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Gurugram News: बोरवेल की इजाजत और नवीकरण में उद्यमियों को आ रही दिक्कत
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सेट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी की तर्ज पर तीन साल तक की हो अवधि
गुड़गांव इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। गर्मी में जल संकट से जूझ रहे शहर के उद्यमियों को पानी के संकट की अलग परेशानी झेलनी पड़ रही है। औद्योगिक इलाकों में बोरवेल की इजाजत मिलने और रिन्युअल में उद्यमियों को काफी दिक्कत आ रही है। इस समस्या से पूरे हरियाणा के उद्यमी परेशानी है। उनका कहना कि जबतक बोरवेल के एक साल के रिन्युअल की कार्रवाई पूरी होती है, दूसरे साल का रिन्युअल पेंडिंग हो जाता है।
गुड़गांव इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने पिछले दिनों इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखा कि हरियाणा वाटर रिसोर्स अथॉरिटी कि बोरवेल की इजाजत और रिन्यूअल में काफी समय लग रहा है। जीआईए से जुड़े छह उद्योगों की हवाला देते हुए लिखा गया है कि अप्रैल 2025 से लेकर अक्तूबर 2025 में उनके बोरवेल के रिन्युअल का आवेदन पेंडिंग है। मानेसर में ऑटोमोबाइल की गियर बनाने वाली फैक्ट्री के उद्यमी संजय पारीक बताते हैं कि रिन्युअल के लिए बार-बार चंडीगढ़ के चक्कर लगाने होते हैं। एक रिन्युअल के आवेदन की प्रक्रिया में आधा साल और उसके अप्रूवल में आधा साल लग रहा है। फिर अगले साल का मामला पेंडिंग हो जाता है।
औद्योगिक संगठन गुड़गांव चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष संजीव आहूजा ने हरियाणा सरकार से मांग की है कि जिस तरह सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी उद्योगों को तीन साल की अवधि के लिए बोरवेल की इजाजत देती है, उसी तरह हरियाणा ग्राउंड वाटर अथॉरिटी भी एक साल के बजाए तीन साल के बाद बोरवेल के रिन्यूअल की इजाजत दे। भले ही तीनों साल की फीस एक साथ ले लें। किसी उद्योग के बोरवेल के साथ कोई शिकायत या सवाल आते हैं, तो बार-बार इसकी जांच के बजाए एक बार में सभी सवालों के जवाब अथॉरिटी प्राप्त करे। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर शिविर लगाकर बोरवेल की इजाजत और नवीकरण के लंबित मामलों को निपटाया जाए जिससे उद्यमियों को बार-बार चंडीगढ़ के चक्कर नहीं लगाने पड़े।
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हमलोगों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। पटौदी स्थित मेरी फैक्ट्री में भी बोरवेल की रिन्युअल के लिए एनओसी नहीं मिल रही है। उत्तर प्रदेश की तरह बोरवेल की इजाजत का हर साल नवीकरण कराने की जगह 3 से 5 साल तक की अवधि के इजाजत की मांग की है। - सुमित राव, अध्यक्ष, गुड़गांव इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
हरियाणा सरकार को ग्राउंड वाटर अथॉरिटी पर ध्यान देना होगा। कई आवेदन लंबित रह जाते है। एक साल के रिन्युअल की कागजी कार्रवाई पूरी होते-होते दूसरे साल का मामला लंबित हो जाता है। पूरे हरियाणा के उद्योगों को बोरवेल की इजाजत और रिन्यूअल में काफी दिक्कत आ रही है। उद्यमी अपने उद्योग संभालें या बार-बार चंडीगढ़ के चक्कर लगाएं। - संजीव कुमार आहुजा, महासचिव गुड़गांव चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
गुड़गांव इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। गर्मी में जल संकट से जूझ रहे शहर के उद्यमियों को पानी के संकट की अलग परेशानी झेलनी पड़ रही है। औद्योगिक इलाकों में बोरवेल की इजाजत मिलने और रिन्युअल में उद्यमियों को काफी दिक्कत आ रही है। इस समस्या से पूरे हरियाणा के उद्यमी परेशानी है। उनका कहना कि जबतक बोरवेल के एक साल के रिन्युअल की कार्रवाई पूरी होती है, दूसरे साल का रिन्युअल पेंडिंग हो जाता है।
गुड़गांव इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने पिछले दिनों इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखा कि हरियाणा वाटर रिसोर्स अथॉरिटी कि बोरवेल की इजाजत और रिन्यूअल में काफी समय लग रहा है। जीआईए से जुड़े छह उद्योगों की हवाला देते हुए लिखा गया है कि अप्रैल 2025 से लेकर अक्तूबर 2025 में उनके बोरवेल के रिन्युअल का आवेदन पेंडिंग है। मानेसर में ऑटोमोबाइल की गियर बनाने वाली फैक्ट्री के उद्यमी संजय पारीक बताते हैं कि रिन्युअल के लिए बार-बार चंडीगढ़ के चक्कर लगाने होते हैं। एक रिन्युअल के आवेदन की प्रक्रिया में आधा साल और उसके अप्रूवल में आधा साल लग रहा है। फिर अगले साल का मामला पेंडिंग हो जाता है।
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औद्योगिक संगठन गुड़गांव चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष संजीव आहूजा ने हरियाणा सरकार से मांग की है कि जिस तरह सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी उद्योगों को तीन साल की अवधि के लिए बोरवेल की इजाजत देती है, उसी तरह हरियाणा ग्राउंड वाटर अथॉरिटी भी एक साल के बजाए तीन साल के बाद बोरवेल के रिन्यूअल की इजाजत दे। भले ही तीनों साल की फीस एक साथ ले लें। किसी उद्योग के बोरवेल के साथ कोई शिकायत या सवाल आते हैं, तो बार-बार इसकी जांच के बजाए एक बार में सभी सवालों के जवाब अथॉरिटी प्राप्त करे। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर शिविर लगाकर बोरवेल की इजाजत और नवीकरण के लंबित मामलों को निपटाया जाए जिससे उद्यमियों को बार-बार चंडीगढ़ के चक्कर नहीं लगाने पड़े।
हमलोगों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। पटौदी स्थित मेरी फैक्ट्री में भी बोरवेल की रिन्युअल के लिए एनओसी नहीं मिल रही है। उत्तर प्रदेश की तरह बोरवेल की इजाजत का हर साल नवीकरण कराने की जगह 3 से 5 साल तक की अवधि के इजाजत की मांग की है। - सुमित राव, अध्यक्ष, गुड़गांव इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
हरियाणा सरकार को ग्राउंड वाटर अथॉरिटी पर ध्यान देना होगा। कई आवेदन लंबित रह जाते है। एक साल के रिन्युअल की कागजी कार्रवाई पूरी होते-होते दूसरे साल का मामला लंबित हो जाता है। पूरे हरियाणा के उद्योगों को बोरवेल की इजाजत और रिन्यूअल में काफी दिक्कत आ रही है। उद्यमी अपने उद्योग संभालें या बार-बार चंडीगढ़ के चक्कर लगाएं। - संजीव कुमार आहुजा, महासचिव गुड़गांव चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री