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Delhi NCR News: गार्डासिल वैक्सीन पर रोक लगाने से हाईकोर्ट का इन्कार
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55 लाख से अधिक खुराकों में केवल 120 मामूली दुष्प्रभाव के मामले, विशेषज्ञों के जवाब तक सुनवाई जारी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने किशोरियों को दी जा रही ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीन गार्डासिल के प्रशासन पर अंतरिम रोक लगाने से इन्कार कर दिया। अदालत ने बुधवार को केंद्र सरकार के इस आश्वासन पर भरोसा जताया कि देश में अब तक 55 लाख से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं और केवल 120 मामलों में मतली, सिरदर्द जैसे मामूली दुष्प्रभाव सामने आए हैं।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों से वैक्सीन से किसी तत्काल नुकसान के संकेत नहीं मिलते। अदालत ने स्पष्ट किया कि वैक्सीन शुरू करने के औचित्य पर बाद में विचार किया जाएगा, लेकिन फिलहाल इसके प्रशासन पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है।
यह आदेश स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता मित्तल और फिटनेस इन्फ्लुएंसर जितेंद्र चौकसे की जनहित याचिका पर दिया गया। याचिका में वैक्सीन की प्रभावकारिता, सुरक्षा और आवश्यकता पर सवाल उठाए गए हैं। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने बताया कि दुनिया भर में गार्डासिल की 55 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं। करीब 160 देशों में इसका इस्तेमाल हो रहा है और ऑस्ट्रेलिया में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर पर इसका प्रभाव बेहद सकारात्मक रहा है।
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दीर्घकालिक दुष्प्रभावों पर पर्याप्त अध्ययन न होने की दी थी दलील
याचिकाकर्ताओं ने वैक्सीन के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों पर पर्याप्त अध्ययन न होने की दलील दी। इस पर अदालत ने कहा कि हर वैक्सीन के कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं और इसे देने या नहीं देने का निर्णय विशेषज्ञों पर छोड़ना चाहिए। अदालत ने केंद्र, आईसीएमआर, सीडीएससीओ और निटैग को याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने किशोरियों को दी जा रही ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीन गार्डासिल के प्रशासन पर अंतरिम रोक लगाने से इन्कार कर दिया। अदालत ने बुधवार को केंद्र सरकार के इस आश्वासन पर भरोसा जताया कि देश में अब तक 55 लाख से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं और केवल 120 मामलों में मतली, सिरदर्द जैसे मामूली दुष्प्रभाव सामने आए हैं।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों से वैक्सीन से किसी तत्काल नुकसान के संकेत नहीं मिलते। अदालत ने स्पष्ट किया कि वैक्सीन शुरू करने के औचित्य पर बाद में विचार किया जाएगा, लेकिन फिलहाल इसके प्रशासन पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है।
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यह आदेश स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता मित्तल और फिटनेस इन्फ्लुएंसर जितेंद्र चौकसे की जनहित याचिका पर दिया गया। याचिका में वैक्सीन की प्रभावकारिता, सुरक्षा और आवश्यकता पर सवाल उठाए गए हैं। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने बताया कि दुनिया भर में गार्डासिल की 55 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं। करीब 160 देशों में इसका इस्तेमाल हो रहा है और ऑस्ट्रेलिया में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर पर इसका प्रभाव बेहद सकारात्मक रहा है।
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दीर्घकालिक दुष्प्रभावों पर पर्याप्त अध्ययन न होने की दी थी दलील
याचिकाकर्ताओं ने वैक्सीन के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों पर पर्याप्त अध्ययन न होने की दलील दी। इस पर अदालत ने कहा कि हर वैक्सीन के कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं और इसे देने या नहीं देने का निर्णय विशेषज्ञों पर छोड़ना चाहिए। अदालत ने केंद्र, आईसीएमआर, सीडीएससीओ और निटैग को याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।