद खास बना दिया।-- योगेश कुमार
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सौम्या गुुप्ता
गुरुग्राम। रंग-बिरंगी स्टॉलों, लोक संगीत की धुन और पारंपरिक हस्तशिल्प की खुशबू से सजा सेक्टर-29 स्थित लेजर वैली ग्राउंड इन दिनों सरस आजीविका मेला 2026 के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां देशभर की ग्रामीण संस्कृति और महिला उद्यमिता की जीवंत तस्वीर देखने को मिल रही हैं। इस बार मेले में पढ़ी-लिखी चूड़ियां खास चर्चा में हैं। यूपी के हापुड़ से आईं खुशी बताती हैं कि इन चूड़ियों को यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि ये कपड़ों में उलझती नहीं, काम करते समय खनकती नहीं और टिकाऊ भी हैं, जिससे महिलाएं इन्हें आराम से रोजमर्रा के काम में पहन सकती हैं।
ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित यह मेला 26 फरवरी तक चलेगा और प्रवेश निशुल्क रखा गया है। 32 राज्यों के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं 900 से अधिक लखपति दीदीयां 450 से ज्यादा स्टॉलों पर अपने उत्पाद प्रदर्शित कर रही हैं।
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आनंद और स्वाद का अनोखा संगम है मेला
मैं मेले में अपने साथियों के साथ सामान लेने आई हूं। यहां से घर सजाने के लिए सुंदर और उपयोगी सामान खरीदा है। मेले में विविध उत्पाद देखकर बहुत अच्छा लगा और खरीदारी का अनुभव यादगार रहा। -
मीनाक्षी
इस बार मेले के फूड कोर्ट में विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट पकवानों के स्टॉल लगाए गए हैं। देश के अलग-अलग राज्यों के व्यंजन एक ही स्थान पर मिल रहे हैं। यह अपने आप में आनंद और स्वाद का अनोखा संगम है। - मोनिका
मैं मेले में इस बार अकेला घूमने आया हूं, लेकिन अगली बार अपने दोस्तों के साथ जरूर आऊंगा। यहां काफी कुछ नया देखने और सीखने को मिला। ग्रामीण उत्पाद, कला और संस्कृति ने अनुभव को बेहद खास बना दिया।