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Delhi NCR News: चार मरीजों के बीच स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट को हाईकोर्ट ने दी मंजूरी
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने चार गुर्दा रोगियों के बीच ‘फोर-वे स्वैप’ किडनी ट्रांसप्लांट को मंजूरी दे दी है। इससे चार मरीज अपने नजदीकी रिश्तेदारों से प्राप्त गुर्दे की जगह एक-दूसरे के रिश्तेदारों से स्वस्थ गुर्दा प्राप्त कर सकेंगे। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कौरव की एकल पीठ ने निजी अस्पताल की प्राधिकरण समिति और स्वास्थ्य मंत्रालय के अपीलीय प्राधिकरण के इनकार के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि फैसला मानव अंग प्रत्यारोपण और ऊतक अधिनियम, 1994 के उद्देश्य के विरुद्ध है।
कोर्ट ने कहा, कानून की संकीर्ण व्याख्या उसके उद्देश्य को विफल कर देगी। अधिनियम का मकसद जीवन रक्षक प्रत्यारोपण की सुविधा प्रदान करना है, न कि इसे सीमित करना। कोर्ट ने अस्पताल की प्राधिकरण समिति को निर्देश दिया कि चिकित्सकीय और नैतिक प्रोटोकॉल का पालन करते हुए प्रस्तावित चार-तरफा स्वैप ट्रांसप्लांट को शीघ्र मंजूरी दी जाए। आठ व्यक्तियों (चार मरीज और उनके इच्छुक नजदीकी रिश्तेदार दाताओं) ने याचिका दायर की थी। सभी दाताओं और प्राप्तकर्ताओं में क्रॉस-मैच पॉजिटिव था, जिसके कारण सीधा दान संभव नहीं था। प्रस्तावित स्वैप में प्रत्येक दाता किसी अन्य संगत प्राप्तकर्ता को गुर्दा देगा, जिससे चारों मरीजों को नया जीवन मिल सकेगा। प्राप्तकर्ता देश के विभिन्न हिस्सों दिल्ली, बिहार, नागालैंड और जम्मू-कश्मीर से हैं और सभी अंतिम चरण के क्रॉनिक किडनी रोग से पीड़ित हैं।
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने चार गुर्दा रोगियों के बीच ‘फोर-वे स्वैप’ किडनी ट्रांसप्लांट को मंजूरी दे दी है। इससे चार मरीज अपने नजदीकी रिश्तेदारों से प्राप्त गुर्दे की जगह एक-दूसरे के रिश्तेदारों से स्वस्थ गुर्दा प्राप्त कर सकेंगे। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कौरव की एकल पीठ ने निजी अस्पताल की प्राधिकरण समिति और स्वास्थ्य मंत्रालय के अपीलीय प्राधिकरण के इनकार के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि फैसला मानव अंग प्रत्यारोपण और ऊतक अधिनियम, 1994 के उद्देश्य के विरुद्ध है।
कोर्ट ने कहा, कानून की संकीर्ण व्याख्या उसके उद्देश्य को विफल कर देगी। अधिनियम का मकसद जीवन रक्षक प्रत्यारोपण की सुविधा प्रदान करना है, न कि इसे सीमित करना। कोर्ट ने अस्पताल की प्राधिकरण समिति को निर्देश दिया कि चिकित्सकीय और नैतिक प्रोटोकॉल का पालन करते हुए प्रस्तावित चार-तरफा स्वैप ट्रांसप्लांट को शीघ्र मंजूरी दी जाए। आठ व्यक्तियों (चार मरीज और उनके इच्छुक नजदीकी रिश्तेदार दाताओं) ने याचिका दायर की थी। सभी दाताओं और प्राप्तकर्ताओं में क्रॉस-मैच पॉजिटिव था, जिसके कारण सीधा दान संभव नहीं था। प्रस्तावित स्वैप में प्रत्येक दाता किसी अन्य संगत प्राप्तकर्ता को गुर्दा देगा, जिससे चारों मरीजों को नया जीवन मिल सकेगा। प्राप्तकर्ता देश के विभिन्न हिस्सों दिल्ली, बिहार, नागालैंड और जम्मू-कश्मीर से हैं और सभी अंतिम चरण के क्रॉनिक किडनी रोग से पीड़ित हैं।
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