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Gurugram News: मिलेनियम सिटी से गूंजती है शहादत की सलामी

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 25 Jan 2026 07:17 PM IST
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The salute of martyrdom echoes from the Millennium City
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कपूर सिंह दलाल, डॉ. टी.सी. राव और सेना की सेवा का संगम
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पूनम
गुरुग्राम। जगदंबा प्रसाद मिश्र 'हितैषी' की ये अमर पंक्तियां शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा...केवल कविता नहीं, बल्कि उन जांबाजों के प्रति कृतज्ञता का भाव हैं जिन्होंने देश की मिट्टी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आज के समय में कपूर सिंह दलाल और डॉ. टी.सी. राव जैसे व्यक्तित्व इस मशाल को थामे हुए हैं, जो समाज को उनकी शहादत की कीमत याद दिला रहे हैं।


कपूर सिंह दलाल ने शहीदों के हक की लड़ाई पर किया कार्य
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में उनका सहयोग करने वाले चौधरी हजारी लाल के पुत्र कपूर सिंह दलाल ने वर्ष 1993 में स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी समिति का गठन किया। इस संगठन के माध्यम में देश की स्वतंत्रता में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वालों को सम्मान और न्याय दिलाने के कार्य में अग्रणी भूमिका निभाई है। वर्ष 2003 में कपूर सिंह दलाल ने संगठन में देश के शहीदों के परिवारों के लिए कार्य करना शुरू किया। स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों से प्रदेश को परिचित कराने, सेना में शहीदों के विधवाओं के पेंशन से लेकर उनके राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराने जैसे कार्य इनके नेतृत्व में हुए।
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सेना को सेवा देने के बाद प्रदेश की सेवा कर रहे डॉ. टीसी राव
गुरुग्राम और रेवाड़ी के जिन गांवों से देश को अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर शहीद सपूत हुए हैं। उन गांवों के स्कूलों के नाम उन शहीदों के नाम पर हैं। इस कार्य में अपना अथक योगदान दे रहे हैं डॉ. टीसी राव। 25 सालों तक देश की सेना में अपनी सेवाएं दी। पिछले 25 सालों से समाज को सेवाएं दे रहे हैं। मेजर डॉ. टीसी राव शहीद वेलफेयर फाउंडेशन के माध्यम से शहीदों के परिवारों के लिए न्याय दिलाने, शहीदों का सम्मान, उनके परिजनों के लिए पेंशन और सरकारी सुविधाओं के लिए समर्पित रहे हैं।

सामाजिक सरोकारों के लिए समर्पित अलका
करगिल युद्ध में शहीद हुए आजाद सिंह दलाल की पत्नी वीरांगना अलका दलाल महिलाओं और नागरिकों के अधिकारों की लड़ाई में अग्रणी रही हैं। अलका के पति असिस्टेंट कमांडेंट आजाद सिंह दलाल 13 जून 1999 में करगिल युद्ध के समय घुसपैठियों से संघर्ष करते हुए शहीद हो गए थे। तब अलका दलाल सात महीने के पुत्र की मां रहीं। इसके बाद उन्होंने लॉ की पढ़ाई की। लंबे समय से वे नागरिकों के हक की लड़ाई, महिलाओं को कानूनी सलाह देने के कार्य में जुटी हैं।
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