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अदालत से बड़ी राहत: छह साल कोमा में रहकर लड़ते रहे जिंदगी की जंग, अब हाईकोर्ट ने दिलाया 1.71 करोड़ का हक
Sun, 25 Oct 2026 01:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 25 Oct 2026 01:55 AM IST
सार
अदालत ने उनकी पत्नी नीना चंद्र गुप्ता और उनके वारिसों को 1.70 करोड़ रुपये से अधिक के मुआवजा और उस पर 12 प्रतिशत सालाना ब्याज देने के आदेश को यथावत रखा है।
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दिल्ली हाई कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद छह साल तक कोमा में रहे सतीश चंद्र गुप्ता के परिवार को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनकी पत्नी नीना चंद्र गुप्ता और उनके वारिसों को 1.70 करोड़ रुपये से अधिक के मुआवजा और उस पर 12 प्रतिशत सालाना ब्याज देने के आदेश को यथावत रखा है।
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न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ ने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी की अपील पर सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कंपनी को शेष 50 प्रतिशत मुआवजा राशि ब्याज सहित रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा कराने का निर्देश दिया।
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कुत्ते को बचाने के प्रयास में हुआ था हादसा : हादसा 28 मई 2014 को हुआ था। सतीश चंद्र गुप्ता कार की पिछली सीट पर बैठकर द्वारका से छतरपुर जा रहे थे। रास्ते में वसंत कुंज के पास अचानक सड़क पर एक कुत्ता आ गया। उसे बचाने के प्रयास में चालक ने कार डिवाइडर से टकरा गई।
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हादसे में उनको को गंभीर चोटें आईं और वह कोमा में चले गए। इसके बाद उनकी जिंदगी अस्पताल और घर में चिकित्सा उपकरणों के सहारे बीती। अगस्त 2020 में उन्होंने अंतिम सांस ली। हादसे के बाद करीब छह वर्षों तक परिवार को उनके इलाज और देखभाल की जिम्मेदारी उठानी पड़ी।
छह साल तक इलाज और 24 घंटे देखभाल : सुनवाई के दौरान अदालत के सामने परिवार के लंबे संघर्ष और इलाज पर हुए भारी खर्च का विवरण रखा गया। मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टरों के बयानों के अनुसार उनको गंभीर मस्तिष्क संबंधी क्षति हुई थी। इस स्थिति के कारण वह पूरी तरह बिस्तर पर निर्भर थे और उन्हें चौबीसों घंटे नर्सिंग अटेंडेंट की जरूरत थी।
उनकी पत्नी नीना चंद्र गुप्ता ने छह वर्षों तक निजी अटेंडेंट, डॉक्टरों की फीस, दवाओं और अन्य चिकित्सा जरूरतों पर बड़ी रकम खर्च की। परिवार ने अपनी बचत और उपलब्ध संसाधनों के सहारे इलाज जारी रखा। इस दौरान आर्थिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
बीमा कंपनी ने खर्चों पर उठाए सवाल : आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने मुआवजे को चुनौती देते हुए दावा किया था कि अटेंडेंट पर हुए खर्च को दो बार शामिल किया गया है। कंपनी ने इलाज के खर्च और बीमा पॉलिसी के तहत मिलने वाले कवरेज पर भी सवाल उठाए। इसके अलावा, इलाज के लिए अग्रिम भुगतान की वापसी से जुड़ी दलीलें भी पेश की गईं।
बीमा कंपनी ने यह मुद्दा भी उठाया कि कार की पिछली सीट पर बैठे गुप्ता संबंधित पॉलिसी के तहत सुरक्षा पाने के हकदार थे या नहीं। हालांकि, हाई कोर्ट ने उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड, भुगतान की रसीदों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद कंपनी की दलीलों को मुआवजे में कटौती के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना।