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शतरंज 100 मीटर रेस नहीं, मैराथन दौड़ की तरह है : श्रीराम झा

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 08 Feb 2026 05:22 PM IST
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Chess is not a 100-meter race, it is like a marathon: Shriram Jha
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- ग्रैंडमास्टर बोले, विश्व भी भारत की शतरंज शक्ति को मान रहा, अमर उजाला की यह पहल देश के हर कोने तक पहुंचनी चाहिए
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500 भारतीय खेलते हैं यूरोपीय प्रतियोगिताओं में
92 ग्रैंड मास्टर निकल चुके हैं देश से
7 ग्रैंड मास्टर है दिल्ली-एनसीआर से
अंकुर त्रिपाठी
नोएडा। शतरंज 100 मीटर रेस की तरह नहीं है, यह मैराथन दौड़ने जैसा है। कई बार परिणाम अनुकूल न आने पर अभिभावक धैर्य खो देते हैं। उन्हें इससे बचना होगा और बच्चों को भी हिम्मत देनी होगी। रविवार को यह बातें देश के 21वें ग्रैंडमास्टर श्रीराम झा ने कहीं।
अमर उजाला शतरंज प्रतियोगिता के ग्रैंड फिनाले में पहुंचे श्रीराम ने कहा कि अभिभावकों को समझना होगा कि शतरंज में परिणाम जल्दी नहीं मिलते। परिणाम तक पहुंचने में छह माह से तीन साल तक का समय लग सकता है। धैर्य और लगन के साथ आगे बढ़ते रहना होता है। श्रीराम कहते हैं कि अब यूरोपीय प्रतियोगिताओं में करीब 500 भारतीय खिलाड़ी खेल रहे हैं। देश से अब तक 92 ग्रैंडमास्टर निकल चुके हैं। शतरंज तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अकेले दिल्ली-एनसीआर से ही अब तक 7 ग्रैंडमास्टर बन चुके है। अमर उजाला की यह पहल देश के हर कोने तक पहुंचनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि विश्व भी भारत की शतरंज शक्ति को मान रहा है। दक्षिण भारत में बच्चे स्कूल छोड़कर शतरंज खेल रहे हैं। उत्तर भारत में भी गांव से लेकर शहर तक लोग शतरंज से जुड़ते चले जा रहे हैं। साल दर साल प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है। चेस ओलंपियाड में महिला और पुरुष वर्ग में भारत स्वर्ण पदक जीत चुका है।
मोबाइल के बजाय बोर्ड पर खेलें
उन्होंने कहा कि शतरंज से निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है। खिलाड़ी 30 चालों के खेल में 30 निर्णय लेते हैं। बच्चों को मोबाइल पर शतरंज खेलने की बजाय बोर्ड पर खेलना चाहिए, क्योंकि हर प्रतियोगिता बोर्ड पर खेली जाती है। बोर्ड पर खेलने से अभ्यास बढ़ेगा और ज्यादा अभ्यास से बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
तेजी से बढ़ रहा क्रेज
श्रीराम कहते हैं कि करीब 10–15 साल पहले शतरंज का क्रेज बहुत कम था, लेकिन हाल में इसमें खासा सुधार हुआ है। पहले शतरंज को सरकार से मदद नहीं मिलती थी, लेकिन अब सरकार भी इसके लिए आगे आई है। शतरंज खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में जगह मिल रही है। उन्होंने बताया कि शतरंज में चेन्नई रूस की बराबरी कर रहा है


अंडर-5 से शुरू होती है प्रतियोगिता

ग्रैंडमास्टर ने बताया कि शतरंज का खेल अंडर-5 से शुरू होता है। शतरंज खेलने की उम्र 3 से साढ़े तीन साल तक हो सकती है। इस उम्र में खेल शुरू करने वाला खिलाड़ी 15 साल से पहले ग्रैंडमास्टर बन सकता है। उन्होंने बताया कि शतरंज की वजह से उन्हें 75 देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला।
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