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Delhi NCR News: एमाइलॉयडोसिस पर जागरूकता बढ़ाने की पहल, समय पर पहचान और इलाज पर जोर
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कार्यक्रम में हृदय, गुर्दे, तंत्रिका तंत्र और पाचन तंत्र पर बीमारी के प्रभाव पर विशेषज्ञों ने की चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एमाइलॉयडोसिस जैसी दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से एम्स, नई दिल्ली और एमाइलॉयडोसिस सपोर्ट ग्रुप ऑफ इंडिया (एएसजीआई) की तरफ से बुधवार को एक जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने एमाइलॉयडोसिस- क्या चुपचाप आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा विषय पर लोगों को जागरूक किया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बीमारी के शुरुआती लक्षणों, समय पर जांच और आधुनिक उपचार के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
हृदय, गुर्दे, तंत्रिका तंत्र और पाचन तंत्र पर बीमारी के प्रभाव और उपलब्ध उपचार विकल्पों के बारे में भी लोगों को बताया। इस दौरान मरीजों और उनके परिजनों को विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछने और जरूरी जानकारी प्राप्त करने का अवसर भी मिला। एम्स के निदेशक प्रोफेसर डॉ. निखिल टंडन ने अपने संदेश में कहा कि एमाइलॉयडोसिस कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि कई गंभीर रोगों का समूह है। इस बीमारी में शरीर में असामान्य प्रोटीन जमा होने लगते हैं, जो हृदय, गुर्दे, तंत्रिका तंत्र और अन्य अंगों की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि इसके लक्षण कई सामान्य बीमारियों से मिलते-जुलते हैं, जिसके कारण अक्सर इसकी पहचान में देरी हो जाती है। कार्यक्रम की संचालक प्रोफेसर डॉ. तुलिका सेठ ने कहा कि लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है, क्योंकि समय रहते बीमारी की पहचान होने पर उपचार के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। उन्होंने बताया कि एमाइलॉयडोसिस के कुछ प्रकार रक्त कैंसर से जुड़े होते हैं, जबकि कुछ आनुवंशिक कारणों से विकसित होते हैं। यह बीमारी खानपान से नहीं, बल्कि शरीर में बनने वाले असामान्य प्रोटीन के कारण होती है। एमाइलॉयडोसिस सपोर्ट ग्रुप ऑफ इंडिया के प्रमुख डॉ. सतीश चंद्रा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस बीमारी का सही निदान कराना आसान नहीं होता और कई बार मरीजों को लंबे समय तक भटकना पड़ता है। उन्होंने कहा कि उपचार काफी महंगा है और देश में इस रोग के प्रति जागरूकता अभी भी सीमित है। उन्होंने दुर्लभ बीमारियों के लिए बेहतर नीतिगत समर्थन की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एमाइलॉयडोसिस जैसी दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से एम्स, नई दिल्ली और एमाइलॉयडोसिस सपोर्ट ग्रुप ऑफ इंडिया (एएसजीआई) की तरफ से बुधवार को एक जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने एमाइलॉयडोसिस- क्या चुपचाप आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा विषय पर लोगों को जागरूक किया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बीमारी के शुरुआती लक्षणों, समय पर जांच और आधुनिक उपचार के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
हृदय, गुर्दे, तंत्रिका तंत्र और पाचन तंत्र पर बीमारी के प्रभाव और उपलब्ध उपचार विकल्पों के बारे में भी लोगों को बताया। इस दौरान मरीजों और उनके परिजनों को विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछने और जरूरी जानकारी प्राप्त करने का अवसर भी मिला। एम्स के निदेशक प्रोफेसर डॉ. निखिल टंडन ने अपने संदेश में कहा कि एमाइलॉयडोसिस कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि कई गंभीर रोगों का समूह है। इस बीमारी में शरीर में असामान्य प्रोटीन जमा होने लगते हैं, जो हृदय, गुर्दे, तंत्रिका तंत्र और अन्य अंगों की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि इसके लक्षण कई सामान्य बीमारियों से मिलते-जुलते हैं, जिसके कारण अक्सर इसकी पहचान में देरी हो जाती है। कार्यक्रम की संचालक प्रोफेसर डॉ. तुलिका सेठ ने कहा कि लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है, क्योंकि समय रहते बीमारी की पहचान होने पर उपचार के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। उन्होंने बताया कि एमाइलॉयडोसिस के कुछ प्रकार रक्त कैंसर से जुड़े होते हैं, जबकि कुछ आनुवंशिक कारणों से विकसित होते हैं। यह बीमारी खानपान से नहीं, बल्कि शरीर में बनने वाले असामान्य प्रोटीन के कारण होती है। एमाइलॉयडोसिस सपोर्ट ग्रुप ऑफ इंडिया के प्रमुख डॉ. सतीश चंद्रा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस बीमारी का सही निदान कराना आसान नहीं होता और कई बार मरीजों को लंबे समय तक भटकना पड़ता है। उन्होंने कहा कि उपचार काफी महंगा है और देश में इस रोग के प्रति जागरूकता अभी भी सीमित है। उन्होंने दुर्लभ बीमारियों के लिए बेहतर नीतिगत समर्थन की आवश्यकता पर भी जोर दिया।