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दिल्ली में जर्जर इमारतों का कहर: यहां हर रोज ढहती हैं एक से ज्यादा इमारतें, चार साल में 98 लोगों की हुई मौत

Mon, 07 Sep 2026 09:30 AM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Mon, 07 Sep 2026 09:30 AM IST
सार

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 में इमारत गिरने की 349 घटनाएं हुईं। इनमें 43 लोगों की मौत और 315 लोग घायल हुए। वर्ष 2023 में 371 घटनाओं में 23 लोगों की जान गई और 171 लोग घायल हुए। 

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More than one building collapses in Delhi every day; 98 people have died in four years
दिल्ली में हर रोज ढहती हैं एक से ज्यादा इमारतें - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कहने को तो दिल्ली देश की राजधानी है, लेकिन यहां जर्जर और कमजोर इमारतें लगातार लोगों की जान ले रही हैं। दमकल विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 से 2024 के बीच ही राजधानी में इमारत गिरने की 1133 घटनाएं सामने आईं। इन हादसों में 98 लोगों की मौत हुई। वहीं, इस साल भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। एक जनवरी से 31 जुलाई तक दिल्ली फायर सर्विस को इमारत गिरने की 233 कॉल मिलीं और इन हादसों में 17 लोगों की मौत के अलावा 101 लोग घायल हुए।

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आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 में इमारत गिरने की 349 घटनाएं हुईं। इनमें 43 लोगों की मौत और 315 लोग घायल हुए। वर्ष 2023 में 371 घटनाओं में 23 लोगों की जान गई और 171 लोग घायल हुए। वर्ष 2024 में 413 घटनाएं हुईं और 32 लोगों की मौत हुई। इन आंकड़ों से साफ है कि राजधानी में हर साल सैकड़ों इमारतें गिर रही हैं, लेकिन हादसों की रोकथाम के लिए स्थायी इंतजाम अब भी चुनौती बने हुए हैं।

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इस साल जुलाई तक मिली 233 कॉल में जनवरी में 17, फरवरी में 10, मार्च में 15, अप्रैल में 20, मई में 18, जून में 68 और जुलाई में 85 कॉल शामिल हैं। यानी जून और जुलाई में इमारत गिरने की घटनाओं में अचानक तेजी आई। पिछले साल इसी अवधि में फायर सर्विस को 316 कॉल मिली थीं। तब 37 लोगों की मौत और 123 लोग घायल हुए थे।

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सैदुल्लाजाब में 30 मई को इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना ने भी निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक सत्य निकेतन की इमारत के नीचे बेसमेंट बनाने का काम चल रहा था। उनका दावा है कि इससे नींव पर दबाव पड़ा हो सकता है। कुछ लोगों ने नीचे के पिलर कमजोर होने की बात भी कही। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

दिल्ली में बड़े हादसे
वर्ष स्थान मौतें
2010 ललिता पार्क, लक्ष्मी नगर 71
2011 चांदनी महल/जामा मस्जिद 07
2014 इंद्रलोक, तुलसी नगर 10
2020 भजनपुरा 05
2022 सत्य निकेतन 02
2025 वेलकम, जनता कॉलोनी 06
2026 सैदुल्लाजाब 06
2026 रोहिणी सेक्टर-16 03

सर्वे के 15 लाख जारी नहीं किए तो सैदुल्लाजाब में इमारत गिरने के कारणों का नहीं लगा पता
दिल्ली में किसी बड़े हादसे के बाद इमारत गिरने के कारणों का पता लगाने के लिए अक्सर आईआईटी से तकनीकी सर्वे कराया जाता है। बीते कुछ महीन पहले सैदुल्लाजाब इलाके में हुए हादसे में आईआईटी दिल्ली को सर्वे करना है। इसके लिए संस्थान ने दिल्ली पुलिस को पत्र भेजकर करीब 15 लाख रुपये फीस मांगी है, लेकिन अभी तक रकम जारी नहीं की गई है। दक्षिण जिला पुलिस ने इसके लिए दिल्ली पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखा है। मामलों से जुड़े जानकारों का कहना है कि मुख्यालय से केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा और मंजूरी मिलने के बाद फीस जारी होने पर सर्वे कराया जाएगा। फिलहाल संस्थान को सर्वे कराने के लिए जिस रकम की जरूरत है, उसे सरकार ने अब तक जारी नहीं किया।

एफएसएल की रिपोर्ट का इंतजार
सैदुल्लाजाब हादसे की एफएसएल रिपोर्ट भी महरौली थाना पुलिस को अब तक नहीं मिली है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक एफएसएल पर काम का अधिक दबाव होने के कारण रिपोर्ट आने में समय लग रहा है। पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। सभी रिपोर्ट मिलने के बाद जरूरत पड़ने पर पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा।

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