Land for Job Case: लालू-राबड़ी और तेजस्वी-तेज प्रताप ने व्यक्तिगत पेशी से मांगी छूट, कोर्ट से राहत की उम्मीद
बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव ने भी कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट देने की अर्जी दायर की है। यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज किया गया है, जिसमें भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप शामिल हैं।
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नौकरी के बदले जमीन घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी ने राउज एवेन्यू कोर्ट से व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगी है। इसी क्रम में, उनके बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव ने भी कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट देने की अर्जी दायर की है। यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज किया गया है, जिसमें भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप शामिल हैं। अदालत इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी और अपना फैसला सुनाएगी।
केस में सभी का ध्यान तेजस्वी पर
रेलवे में नौकरी के बदले जमीन लिखवाने के मामले में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद आज पहली बार दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में लालू परिवार की भूमिका पर सुनवाई हुई। आरोप पत्र स्वीकार करने से पहले कोर्ट ने इसमें सिंडिकेट की तरह लालू परिवार के शामिल होने की प्रथम दृष्टया बात कही थी। खास बात यह भी है कि इस केस में भले ही लालू प्रसाद यादव सबसे बड़ा नाम हैं, लेकिन सभी का ध्यान तेजस्वी यादव पर है। उन्हें सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी हुआ था। तेजस्वी पर सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान इसलिए है, क्योंकि वह राजद के कार्यकारी अध्यक्ष बनकर लालू के उत्तराधिकारी घोषित हो चुके हैं और महागठबंधन के सबसे बड़े नेता हैं। पिछले चुनाव में वह मुख्यमंत्री की दावेदारी भी कर रहे थे।
1 से 15 फरवरी के बीच होना होगा पेश, 9 मार्च से रेगुलर ट्रायल की तैयारी
गुरुवार को हुई इस सुनवाई के दौरान लालू यादव की बड़ी बेटी और पाटलिपुत्र से सांसद मीसा भारती और उनकी बहन हेमा यादव कोर्ट में पहुंची, लेकिन बाकी लोग कोर्ट नहीं आए। इसलिए अदालत ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को 1 से 15 फरवरी के बीच कोर्ट के समक्ष सशरीर हाजिर होना होगा।
कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब इस मामले में किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी। अदालत ने निर्देश दिया है कि 9 मार्च से इस पूरे मामले की नियमित सुनवाई शुरू होगी। कानूनी जानकारों का मानना है कि रेगुलर सुनवाई शुरू होने से इस केस का फैसला जल्द आने की उम्मीद है, जो चुनावी साल में राजद की राजनीतिक मुश्किलों को बढ़ा सकता है।