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Noida News: सस्ते लोन के नाम पर ठगी की फैक्टरी, कॉल सेंटर का खुलासा

Sat, 11 Jul 2026 07:48 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jul 2026 07:48 PM IST
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Call center running a loan scam busted
ऑपरेशन साइबर ब्रज के तहत सेक्टर-1 में कार्रवाई, पांच जालसाज गिरफ्तार
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लैपटॉप, मोबाइल, कॉलिंग डाटा और बैंकिंग दस्तावेज बरामद, कई राज्यों तक फैला था नेटवर्क
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। कम ब्याज दर पर तुरंत लोन उपलब्ध कराने का झांसा देकर लोगों से ठगी करने वाले संगठित गिरोह का नोएडा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। कोतवाली फेज-वन पुलिस ने ऑपरेशन साइबर ब्रज के तहत सेक्टर-1 में संचालित अवैध कॉल सेंटर पर छापा मारकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम वसूलने के बाद पीड़ितों से संपर्क खत्म कर देते थे।
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि कोई व्यक्ति फोन या ऑनलाइन माध्यम से केवल प्रोसेसिंग फीस जमा कराने के बदले तुरंत लोन दिलाने का दावा करता है तो सतर्क हो जाएं। किसी भी अनजान के साथ बैंक खाते, ओटीपी, आधार या पैन कार्ड की जानकारी साझा न करें। साइबर ठगी की आशंका होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन या एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
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एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि कार्यालय संचालन की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने छापा मारा। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सेक्टर-27 निवासी पवन कुमार, हरौला निवासी मोहित, सेक्टर-66 के पीजी में रहने वाले हर्ष शर्मा, सेक्टर-135 निवासी स्वाति व सेक्टर-26 निवासी प्रीति के रूप में हुई है। आरोपियों ने बताया कि वे उन लोगों का डाटा जुटाते थे, जो ऋण की तलाश में रहते थे। इसके बाद उन्हें फोन कर खुद को प्रतिष्ठित वित्तीय संस्था का प्रतिनिधि बताकर झांसा दिया जाता था। जांच में पता चला है कि गिरोह के मोबाइल नंबरों के खिलाफ 10 से अधिक शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज हैं। आशंका है कि गिरोह ने अब तक 250 से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, छह चेकबुक, पासबुक, 160 से अधिक कॉलिंग डाटा शीट, 11 रजिस्टर, बिलिंग बुक और इंटरनेट राउटर बरामद किए हैं।
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किराये पर लिया था कार्यालय
आरोपियों ने 40 हजार रुपये प्रतिमाह किराये पर कार्यालय लिया था। पुलिस अब मकान मालिक से भी पूछताछ करेगी कि उसे इस गतिविधि की जानकारी थी या नहीं। बरामद मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा।
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