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Delhi NCR News: परिवहन विभाग की फर्जी वेबसाइट बनाकर कर रहा था ठगी, इटावा से गिरफ्तार
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फर्जीवाड़े के फंडे को जरूर पढ़ें...क्योंकि यह आपको ठगी से बचाएगी
तकनीकी विशेषज्ञता का दुरुपयोग कर घर बैठे लोगों को ठग रहा था 24 साल का अंशुल यादव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अगर आप गूगल पर किसी सरकारी वेबसाइट की तलाश करते हैं तो सावधान हो जाएं। एक छोटी सी लापरवाही आपको साइबर ठगी का शिकार बना सकती है। मध्य जिला साइबर थाना पुलिस ने परिवहन विभाग की फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों से ठगी करने वाले यूपी के इटावा निवासी अंशुल यादव (24) को गिरफ्तार किया है। आरोपी एक नामी संस्थान से एमसीए पास है और तकनीकी विशेषज्ञता का दुरुपयोग कर लोगों को अपने जाल में फंसा रहा था।
पुलिस ने आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, नकली वेबसाइट की जिप सोर्स फाइलें और अन्य तकनीकी सबूत बरामद किए हैं। आरोपी परिवहन विभाग की नई नंबर प्लेट के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठ रहा था। मध्य जिला के पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह के अनुसार, साइबर थाने को एक शिकायत मिली थी।
पुलिस उपायुक्त के मुताबिक पीड़ित ने अपनी गाड़ी की नंबर प्लेट बुक कराने के लिए गूगल पर सर्च किया। इस दौरान उसे parivahan.online नाम की वेबसाइट मिली। सरकारी वेबसाइट जैसी दिखने वाली इस साइट पर भरोसा कर पीड़ित ने नंबर प्लेट बुक कराई और 1099 रुपये ऑनलाइन जमा कर दिए। बाद में उससे और पैसे मांगे जाने लगे। शक होने पर पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल-cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराई थी।
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ठगी की रकम कई म्यूल खातों से होते हुए आरोपी तक पहुंचती थी
जांच के दौरान साइबर थाना प्रभारी योगेंद्र दलाल और उनकी टीम ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। जांच में पता चला कि ठगी की रकम कई म्यूल बैंक खातों के जरिए आरोपी तक पहुंच रही थी। इसके बाद पुलिस ने इटावा में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने देशभर में लोगों से ठगी करने की बात स्वीकार की। पुलिस पता लगा रही है कि अब तक उसने कितने लोगों से और कितने की ठगी की है।
साइबर ठगों को फर्जी सरकारी वेबसाइट बनाकर बेचता था
जांच में यह भी सामने आया कि अंशुल यादव केवल खुद ठगी नहीं करता था, बल्कि देशभर के साइबर ठगों को फर्जी सरकारी वेबसाइट बनाकर बेचता था। वह डोमेन मैनेजमेंट सिस्टम, बैकएंड एडमिन एक्सेस और वेबसाइट की जिप सोर्स फाइलों को नियंत्रित करता था। वेबसाइट डिजाइनिंग, डोमेन होस्टिंग और पेमेंट गेटवे इंटीग्रेशन में माहिर आरोपी सरकारी पोर्टल जैसी हूबहू वेबसाइट तैयार करता था। यहां तक कि रंग और डिजाइन भी सरकारी वेबसाइटों से मिलते-जुलते रखता था, जिससे लोगों को शक न हो।
एसईओ का मास्टर...सर्च करने पर पहले फर्जी वेबसाइट दिखती
आरोपी अपनी फर्जी वेबसाइट को गूगल पर ऊपर दिखाने के लिए सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (एसईओ) तकनीक का इस्तेमाल करता था। इसके जरिए वेबसाइट सर्च रिजल्ट में सबसे ऊपर दिखाई देती थी और लोग उसे असली समझकर ठगी का शिकार हो जाते थे।
ऐसे बच सकते हैं आप
1. वेबसाइट का यूआरएल ध्यान से जांचें: किसी भी सरकारी सेवा का इस्तेमाल करने से पहले वेबसाइट का पता यूआरएल जरूर देखें। असली सरकारी वेबसाइट आमतौर पर .gov.in या .nic.in डोमेन पर होती हैं। गलत स्पेलिंग, अतिरिक्त अक्षर या संदिग्ध लिंक वाली वेबसाइट से बचें।
2. गूगल विज्ञापनों पर तुरंत भरोसा न करे: कई फर्जी वेबसाइटें सरकारी पोर्टल जैसा दिखाकर गूगल विज्ञापन के जरिए ऊपर दिखाई देती हैं। हमेशा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट सीधे टाइप करें या विश्वसनीय स्रोत से लिंक खोलें।
3. ओटीपी, बैंक डिटेल और पासवर्ड साझा न करें: कोई भी सरकारी विभाग फोन, ईमेल या मैसेज के जरिए ओटीपी, एटीएम पिन, सीवीवी या नेट बैंकिंग पासवर्ड नहीं मांगता। ऐसी मांग होने पर तुरंत सतर्क हो जाएं।
4. केवल आधिकारिक एप और पोर्टल का इस्तेमाल करें: सरकारी सेवाओं के लिए एप डाउनलोड करते समय डेवलपर का नाम जांचें। फर्जी एप या थर्ड पार्टी वेबसाइट के जरिए भुगतान करने से बचें।
5. संदिग्ध वेबसाइट या कॉल की शिकायत करें: यदि कोई वेबसाइट या व्यक्ति सरकारी अधिकारी बनकर ठगी करने की कोशिश करे तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या एनसीआरपी पोर्टल पर जाकर शिकायत करें।
डॉ. पवन दुग्गल, साइबर एक्सपर्ट
तकनीकी विशेषज्ञता का दुरुपयोग कर घर बैठे लोगों को ठग रहा था 24 साल का अंशुल यादव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अगर आप गूगल पर किसी सरकारी वेबसाइट की तलाश करते हैं तो सावधान हो जाएं। एक छोटी सी लापरवाही आपको साइबर ठगी का शिकार बना सकती है। मध्य जिला साइबर थाना पुलिस ने परिवहन विभाग की फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों से ठगी करने वाले यूपी के इटावा निवासी अंशुल यादव (24) को गिरफ्तार किया है। आरोपी एक नामी संस्थान से एमसीए पास है और तकनीकी विशेषज्ञता का दुरुपयोग कर लोगों को अपने जाल में फंसा रहा था।
पुलिस ने आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, नकली वेबसाइट की जिप सोर्स फाइलें और अन्य तकनीकी सबूत बरामद किए हैं। आरोपी परिवहन विभाग की नई नंबर प्लेट के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठ रहा था। मध्य जिला के पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह के अनुसार, साइबर थाने को एक शिकायत मिली थी।
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पुलिस उपायुक्त के मुताबिक पीड़ित ने अपनी गाड़ी की नंबर प्लेट बुक कराने के लिए गूगल पर सर्च किया। इस दौरान उसे parivahan.online नाम की वेबसाइट मिली। सरकारी वेबसाइट जैसी दिखने वाली इस साइट पर भरोसा कर पीड़ित ने नंबर प्लेट बुक कराई और 1099 रुपये ऑनलाइन जमा कर दिए। बाद में उससे और पैसे मांगे जाने लगे। शक होने पर पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल-cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराई थी।
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ठगी की रकम कई म्यूल खातों से होते हुए आरोपी तक पहुंचती थी
जांच के दौरान साइबर थाना प्रभारी योगेंद्र दलाल और उनकी टीम ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। जांच में पता चला कि ठगी की रकम कई म्यूल बैंक खातों के जरिए आरोपी तक पहुंच रही थी। इसके बाद पुलिस ने इटावा में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने देशभर में लोगों से ठगी करने की बात स्वीकार की। पुलिस पता लगा रही है कि अब तक उसने कितने लोगों से और कितने की ठगी की है।
साइबर ठगों को फर्जी सरकारी वेबसाइट बनाकर बेचता था
जांच में यह भी सामने आया कि अंशुल यादव केवल खुद ठगी नहीं करता था, बल्कि देशभर के साइबर ठगों को फर्जी सरकारी वेबसाइट बनाकर बेचता था। वह डोमेन मैनेजमेंट सिस्टम, बैकएंड एडमिन एक्सेस और वेबसाइट की जिप सोर्स फाइलों को नियंत्रित करता था। वेबसाइट डिजाइनिंग, डोमेन होस्टिंग और पेमेंट गेटवे इंटीग्रेशन में माहिर आरोपी सरकारी पोर्टल जैसी हूबहू वेबसाइट तैयार करता था। यहां तक कि रंग और डिजाइन भी सरकारी वेबसाइटों से मिलते-जुलते रखता था, जिससे लोगों को शक न हो।
एसईओ का मास्टर...सर्च करने पर पहले फर्जी वेबसाइट दिखती
आरोपी अपनी फर्जी वेबसाइट को गूगल पर ऊपर दिखाने के लिए सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (एसईओ) तकनीक का इस्तेमाल करता था। इसके जरिए वेबसाइट सर्च रिजल्ट में सबसे ऊपर दिखाई देती थी और लोग उसे असली समझकर ठगी का शिकार हो जाते थे।
ऐसे बच सकते हैं आप
1. वेबसाइट का यूआरएल ध्यान से जांचें: किसी भी सरकारी सेवा का इस्तेमाल करने से पहले वेबसाइट का पता यूआरएल जरूर देखें। असली सरकारी वेबसाइट आमतौर पर .gov.in या .nic.in डोमेन पर होती हैं। गलत स्पेलिंग, अतिरिक्त अक्षर या संदिग्ध लिंक वाली वेबसाइट से बचें।
2. गूगल विज्ञापनों पर तुरंत भरोसा न करे: कई फर्जी वेबसाइटें सरकारी पोर्टल जैसा दिखाकर गूगल विज्ञापन के जरिए ऊपर दिखाई देती हैं। हमेशा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट सीधे टाइप करें या विश्वसनीय स्रोत से लिंक खोलें।
3. ओटीपी, बैंक डिटेल और पासवर्ड साझा न करें: कोई भी सरकारी विभाग फोन, ईमेल या मैसेज के जरिए ओटीपी, एटीएम पिन, सीवीवी या नेट बैंकिंग पासवर्ड नहीं मांगता। ऐसी मांग होने पर तुरंत सतर्क हो जाएं।
4. केवल आधिकारिक एप और पोर्टल का इस्तेमाल करें: सरकारी सेवाओं के लिए एप डाउनलोड करते समय डेवलपर का नाम जांचें। फर्जी एप या थर्ड पार्टी वेबसाइट के जरिए भुगतान करने से बचें।
5. संदिग्ध वेबसाइट या कॉल की शिकायत करें: यदि कोई वेबसाइट या व्यक्ति सरकारी अधिकारी बनकर ठगी करने की कोशिश करे तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या एनसीआरपी पोर्टल पर जाकर शिकायत करें।
डॉ. पवन दुग्गल, साइबर एक्सपर्ट