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Delhi NCR News: दिल्ली की जमीन पर निवेशकों का बढ़ा भरोसा, तीन गुना दाम में बिकीं डीडीए की संपत्तियां
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480 करोड़ की संपत्तियां 1321 करोड़ में बिकीं, कड़कड़डूमा में एक प्लॉट के लिए 3160 बोलियां
जमीन, मकान और दुकान जैसी संपत्तियां 10 गुना कीमत देकर खरीदी
डीडीए को कई संपत्तियों के आरक्षित मूल्य से 175 फीसदी ज्यादा मिली कीमत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में जमीन, मकान और दुकान जैसी संपत्तियां खरीदने में आज भी लोग देश के अन्य शहरों के मुकाबले कहीं ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसका सीधा प्रमाण डीडीए की हालिया मेगा ई-नीलामी में देखने को मिला। जिन संपत्तियों का आरक्षित मूल्य 480.38 करोड़ रुपये तय हुआ था। उनके लिए खरीदारों ने 1321.21 करोड़ रुपये तक की उच्चतम बोली लगा दी। इस नीलामी में कई संपत्तियां अपने बेस प्राइस से करीब तीन गुना महंगी बिकीं, जो दिल्ली के बाजार की मजबूती और इसमें निवेशकों के भरोसे को साफ तौर पर जाहिर कर दिया है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने इसे दिल्ली को एक ग्लोबल इन्वेस्टमेंट और फाइनेंशियल हब बनाने के रोडमैप की सफलता बताया है।
कड़कड़डूमा में एक प्लॉट के लिए 3160 बोलियां : इस नीलामी में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धा पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा इलाके में देखी गई, जिसने बाजार विशेषज्ञों को भी चौंकाया। यहां के पॉकेट 21-22 स्थित एक कमर्शियल प्लॉट को खरीदने के लिए 36 खरीदारों ने मुकाबला किया और आखिरकार यह अपनी आरक्षित कीमत से 10 गुना से भी ज्यादा दाम पर बिका। इसी तरह, कड़कड़डूमा के ही एक अन्य संस्थागत (इंस्टीट्यूशनल) प्लॉट (नंबर 3ए) के लिए 20 बोलीदाताओं के बीच ऐसी जंग छिड़ी कि पूरी प्रक्रिया के दौरान कुल 3,160 बोलियां लगाई गईं। एलजी संधू ने कहा है कि इससे साफ है कि बेहतर लोकेशन और बेहतर कनेक्टिविटी वाली जमीन के लिए निवेशक किसी भी स्तर तक जाने को तैयार हैं।
छोटे खोखे और बड़े ग्रुप हाउसिंग प्लॉट दोनों की मांग : डीडीए ने इस नीलामी में संपत्तियों का एक बहुत बड़ा और विविध पोर्टफोलियो निवेशकों के सामने पेश किया था। नीलामी में कुल 142 संपत्तियां शामिल थीं, जिनमें सिर्फ बड़े प्लॉट ही नहीं, बल्कि मध्यम और छोटे कारोबारियों के लिए भी काफी विकल्प थे। इस सूची में रिहायशी, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और इंस्टीट्यूशनल प्लॉट के साथ-साथ ग्रुप हाउसिंग साइट्स, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में बनी दुकानें, मल्टीलेवल पार्किंग और छोटे कियोस्क (खोखे) तक शामिल थे। हर श्रेणी की संपत्ति की खरीद में यहां कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जिससे साफ हो गया कि दिल्ली में अभी विकास के लिए बाजार बड़ा है।
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ई-नीलामी में बाजार ने खुद तय की कीमत : यह पूरी नीलामी प्रक्रिया डीडीए के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हुई। डीडीए के मुताबिक, ये नीलामी प्रक्रिया पारदर्शी रही। इसमें निवेशकों को निष्पक्ष मौके मिले। अधिकारियों के मुताबिक, ई-नीलामी का यह तरीका प्राइस डिस्कवरी यानी बाजार की मांग के हिसाब से संपत्ति की वास्तविक और सही कीमत खोजने में बेहद प्रभावी साबित हुआ। खरीदारों की सुविधा के लिए डीडीए ने एक समर्पित हेल्पडेस्क भी बनाया था, जिसने बोलीदाताओं की मदद की।
दिल्ली को ग्लोबल सिटी बनाने की तैयारी : एलजी ने कहा कि नीलामी में मिला 175 फीसदी का भारी-भरकम प्रीमियम इस बात का प्रमाण है कि दिल्ली की जमीन आज भी निवेश का सबसे सुरक्षित और फायदेमंद जरिया है। दिल्ली को साफ, टिकाऊ निवेश और विश्व स्तरीय आवास वाली एक ग्लोबल सिटी के रूप में संवारने का प्रयास किया जा रहा है। इस सफलता से डीडीए की टीम उत्साहित है। उम्मीद है कि भविष्य में भी इसी तरह के पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी अवसर मिलेंगे। एलजी संधू ने पदभार संभालने के बाद से ही दिल्ली को एक वैश्विक शहर के रूप में विकसित करने पर जोर दिया है। इस सफल ई-नीलामी को उसी विजन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा सकता है।
जमीन, मकान और दुकान जैसी संपत्तियां 10 गुना कीमत देकर खरीदी
डीडीए को कई संपत्तियों के आरक्षित मूल्य से 175 फीसदी ज्यादा मिली कीमत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में जमीन, मकान और दुकान जैसी संपत्तियां खरीदने में आज भी लोग देश के अन्य शहरों के मुकाबले कहीं ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसका सीधा प्रमाण डीडीए की हालिया मेगा ई-नीलामी में देखने को मिला। जिन संपत्तियों का आरक्षित मूल्य 480.38 करोड़ रुपये तय हुआ था। उनके लिए खरीदारों ने 1321.21 करोड़ रुपये तक की उच्चतम बोली लगा दी। इस नीलामी में कई संपत्तियां अपने बेस प्राइस से करीब तीन गुना महंगी बिकीं, जो दिल्ली के बाजार की मजबूती और इसमें निवेशकों के भरोसे को साफ तौर पर जाहिर कर दिया है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने इसे दिल्ली को एक ग्लोबल इन्वेस्टमेंट और फाइनेंशियल हब बनाने के रोडमैप की सफलता बताया है।
कड़कड़डूमा में एक प्लॉट के लिए 3160 बोलियां : इस नीलामी में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धा पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा इलाके में देखी गई, जिसने बाजार विशेषज्ञों को भी चौंकाया। यहां के पॉकेट 21-22 स्थित एक कमर्शियल प्लॉट को खरीदने के लिए 36 खरीदारों ने मुकाबला किया और आखिरकार यह अपनी आरक्षित कीमत से 10 गुना से भी ज्यादा दाम पर बिका। इसी तरह, कड़कड़डूमा के ही एक अन्य संस्थागत (इंस्टीट्यूशनल) प्लॉट (नंबर 3ए) के लिए 20 बोलीदाताओं के बीच ऐसी जंग छिड़ी कि पूरी प्रक्रिया के दौरान कुल 3,160 बोलियां लगाई गईं। एलजी संधू ने कहा है कि इससे साफ है कि बेहतर लोकेशन और बेहतर कनेक्टिविटी वाली जमीन के लिए निवेशक किसी भी स्तर तक जाने को तैयार हैं।
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छोटे खोखे और बड़े ग्रुप हाउसिंग प्लॉट दोनों की मांग : डीडीए ने इस नीलामी में संपत्तियों का एक बहुत बड़ा और विविध पोर्टफोलियो निवेशकों के सामने पेश किया था। नीलामी में कुल 142 संपत्तियां शामिल थीं, जिनमें सिर्फ बड़े प्लॉट ही नहीं, बल्कि मध्यम और छोटे कारोबारियों के लिए भी काफी विकल्प थे। इस सूची में रिहायशी, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और इंस्टीट्यूशनल प्लॉट के साथ-साथ ग्रुप हाउसिंग साइट्स, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में बनी दुकानें, मल्टीलेवल पार्किंग और छोटे कियोस्क (खोखे) तक शामिल थे। हर श्रेणी की संपत्ति की खरीद में यहां कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जिससे साफ हो गया कि दिल्ली में अभी विकास के लिए बाजार बड़ा है।
ई-नीलामी में बाजार ने खुद तय की कीमत : यह पूरी नीलामी प्रक्रिया डीडीए के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हुई। डीडीए के मुताबिक, ये नीलामी प्रक्रिया पारदर्शी रही। इसमें निवेशकों को निष्पक्ष मौके मिले। अधिकारियों के मुताबिक, ई-नीलामी का यह तरीका प्राइस डिस्कवरी यानी बाजार की मांग के हिसाब से संपत्ति की वास्तविक और सही कीमत खोजने में बेहद प्रभावी साबित हुआ। खरीदारों की सुविधा के लिए डीडीए ने एक समर्पित हेल्पडेस्क भी बनाया था, जिसने बोलीदाताओं की मदद की।
दिल्ली को ग्लोबल सिटी बनाने की तैयारी : एलजी ने कहा कि नीलामी में मिला 175 फीसदी का भारी-भरकम प्रीमियम इस बात का प्रमाण है कि दिल्ली की जमीन आज भी निवेश का सबसे सुरक्षित और फायदेमंद जरिया है। दिल्ली को साफ, टिकाऊ निवेश और विश्व स्तरीय आवास वाली एक ग्लोबल सिटी के रूप में संवारने का प्रयास किया जा रहा है। इस सफलता से डीडीए की टीम उत्साहित है। उम्मीद है कि भविष्य में भी इसी तरह के पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी अवसर मिलेंगे। एलजी संधू ने पदभार संभालने के बाद से ही दिल्ली को एक वैश्विक शहर के रूप में विकसित करने पर जोर दिया है। इस सफल ई-नीलामी को उसी विजन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा सकता है।