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Gurugram News: हरेला पर्व...प्रकृति के रंग में रंगा पूरा समाज
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जिले में रहने वाले उत्तराखंड के परिवारों ने धूमधाम से मनाया हरेला का त्योहार
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। शहर में रहने वाले उत्तराखंड के परिवारों ने हर्षोल्लास से हरियाली और प्रकृति संरक्षण का लोक पर्व हरेला मनाया। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों के लोगों ने हरेला पर पूजा अर्चना की और पारंपरिक पकवान बनाए। त्योहार के अवसर पर लोग प्रकृति के रंग में रंगे नजर आए।
लोगों ने दस दिन पहले टोकरी या मिट्टी के पात्र में अनाज बोए थे। पूजा के बाद नए पौधे काटे, उसे माथे से लगाया और सुख-समृद्धि की कामना की। पालम विहार स्थित नंदा देवी मंदिर के पुजारी नारायणदत्त बालोदी कहते हैं कि हरेला का संदेश है- जी रये, जागि रये, धरती जस आगव, आकाश जस चाकव है जये। सूर्ज जस तराण, स्यावे जसि बुद्धि हो, दूब जस फलिये। सिल पिसि भात खाये, जांठि टेकि झाड़ जाये।
इसका अर्थ है कि तुम हमेशा स्वस्थ रहो, अपने आत्मिक विकास और पर्यावरणीय शुद्धि के लिए सदा जागरूक रहो, धरती के समान उदार, आकाश के समान विशाल, सूर्य के समान तेजस्वी, शियार के समान सौहार्दपूर्ण बुद्धिवान, दूब के समान सदाबहार, तुम्हें इतना आराम मिले कि चावल भी चबाने न पड़ें तुम पीसे हुए चावल खाओ और बुढ़ापा तुम्हें कभी न आए।
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भगवान को भोग लगाकर हरेला की खुशियां साझा कीं
हरेला के दिन बड़े-छोटे सभी लोग एक-दूसरे के सिर पर यह हरी कोंपल रखकर आशीर्वाद देते हैं और कहते हैं -जितनी लंबी तुम्हारी हरेला हो, उतनी लंबी तुम्हारी आयु हो। यह त्योहार प्रकृति से हमारे जुड़ाव और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है। हमने इसे परंपरा के अनुसार मनाया। -हेमलता मिश्रा, महासचिव, उत्तराखंड सांस्कृतिक एकता मंच
हरेला पर कहा जाता है कि लाग हरेला, लाग बग्वाल, जी रया, जागि रया। धरती जस आगव, आकाश जस चाकव होइ जा, दूब जस फलिए...। इसका अर्थ है कि व्यक्ति की दीर्घायु हो, धरती और आकाश की भांति विशाल बने, दूब की तरह निरंतर फलता-फूलता रहे और जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य प्राप्त करे। -किरण कांडपाल, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, न्यू पालम विहार
मैंने सात जुलाई को जौ, गेंहू, मक्का, तिल आदि अनाज बोए थे। बृहस्पतिवार को पंडितजी ने उसे काटा और पूजा कराई सबके माथे से लगाकर आशीर्वाद दिया। घर में पूड़ी, खीर, उड़द के बड़े, आलू के गुटके, झंगोरे की खीर बनाई गई। गोलू देवता और नंदा देवी को भोग लगाने के बाद सबसे साथ हरेला की खुशियां साझा कीं। -लता गौड़, लक्ष्मण विहार
घर में सुख, समृद्धि और शांति के लिए हरेला बोया और काटा जाता है। हरेला अच्छी खेती का सूचक होता है। हरेला इस कामना के साथ बोया जाता है कि इस साल फसलों को नुकसान न हो। हमलोगों ने धूमधाम से हरेला मनाया, नंदा देवी मंदिर में पूजा अर्चना की। -देवेंद्र सिंह नेगी, कुमाऊं भ्रातृ मंडल
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। शहर में रहने वाले उत्तराखंड के परिवारों ने हर्षोल्लास से हरियाली और प्रकृति संरक्षण का लोक पर्व हरेला मनाया। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों के लोगों ने हरेला पर पूजा अर्चना की और पारंपरिक पकवान बनाए। त्योहार के अवसर पर लोग प्रकृति के रंग में रंगे नजर आए।
लोगों ने दस दिन पहले टोकरी या मिट्टी के पात्र में अनाज बोए थे। पूजा के बाद नए पौधे काटे, उसे माथे से लगाया और सुख-समृद्धि की कामना की। पालम विहार स्थित नंदा देवी मंदिर के पुजारी नारायणदत्त बालोदी कहते हैं कि हरेला का संदेश है- जी रये, जागि रये, धरती जस आगव, आकाश जस चाकव है जये। सूर्ज जस तराण, स्यावे जसि बुद्धि हो, दूब जस फलिये। सिल पिसि भात खाये, जांठि टेकि झाड़ जाये।
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इसका अर्थ है कि तुम हमेशा स्वस्थ रहो, अपने आत्मिक विकास और पर्यावरणीय शुद्धि के लिए सदा जागरूक रहो, धरती के समान उदार, आकाश के समान विशाल, सूर्य के समान तेजस्वी, शियार के समान सौहार्दपूर्ण बुद्धिवान, दूब के समान सदाबहार, तुम्हें इतना आराम मिले कि चावल भी चबाने न पड़ें तुम पीसे हुए चावल खाओ और बुढ़ापा तुम्हें कभी न आए।
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भगवान को भोग लगाकर हरेला की खुशियां साझा कीं
हरेला के दिन बड़े-छोटे सभी लोग एक-दूसरे के सिर पर यह हरी कोंपल रखकर आशीर्वाद देते हैं और कहते हैं -जितनी लंबी तुम्हारी हरेला हो, उतनी लंबी तुम्हारी आयु हो। यह त्योहार प्रकृति से हमारे जुड़ाव और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है। हमने इसे परंपरा के अनुसार मनाया। -हेमलता मिश्रा, महासचिव, उत्तराखंड सांस्कृतिक एकता मंच
हरेला पर कहा जाता है कि लाग हरेला, लाग बग्वाल, जी रया, जागि रया। धरती जस आगव, आकाश जस चाकव होइ जा, दूब जस फलिए...। इसका अर्थ है कि व्यक्ति की दीर्घायु हो, धरती और आकाश की भांति विशाल बने, दूब की तरह निरंतर फलता-फूलता रहे और जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य प्राप्त करे। -किरण कांडपाल, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, न्यू पालम विहार
मैंने सात जुलाई को जौ, गेंहू, मक्का, तिल आदि अनाज बोए थे। बृहस्पतिवार को पंडितजी ने उसे काटा और पूजा कराई सबके माथे से लगाकर आशीर्वाद दिया। घर में पूड़ी, खीर, उड़द के बड़े, आलू के गुटके, झंगोरे की खीर बनाई गई। गोलू देवता और नंदा देवी को भोग लगाने के बाद सबसे साथ हरेला की खुशियां साझा कीं। -लता गौड़, लक्ष्मण विहार
घर में सुख, समृद्धि और शांति के लिए हरेला बोया और काटा जाता है। हरेला अच्छी खेती का सूचक होता है। हरेला इस कामना के साथ बोया जाता है कि इस साल फसलों को नुकसान न हो। हमलोगों ने धूमधाम से हरेला मनाया, नंदा देवी मंदिर में पूजा अर्चना की। -देवेंद्र सिंह नेगी, कुमाऊं भ्रातृ मंडल