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Gurugram News: मानेसर से केएमपी तक शोधित पानी की पाइपलाइन तैयार
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केएमपी तक शोधित पानी ले जाने के लिए डाली जा रही पाइप। फाइल
जीएमडीए केएमपी ग्रीन बेल्ट तक पहुंचाएगा शोधित पानी, जल्द होगा ट्रायल
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने मानेसर से केएमपी (कुंडली-मानेसर-पलवल) एक्सप्रेसवे की ग्रीन बेल्ट तक सीवर शोधित पानी पहुंचाने की तैयारी पूरी कर ली है। करीब पांच किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। जल्द ही इसका ट्रायल किया जाएगा।
इसके बाद केएमपी की ग्रीन बेल्ट को 15 से 20 एमएलडी शोधित पानी उपलब्ध कराया जाएगा। यह पानी एक्सप्रेसवे के सेंट्रल वर्ज और ग्रीन बेल्ट में पौधों की सिंचाई के लिए होगा। वर्तमान में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था न होने से गर्मियों में पौधे सूख जाते हैं। मानेसर में 55 एमएलडी क्षमता का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) है। इस पाइपलाइन बिछाने पर करीब चार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। जीएमडीए के अनुसार, शोधित पानी का इस्तेमाल आसपास की हरियाली में भी हो सकेगा। इससे दूसरे जलस्रोतों में पानी छोड़ने की जरूरत कम होगी। केएमपी की ग्रीन बेल्ट में पानी का प्रयोग एचएसआईआईडीसी करेगा, जिसे अपनी अलग पाइपलाइन बिछानी होगी।
जीएमडीए के बहरामपुर और धनवापुर सीवर शोधन संयंत्रों से भी शोधित पानी का विभिन्न कार्यों में इस्तेमाल हो रहा है। बहरामपुर एसटीपी से 20 एमएलडी पानी सेक्टरों की ग्रीन बेल्ट में उपयोग होता है। 10 एमएलडी कपड़ा उद्योग को और दो एमएलडी अरावली क्षेत्र में हरियाली के लिए दिया जाता है। दो एमएलडी निर्माण कार्यों में तथा तीन एमएलडी भोंडसी पुलिस लाइन में पौधों की सिंचाई के लिए इस्तेमाल होता है। धनवापुर एसटीपी से 80 एमएलडी शोधित पानी झज्जर में सिंचाई के लिए भेजा जा रहा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने मानेसर से केएमपी (कुंडली-मानेसर-पलवल) एक्सप्रेसवे की ग्रीन बेल्ट तक सीवर शोधित पानी पहुंचाने की तैयारी पूरी कर ली है। करीब पांच किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। जल्द ही इसका ट्रायल किया जाएगा।
इसके बाद केएमपी की ग्रीन बेल्ट को 15 से 20 एमएलडी शोधित पानी उपलब्ध कराया जाएगा। यह पानी एक्सप्रेसवे के सेंट्रल वर्ज और ग्रीन बेल्ट में पौधों की सिंचाई के लिए होगा। वर्तमान में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था न होने से गर्मियों में पौधे सूख जाते हैं। मानेसर में 55 एमएलडी क्षमता का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) है। इस पाइपलाइन बिछाने पर करीब चार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। जीएमडीए के अनुसार, शोधित पानी का इस्तेमाल आसपास की हरियाली में भी हो सकेगा। इससे दूसरे जलस्रोतों में पानी छोड़ने की जरूरत कम होगी। केएमपी की ग्रीन बेल्ट में पानी का प्रयोग एचएसआईआईडीसी करेगा, जिसे अपनी अलग पाइपलाइन बिछानी होगी।
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जीएमडीए के बहरामपुर और धनवापुर सीवर शोधन संयंत्रों से भी शोधित पानी का विभिन्न कार्यों में इस्तेमाल हो रहा है। बहरामपुर एसटीपी से 20 एमएलडी पानी सेक्टरों की ग्रीन बेल्ट में उपयोग होता है। 10 एमएलडी कपड़ा उद्योग को और दो एमएलडी अरावली क्षेत्र में हरियाली के लिए दिया जाता है। दो एमएलडी निर्माण कार्यों में तथा तीन एमएलडी भोंडसी पुलिस लाइन में पौधों की सिंचाई के लिए इस्तेमाल होता है। धनवापुर एसटीपी से 80 एमएलडी शोधित पानी झज्जर में सिंचाई के लिए भेजा जा रहा है।
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