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दिल्ली दंगा मामला: उमर खालिद और शरजील इमाम को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, तीसरी बार भी नहीं मिली जमानत; ये है वजह

Wed, 30 Sep 2026 12:13 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 30 Sep 2026 12:13 PM IST
सार

दिल्ली दंगों के यूएपीए मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम फिर झटका लगा है। हाईकोर्ट ने दोनों को जमानत देने से मना कर दिया।

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High Court denies bail to Umar Khalid and Sharjeel Imam in Delhi riots case
दिल्ली दंगा केस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली दंगों के षड्यंत्र मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और दिनेश भट्ट की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में संशोधन नहीं किया जा सकता।

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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में खालिद और इमाम की जमानत याचिका खारिज की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वे एक साल बाद या संरक्षित गवाहों की जांच के बाद ही जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। 

हाईकोर्ट ने इस आधार पर नहीं दी जमानत
जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने पांच अन्य लोगों को जमानत दी थी, लेकिन खालिद और इमाम को राहत नहीं मिली थी। हाईकोर्ट ने पाया कि ये दोनों शर्तें अभी तक पूरी नहीं हुई हैं। इसलिए जमानत देना सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बदलने जैसा होगा। 

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हाईकोर्ट ने तीसरी बार खारिज की याचिका
कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश में कोई गलती नहीं पाई और उनकी अपीलों को खारिज कर दिया। यह तीसरी बार है जब हाईकोर्ट ने खालिद और इमाम की जमानत अर्जी खारिज की है। उन्होंने पहले ट्रायल कोर्ट का रुख किया था, जिसने 4 जुलाई को उनकी याचिकाएं खारिज की थीं।

जमानत याचिकाओं पर दलीलें
खालिद और इमाम की जमानत याचिकाओं में सैयद इफ्तिखार अंद्राबी मामले के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया। उन्होंने तर्क दिया कि यह परिस्थितियों में बदलाव के समान है। पुलिस ने विरोध किया कि एक अलग मामले में समन्वय पीठ का फैसला खालिद और इमाम के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को रद्द नहीं कर सकता। उमर खालिद के वकील प्रदीप पाइस ने ट्रायल में देरी के आधार पर जमानत मांगी।
 
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अभियोजन पक्ष का तर्क
पाइस ने बताया कि इस मामले में कुल 18 आरोपी हैं और उनमें से अधिकांश को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। शरजील इमाम के वकील तालिब मुस्तफा ने तर्क दिया कि जनवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया था कि ट्रायल में प्रगति के बिना हिरासत जमानत का आधार होगी। उन्होंने कहा कि ट्रायल आगे नहीं बढ़ा है, इसलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि खालिद और इमाम की भूमिका जमानत पर रिहा अन्य लोगों के बराबर नहीं है। राजू ने दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, वे जनवरी 2027 के बाद या संरक्षित गवाहों की जांच के बाद ही जमानत मांग सकते हैं।
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