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आईपीयू दीक्षांत समारोह: 26 हजार से अधिक छात्रों को बांटी डिग्रियां
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- यह शैक्षणिक यात्रा का समापन नहीं, राष्ट्र निर्माण की दिशा में नई यात्राओं की शुरूआत है-उपराष्ट्रपति
- मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा मुश्किल कोई भी हो सच और सही के साथ खड़े रहेंगे तो इम्पॉसिबल भी कहेगा आई एम पॉसिबल
- 22,932 स्नातक डिग्री के अलावा 3, 582 स्नातकोत्तर, 11 एमफिल और 124 पीएचडी डिग्रियां शामिल रहीं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। यह दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक यात्रा का समापन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में नई शुरुआत है। आज का युवा ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सस्टेनेबल इनोवेशन विश्व को नई दिशा दे रहे हैं। ऐसे में छात्रों को केवल डिग्री तक सीमित न रहकर तार्किक सोच, नवाचार और अनुकूलन क्षमता विकसित करनी होगी। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने यह बातें गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) के 18 वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर कहीं। इस समारोह में 26, 649 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय के सूरजमल विहार स्थित परिसर में किया गया, जहां छात्रों की उपलब्धियों का उत्सव मनाया गया। साथ ही समारोह में दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, डीयू कुलपति व एआईसीटीई के चेयरमैन प्रो. योगेश सिंह, उच्च शिक्षा सचिव भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि छात्रों के कठिन परिश्रम और अनुशासन का फल है। उन्होंने कहा कि आज के युवा ही विकसित भारत के सारथी बनेंगे और देश को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाईयों तक पहुंचाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को मंत्र देते हुए कहा कि कठिनाइयों के बावजूद जो सही के साथ खड़ा रहता है, उसके लिए “इम्पॉसिबल भी आई एम पॉसिबल” बन जाता है। उन्होंने युवाओं को नौकरी मांगने के बजाय रोजगार सृजक बनने के लिए प्रेरित किया।
समाज के प्रति योगदान दें -कुलपति
कुलपति प्रो डॉ. महेश वर्मा ने दीक्षांत समारोह को परिश्रम, अनुशासन और सतत विकास का सशक्त प्रतीक बताया। उन्होंने स्नातकों को जिम्मेदारी, ईमानदारी और उद्देश्य के साथ आगे बढने, समाज के प्रति योगदान देने और अपने मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
पीएचडी प्राप्त करने वालों में 70 फीसदी महिलाएं -
डिग्रियों में 22,932 स्नातक, 3,582 स्नातकोत्तर, 11 एमफिल और 124 पीएचडी शामिल हैं। खास बात यह रही कि पीएचडी प्राप्त करने वालों में 70 प्रतिशत महिलाएं रहीं। इसके अलावा 76 गोल्ड मेडल और 6 मेमोरियल पुरस्कार भी प्रदान किए गए।
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- मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा मुश्किल कोई भी हो सच और सही के साथ खड़े रहेंगे तो इम्पॉसिबल भी कहेगा आई एम पॉसिबल
- 22,932 स्नातक डिग्री के अलावा 3, 582 स्नातकोत्तर, 11 एमफिल और 124 पीएचडी डिग्रियां शामिल रहीं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। यह दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक यात्रा का समापन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में नई शुरुआत है। आज का युवा ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सस्टेनेबल इनोवेशन विश्व को नई दिशा दे रहे हैं। ऐसे में छात्रों को केवल डिग्री तक सीमित न रहकर तार्किक सोच, नवाचार और अनुकूलन क्षमता विकसित करनी होगी। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने यह बातें गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) के 18 वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर कहीं। इस समारोह में 26, 649 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय के सूरजमल विहार स्थित परिसर में किया गया, जहां छात्रों की उपलब्धियों का उत्सव मनाया गया। साथ ही समारोह में दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, डीयू कुलपति व एआईसीटीई के चेयरमैन प्रो. योगेश सिंह, उच्च शिक्षा सचिव भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि छात्रों के कठिन परिश्रम और अनुशासन का फल है। उन्होंने कहा कि आज के युवा ही विकसित भारत के सारथी बनेंगे और देश को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाईयों तक पहुंचाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को मंत्र देते हुए कहा कि कठिनाइयों के बावजूद जो सही के साथ खड़ा रहता है, उसके लिए “इम्पॉसिबल भी आई एम पॉसिबल” बन जाता है। उन्होंने युवाओं को नौकरी मांगने के बजाय रोजगार सृजक बनने के लिए प्रेरित किया।
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समाज के प्रति योगदान दें -कुलपति
कुलपति प्रो डॉ. महेश वर्मा ने दीक्षांत समारोह को परिश्रम, अनुशासन और सतत विकास का सशक्त प्रतीक बताया। उन्होंने स्नातकों को जिम्मेदारी, ईमानदारी और उद्देश्य के साथ आगे बढने, समाज के प्रति योगदान देने और अपने मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
पीएचडी प्राप्त करने वालों में 70 फीसदी महिलाएं -
डिग्रियों में 22,932 स्नातक, 3,582 स्नातकोत्तर, 11 एमफिल और 124 पीएचडी शामिल हैं। खास बात यह रही कि पीएचडी प्राप्त करने वालों में 70 प्रतिशत महिलाएं रहीं। इसके अलावा 76 गोल्ड मेडल और 6 मेमोरियल पुरस्कार भी प्रदान किए गए।