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Noida News: कूलिंग प्लांट खराब, चाइल्ड पीजीआई में मरीज गर्मी से परेशान
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फोटो
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कांच से बनी इमारत के वार्डों में धूप सीधे करती है प्रवेश
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। कूलिंग प्लांट खराब होने के कारण सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई मानो भट्ठी में तब्दील हो गया है। बाहर भले ही बारिश से थोड़ी राहत हो, लेकिन अस्पताल के अंदर उमस और घुटन ने बच्चों, तीमारदारों और स्टाफ की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है।
अस्पताल की इमारत चारों तरफ से कांच से बनी हुई है, जिससे धूप सीधे वार्डों और कमरों में प्रवेश करती है। ऐसे में कूलिंग प्लांट के खराब होने से अंदर का तापमान बढ़ गया है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे इलाजरत छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति काफी कष्टदायक है। वेंटिलेशन की कमी से वार्डों में घुटन का माहौल है। वॉशरूम की दुर्गंध सीधे मरीजों तक पहुंच रहीं हैं। अस्थायी तौर पर लगाए गए पंखों से राहत नहीं मिल रही है। बच्चे कपड़े पहनने से इन्कार कर रहे हैं।
मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों के कमरों में एसी लगे हुए हैं। वहीं, मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है।
कोट
कूलिंग प्लांट की मरम्मत शुरू है। जल्द ही इसे शुरू कर दिया जाएगा। -डॉ. डीके सिंह, डायरेक्टर, चाइल्ड पीजीआई
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कांच से बनी इमारत के वार्डों में धूप सीधे करती है प्रवेश
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। कूलिंग प्लांट खराब होने के कारण सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई मानो भट्ठी में तब्दील हो गया है। बाहर भले ही बारिश से थोड़ी राहत हो, लेकिन अस्पताल के अंदर उमस और घुटन ने बच्चों, तीमारदारों और स्टाफ की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है।
अस्पताल की इमारत चारों तरफ से कांच से बनी हुई है, जिससे धूप सीधे वार्डों और कमरों में प्रवेश करती है। ऐसे में कूलिंग प्लांट के खराब होने से अंदर का तापमान बढ़ गया है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे इलाजरत छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति काफी कष्टदायक है। वेंटिलेशन की कमी से वार्डों में घुटन का माहौल है। वॉशरूम की दुर्गंध सीधे मरीजों तक पहुंच रहीं हैं। अस्थायी तौर पर लगाए गए पंखों से राहत नहीं मिल रही है। बच्चे कपड़े पहनने से इन्कार कर रहे हैं।
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मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों के कमरों में एसी लगे हुए हैं। वहीं, मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है।
कोट
कूलिंग प्लांट की मरम्मत शुरू है। जल्द ही इसे शुरू कर दिया जाएगा। -डॉ. डीके सिंह, डायरेक्टर, चाइल्ड पीजीआई