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Gurugram News: कूड़े का निस्तारण कर खुद स्वावलंबी बन रहीं सोसाइटियां
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खाद का उपयोग सोसाइटी के पार्कों, ग्रीन बेल्ट, पौधों और बगीचे में किया जा रहा
रेनू कुमारी
न्यू गुरुग्राम। न्यू गुरुग्राम की कई सोसाइटियों में रोजाना निकलने वाले गीले कचरे और सूखे पत्तों से जैविक खाद तैयार किया जाता है। यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे डंपिंग की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है।
कुछ सोसाइटियों में घरों से निकलने वाले कचरे को पहले अलग किया जाता है। वहीं, कई सोसाइटियों घर में काम करने वाली घरेलू सहायिका की मदद से कूड़े को अलग-अलग डालती हैं। इसके बाद कंपोस्टिंग प्रक्रिया से जैसे-कचरे कूटना, सूखना और कोको पीट और केमिकल मिलकर खाद को तैयार किया जाता है। इस खाद को तैयार करने में करीब सात से दस दिन का समय लगता है। इस प्रक्रिया से तैयार होने वाली खाद का उपयोग सोसाइटी के पार्कों, ग्रीन बेल्ट, पौधों और बगीचे में किया जा रहा है। इससे हरियाली को बढ़ावा मिल रहा है और मिट्टी की उर्वरता में भी सुधार हो रहा है।
रासायनिक खाद के उपयोग में कमी आने से पर्यावरण को भी लाभ पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इससे डंपिंग की समस्या में कमी आ रही है। साथ ही नगर निगम पर भी कचरा निस्तारण का बोझ कम करने की हुआ है। इससे पर्यावरण को और मिट्टी को भी फायदा होता है।
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नहीं खरीदना पड़ता है रसायनिक खाद
सोसाइटी में रोजाना करीब 150 किलो का खाद तैयार किया जाता है। इसमें सुबह घरों से कचरे को इकट्ठा किया जाता है। फिर मशीनों में डालकर कचरे को बारीक-बारीक काटना और सुखाने काम किया जाता है। इस खाद को सोसाइटी के लोग भी अपने घरों के पौधों में डालने के लिए ले जा सकते हैं। - नवल किशोर रुस्तगी, अध्यक्ष, आरडब्ल्यूए, हेरिटेज मैक्स, सेक्टर-102
करीब छह साल से इस काम को किया जा रहा है। इस खाद को सोसाइटी के पेड़-पौधों में डाला जाता है जिससे रासायनिक खाद खरीदना नहीं पड़ता। साथ ही पर्यावरण के संरक्षण के लिए एक छोटा-सा योगदान है। - कैलाश कुमार, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, सत्या द हर्मिटेज, सेक्टर-103
सोसाइटी में रोजाना 50 से 60 किलो तक गीले कचरे को खाद बनने के लिए इकट्ठा किया जाता है। उसके बाद खाद बनाने की प्रक्रिया की जाती है। कई बार सोसाइटी में घरेलू सहायिका को गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है। - आलोक पांडेय, आरडब्ल्यूए, अध्यक्ष, रहेजा वेदांता , सेक्टर-108
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रेनू कुमारी
न्यू गुरुग्राम। न्यू गुरुग्राम की कई सोसाइटियों में रोजाना निकलने वाले गीले कचरे और सूखे पत्तों से जैविक खाद तैयार किया जाता है। यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे डंपिंग की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है।
कुछ सोसाइटियों में घरों से निकलने वाले कचरे को पहले अलग किया जाता है। वहीं, कई सोसाइटियों घर में काम करने वाली घरेलू सहायिका की मदद से कूड़े को अलग-अलग डालती हैं। इसके बाद कंपोस्टिंग प्रक्रिया से जैसे-कचरे कूटना, सूखना और कोको पीट और केमिकल मिलकर खाद को तैयार किया जाता है। इस खाद को तैयार करने में करीब सात से दस दिन का समय लगता है। इस प्रक्रिया से तैयार होने वाली खाद का उपयोग सोसाइटी के पार्कों, ग्रीन बेल्ट, पौधों और बगीचे में किया जा रहा है। इससे हरियाली को बढ़ावा मिल रहा है और मिट्टी की उर्वरता में भी सुधार हो रहा है।
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रासायनिक खाद के उपयोग में कमी आने से पर्यावरण को भी लाभ पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इससे डंपिंग की समस्या में कमी आ रही है। साथ ही नगर निगम पर भी कचरा निस्तारण का बोझ कम करने की हुआ है। इससे पर्यावरण को और मिट्टी को भी फायदा होता है।
नहीं खरीदना पड़ता है रसायनिक खाद
सोसाइटी में रोजाना करीब 150 किलो का खाद तैयार किया जाता है। इसमें सुबह घरों से कचरे को इकट्ठा किया जाता है। फिर मशीनों में डालकर कचरे को बारीक-बारीक काटना और सुखाने काम किया जाता है। इस खाद को सोसाइटी के लोग भी अपने घरों के पौधों में डालने के लिए ले जा सकते हैं। - नवल किशोर रुस्तगी, अध्यक्ष, आरडब्ल्यूए, हेरिटेज मैक्स, सेक्टर-102
करीब छह साल से इस काम को किया जा रहा है। इस खाद को सोसाइटी के पेड़-पौधों में डाला जाता है जिससे रासायनिक खाद खरीदना नहीं पड़ता। साथ ही पर्यावरण के संरक्षण के लिए एक छोटा-सा योगदान है। - कैलाश कुमार, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, सत्या द हर्मिटेज, सेक्टर-103
सोसाइटी में रोजाना 50 से 60 किलो तक गीले कचरे को खाद बनने के लिए इकट्ठा किया जाता है। उसके बाद खाद बनाने की प्रक्रिया की जाती है। कई बार सोसाइटी में घरेलू सहायिका को गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है। - आलोक पांडेय, आरडब्ल्यूए, अध्यक्ष, रहेजा वेदांता , सेक्टर-108
