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Noida News: घरेलू हिंसा मामले में पति को 20 हजार रुपये मासिक भरण-पोषण का आदेश
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(अदालत से)
-गौतमबुद्ध नगर की अदालत ने घरेलू हिंसा के आरोपों को माना साबित
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला को गौतमबुद्ध नगर की अदालत से बड़ी राहत मिली है। सिविल जज की अदालत ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर याचिका पर फैसला सुनाते हुए पति को पत्नी और पुत्र के भरण-पोषण के लिए 20 हजार रुपये प्रतिमाह देने का आदेश दिया है। पत्नी को वैकल्पिक आवास के लिए चार हजार रुपये प्रतिमाह किराया और मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना के लिए 50 हजार रुपये का एकमुश्त प्रतिकर भी देने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले के अनुसार तब्बसुम नाज उर्फ रोजी ने अपने पति शहनशाह मोहम्मद इमरान समेत ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों के खिलाफ घरेलू हिंसा के तहत परिवाद दायर किया था। महिला ने आरोप लगाया कि वर्ष 2008 में विवाह के बाद से ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया। गर्भावस्था के दौरान मारपीट के कारण उसका गर्भपात हो गया। बाद में पुत्र के जन्म के बावजूद ससुराल वालों ने वर्ष 2021 में उसे बच्चे सहित घर से निकाल दिया। वहीं दूसरी ओर, पति और अन्य विपक्षियों ने कहा कि महिला स्वयं अपने मायके में रहना चाहती थी।
महिला की ओर से अदालत में पति की इलेक्ट्रॉनिक सामान की दुकान, उससे जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य पेश किए गए। अदालत ने पति को निर्देश दिया कि वह याचिका दाखिल होने की तिथि 2 फरवरी 2023 से प्रभावी मानते हुए पत्नी और पुत्र को 20 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देगा। मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए 50 हजार रुपये का मुआवजा 45 दिनों के भीतर देने का भी आदेश दिया गया है।
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-गौतमबुद्ध नगर की अदालत ने घरेलू हिंसा के आरोपों को माना साबित
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला को गौतमबुद्ध नगर की अदालत से बड़ी राहत मिली है। सिविल जज की अदालत ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर याचिका पर फैसला सुनाते हुए पति को पत्नी और पुत्र के भरण-पोषण के लिए 20 हजार रुपये प्रतिमाह देने का आदेश दिया है। पत्नी को वैकल्पिक आवास के लिए चार हजार रुपये प्रतिमाह किराया और मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना के लिए 50 हजार रुपये का एकमुश्त प्रतिकर भी देने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले के अनुसार तब्बसुम नाज उर्फ रोजी ने अपने पति शहनशाह मोहम्मद इमरान समेत ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों के खिलाफ घरेलू हिंसा के तहत परिवाद दायर किया था। महिला ने आरोप लगाया कि वर्ष 2008 में विवाह के बाद से ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया। गर्भावस्था के दौरान मारपीट के कारण उसका गर्भपात हो गया। बाद में पुत्र के जन्म के बावजूद ससुराल वालों ने वर्ष 2021 में उसे बच्चे सहित घर से निकाल दिया। वहीं दूसरी ओर, पति और अन्य विपक्षियों ने कहा कि महिला स्वयं अपने मायके में रहना चाहती थी।
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महिला की ओर से अदालत में पति की इलेक्ट्रॉनिक सामान की दुकान, उससे जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य पेश किए गए। अदालत ने पति को निर्देश दिया कि वह याचिका दाखिल होने की तिथि 2 फरवरी 2023 से प्रभावी मानते हुए पत्नी और पुत्र को 20 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देगा। मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए 50 हजार रुपये का मुआवजा 45 दिनों के भीतर देने का भी आदेश दिया गया है।
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