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Cyber Crime: नोएडा की कंपनी के वर्चुअल वॉलेट पर 'डाका', करोड़ों की बिटकॉइन और क्रिप्टो करंसी गायब

अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 20 May 2026 06:02 AM IST
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सार

आरोप है कि वर्चुअल वॉलेट की गोपनीय जानकारी हासिल कर डिजिटल संपत्तियां बिना अनुमति ट्रांसफर कर दी गईं। साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस जांच कर रही है।

Noida company's virtual wallet 'robbed', crores of bitcoins and crypto currency missing
demo - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

नोएडा की एक कंपनी के संचालक ने अपने कारोबारी साझेदार और अन्य लोगों पर करोड़ों की क्रिप्टो करेंसी और बिटकॉइन की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। आरोप है कि वर्चुअल वॉलेट की गोपनीय जानकारी हासिल कर डिजिटल संपत्तियां बिना अनुमति ट्रांसफर कर दी गईं। साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस जांच कर रही है।

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दिल्ली के विवेक विहार निवासी प्रतीक गौरी की सेक्टर-62 में कंपनी है। उनकी मुलाकात 2021 में दिल्ली और गुरुग्राम में प्रतीक द्विवेदी से हुई थी। दोनों ने मिउत्तरी अटलांटिक महासागर में स्थित तुर्क और कैकोस द्वीप समूह में कारोबार के लिए फाइवआयर टेक्नोलॉजी नाम से फॉरेन एक्सचेंज कंपनी बनाई। 
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कंपनी का कार्यालय नोएडा सेक्टर-62 में भी खोला गया था, जहां दोनों निदेशक के रूप में कार्यरत थे। कंपनी फॉरेन एक्सचेंज और वित्तीय प्रबंधन से जुड़ा कारोबार करती थी।शिकायत के अनुसार, दोनों ने ‘सिंपल एग्रीमेंट फॉर फ्यूचर टोकन्स’ (एसएएफटी) मॉडल के जरिए करीब 2 करोड़ 10 लाख अमेरिकी डॉलर जुटाए थे। दावा किया  है कि कंपनी ने मात्र 11 महीनों में यूनिकॉर्न कंपनी का दर्जा भी हासिल कर लिया। 
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इसके बाद निवेशकों और कंपनी की राशि डिजिटल वॉलेट से जमा की जाने लगी। इसके लिए करीब 13 डिजिटल वॉलेट बनाए गए, जिनमें यूएसडीटी, बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टो संपत्तियां रखी गईं। इन वॉलेट्स तक पहुंच दोनों निदेशकों के पास संयुक्त रूप से थी। आरोप है कि अगस्त 2025 से प्रतीक द्विवेदी ने राहुल रौतेला, युवराज रघुवंशी, हिमांशु शर्मा, उत्कर्ष द्विवेदी, अमन द्विवेदी, करण अहलूवालिया, अविरल अग्रवाल और एक अज्ञात व्यक्ति के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा शुरू किया। 

क्या होती है डिजिटल करेंसी?

  •  क्रिप्टो करेंसी रुपये, डॉलर और यूरो की तरह लेन-देन का एक माध्यम है लेकिन यह पूरी तरह डिजिटल या आभासी मुद्रा होती है। इसका संचालन ऑनलाइन नेटवर्क के जरिए होता है, इसलिए इसे अनियमित बाजार माना जाता है।
  • क्रिप्टो लेन-देन में ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग किया जाता है। प्रत्येक ट्रांजैक्शन डिजिटल हस्ताक्षर के जरिए सत्यापित होता है और उसका रिकॉर्ड सुरक्षित रूप से ब्लॉकचेन पर दर्ज किया जाता है।
  • आरोप है कि दुबई में बैठक से पहले सुरक्षा के नाम पर सभी के मोबाइल फोन अलग रखवा लिए गए। इसी दौरान उनके मोबाइल से जानकारी हासिल कर वर्चुअल वॉलेट के पिन और पासवर्ड तक पहुंच बनाई गई। 

ऐसे बरतें सावधानी
विशेषज्ञों के अनुसार, क्रिप्टो निवेशकों को अपने वॉलेट का पासवर्ड सुरक्षित रखना चाहिए, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) का उपयोग करना चाहिए और केवल विश्वसनीय वेबसाइट व प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहिए।

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