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Gurugram News: गैस संकट और चुनाव ने बढ़ाई शहर में घरेलू सहायिकाओं की किल्लत
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घर लौट रहे हैं बंगाल के श्रमिक और घरेलू सहायिकाएं, कर्मियों की किल्लत से जूझेगा शहर
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बंगाल विधानसभा चुनाव और घरेलू गैस की बढ़ती किल्लत ने गुरुग्राम के उद्योगों और सोसाइटियों की चिंता बढ़ा दी है। शहर के निर्माण क्षेत्र और घरेलू सेवाओं में कार्यरत पश्चिम बंगाल के हजारों श्रमिक वोट डालने और पहचान पत्र सुरक्षित रखने के लिए गांव लौटने की तैयारी में हैं। रसोई गैस के बढ़ते दामों ने उनके लिए शहर में जीवन-यापन कठिन कर दिया है, जिससे उनके लंबे समय तक लौटने की उम्मीद कम है। इससे उद्योगों और घरेलू कामकाज में भारी किल्लत होने की आशंका है।
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गैस संकट के बीच जल्द लौटने की उम्मीद कम
जो श्रमिक 80 रुपये प्रति किलो सिलिंडर रिफिल करा रहे थे, वे अब 400 रुपये प्रतिकिलो बमुश्किल गैस रिफिल करा रहे हैं। बंगाल चुनाव के दौरान घर जाने वाले श्रमिक गैस संकट के कारण लंबे समय तक नहीं लौटने वाले। उद्योग के साथ घरों के कामकाज भी प्रभावित होंगे। -स्नेहलता भदौरिया, उद्यमी, सेक्टर-37
मानेसर के औद्योगिक क्षेत्र में काम बहुत ज्यादा प्रभावित हो रहा है। गैस संकट के कारण श्रमिक नहीं रुक रहे हैं। श्रमिकों के लिए छोटा सिलिंडर उपलब्ध कराया जाए। तब बंगाल चुनाव के लिए जाने वाले श्रमिक चुनाव के बाद लौटने की उम्मीद रहेगी। -हरिओम त्रिपाठी, उद्यमी, आईएमटी मानेसर
गैस की किल्लत, बंगाल चुनाव, गेहूं की कटाई शहर में श्रमिकों के पलायन की तिहरी मार उद्योग, निर्माण क्षेत्र और लोग झेल रहे हैंं। श्रम कल्याण बोर्ड को श्रमिकों का पलायन रोकने पर काम करना चाहिए। -मनोज त्यागी, महासचिव आईएमटी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
उद्योगों पर चौतरफा मार है। गैस की सप्लाई अनियमित होने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। पेट्रोल पंप इंडस्ट्री को डीजल की सप्लाई भी नहीं दे रहे हैं, श्रमिकों गांव जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्थिति के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। -उमेश चंद्र द्विवेदी, महासचिव, दौलताबाद उद्योग संघ
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बंगाल विधानसभा चुनाव और घरेलू गैस की बढ़ती किल्लत ने गुरुग्राम के उद्योगों और सोसाइटियों की चिंता बढ़ा दी है। शहर के निर्माण क्षेत्र और घरेलू सेवाओं में कार्यरत पश्चिम बंगाल के हजारों श्रमिक वोट डालने और पहचान पत्र सुरक्षित रखने के लिए गांव लौटने की तैयारी में हैं। रसोई गैस के बढ़ते दामों ने उनके लिए शहर में जीवन-यापन कठिन कर दिया है, जिससे उनके लंबे समय तक लौटने की उम्मीद कम है। इससे उद्योगों और घरेलू कामकाज में भारी किल्लत होने की आशंका है।
गैस संकट के बीच जल्द लौटने की उम्मीद कम
जो श्रमिक 80 रुपये प्रति किलो सिलिंडर रिफिल करा रहे थे, वे अब 400 रुपये प्रतिकिलो बमुश्किल गैस रिफिल करा रहे हैं। बंगाल चुनाव के दौरान घर जाने वाले श्रमिक गैस संकट के कारण लंबे समय तक नहीं लौटने वाले। उद्योग के साथ घरों के कामकाज भी प्रभावित होंगे। -स्नेहलता भदौरिया, उद्यमी, सेक्टर-37
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मानेसर के औद्योगिक क्षेत्र में काम बहुत ज्यादा प्रभावित हो रहा है। गैस संकट के कारण श्रमिक नहीं रुक रहे हैं। श्रमिकों के लिए छोटा सिलिंडर उपलब्ध कराया जाए। तब बंगाल चुनाव के लिए जाने वाले श्रमिक चुनाव के बाद लौटने की उम्मीद रहेगी। -हरिओम त्रिपाठी, उद्यमी, आईएमटी मानेसर
गैस की किल्लत, बंगाल चुनाव, गेहूं की कटाई शहर में श्रमिकों के पलायन की तिहरी मार उद्योग, निर्माण क्षेत्र और लोग झेल रहे हैंं। श्रम कल्याण बोर्ड को श्रमिकों का पलायन रोकने पर काम करना चाहिए। -मनोज त्यागी, महासचिव आईएमटी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
उद्योगों पर चौतरफा मार है। गैस की सप्लाई अनियमित होने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। पेट्रोल पंप इंडस्ट्री को डीजल की सप्लाई भी नहीं दे रहे हैं, श्रमिकों गांव जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्थिति के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। -उमेश चंद्र द्विवेदी, महासचिव, दौलताबाद उद्योग संघ