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Noida News: सफर में अश्लीलता का लाउडस्पीकर और बेबस महिलाएं
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सोनम
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सफर में अश्लीलता का लाउडस्पीकर और बेबस महिलाएं
विरोध करने पर कई बार बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं चालक
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। शहर की सड़कों पर दौड़ते ऑटो व ई-रिक्शा परिवहन के सुविधाजनक साधन तो हैं लेकिन इनमें बजने वाले फूहड़ और आपत्तिजनक गाने परेशानी का सबब बन रहे हैं। छात्राओं व नौकरीपेशा महिलाओं का कहना है कि सफर के दौरान ऐसे गाने सुनने को मजबूर होना पड़ता है, जिससे वे असहज महसूस करती हैं।
कई मामलों में जब महिलाएं चालक से गाने बंद करने या आवाज कम करने का अनुरोध करती हैं तो चालक वॉल्यूम और बढ़ा देते हैं या फिर अभद्र व्यवहार करने लगते हैं। महिलाओं का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन में शालीन और सुरक्षित माहौल होना चाहिए। यह समस्या केवल असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से भी जुड़ा विषय बन चुकी है। परिवार के साथ सफर करने पर भी कई दिक्कतें आती हैं। सेक्टर-62 से ऑटो में सफर कर रहीं दीप्ति ने बताया कि आजकल तेज आवाज में गाना बजाना ऑटो चालकों के लिए आम हो गया है। कई बार उनको रोकने की कोशिश की जाती है तो वह ऑटो से उतरने तक के लिए बोल देते हैं, मजबूरी में उसी में बैठना होता है। तेज आवाज में गाने के साथ ऑटो की स्पीड भी तेज हो जाती है।
कोट्स
ऑटो और ई-रिक्शा में सफर के दौरान कई बार ऐसे गाने सुनने पड़ते हैं, जिन्हें परिवार के साथ बैठकर भी नहीं सुना जा सकता। मुझे रोज नोएडा से ग्रेटर नोएडा नौकरी पर जाना होता है, ऐसे लोगों को देखकर दिमाग खराब होता है। -निधि, सेक्टर-104 निवासी
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हर दिन बड़ी संख्या में छात्राएं और कामकाजी महिलाएं सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करती हैं। सफर के दौरान उन्हें सुरक्षित और सहज महसूस होना चाहिए। लेकिन फूहड़ गानों के कारण महिलाएं मानसिक रूप से परेशान होती हैं। -सोनम, सेक्टर-110 निवासी
महिलाओं की सुरक्षा केवल अपराध रोकने तक सीमित नहीं है। उन्हें सम्मानजनक वातावरण देना भी उतना ही जरूरी है। जब सार्वजनिक परिवहन में अश्लील गाने बजते हैं और विरोध करने पर बदसलूकी होती है तो यह चिंता का विषय बन जाता है। -हिना रानी, सेक्टर-22 निवासी
मुझे रोजाना काम के लिए ऑटो से आना-जाना करना होता है। इसमें दिक्कत ये आती है कि जहां बैठने की जगह होती है वहीं पीछे से स्पीकर लगे होते हैं। तेज आवाज में गाने बजने से सिरदर्द करता है। सबसे ज्यादा दिक्कत तब है जब उनको मना करना होता है। -भावना, हाजीपुर निवासी
वर्जन
हम लगातार ऑटो चालकों को सवारियों के प्रति व्यवहार को लेकर जागरूक करते रहते हैं। जो गलत तरीके से ड्राइविंग कर रहे हैं, उन पर चालान कर कार्रवाई की जा रही है। ऑटो व ई रिक्शा में महिलाओं से संबंधित कोई शिकायत अब तक नहीं मिली है, मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। -अभय कुमार मिश्र, डीसीपी ट्रैफिक
विरोध करने पर कई बार बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं चालक
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। शहर की सड़कों पर दौड़ते ऑटो व ई-रिक्शा परिवहन के सुविधाजनक साधन तो हैं लेकिन इनमें बजने वाले फूहड़ और आपत्तिजनक गाने परेशानी का सबब बन रहे हैं। छात्राओं व नौकरीपेशा महिलाओं का कहना है कि सफर के दौरान ऐसे गाने सुनने को मजबूर होना पड़ता है, जिससे वे असहज महसूस करती हैं।
कई मामलों में जब महिलाएं चालक से गाने बंद करने या आवाज कम करने का अनुरोध करती हैं तो चालक वॉल्यूम और बढ़ा देते हैं या फिर अभद्र व्यवहार करने लगते हैं। महिलाओं का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन में शालीन और सुरक्षित माहौल होना चाहिए। यह समस्या केवल असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से भी जुड़ा विषय बन चुकी है। परिवार के साथ सफर करने पर भी कई दिक्कतें आती हैं। सेक्टर-62 से ऑटो में सफर कर रहीं दीप्ति ने बताया कि आजकल तेज आवाज में गाना बजाना ऑटो चालकों के लिए आम हो गया है। कई बार उनको रोकने की कोशिश की जाती है तो वह ऑटो से उतरने तक के लिए बोल देते हैं, मजबूरी में उसी में बैठना होता है। तेज आवाज में गाने के साथ ऑटो की स्पीड भी तेज हो जाती है।
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कोट्स
ऑटो और ई-रिक्शा में सफर के दौरान कई बार ऐसे गाने सुनने पड़ते हैं, जिन्हें परिवार के साथ बैठकर भी नहीं सुना जा सकता। मुझे रोज नोएडा से ग्रेटर नोएडा नौकरी पर जाना होता है, ऐसे लोगों को देखकर दिमाग खराब होता है। -निधि, सेक्टर-104 निवासी
हर दिन बड़ी संख्या में छात्राएं और कामकाजी महिलाएं सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करती हैं। सफर के दौरान उन्हें सुरक्षित और सहज महसूस होना चाहिए। लेकिन फूहड़ गानों के कारण महिलाएं मानसिक रूप से परेशान होती हैं। -सोनम, सेक्टर-110 निवासी
महिलाओं की सुरक्षा केवल अपराध रोकने तक सीमित नहीं है। उन्हें सम्मानजनक वातावरण देना भी उतना ही जरूरी है। जब सार्वजनिक परिवहन में अश्लील गाने बजते हैं और विरोध करने पर बदसलूकी होती है तो यह चिंता का विषय बन जाता है। -हिना रानी, सेक्टर-22 निवासी
मुझे रोजाना काम के लिए ऑटो से आना-जाना करना होता है। इसमें दिक्कत ये आती है कि जहां बैठने की जगह होती है वहीं पीछे से स्पीकर लगे होते हैं। तेज आवाज में गाने बजने से सिरदर्द करता है। सबसे ज्यादा दिक्कत तब है जब उनको मना करना होता है। -भावना, हाजीपुर निवासी
वर्जन
हम लगातार ऑटो चालकों को सवारियों के प्रति व्यवहार को लेकर जागरूक करते रहते हैं। जो गलत तरीके से ड्राइविंग कर रहे हैं, उन पर चालान कर कार्रवाई की जा रही है। ऑटो व ई रिक्शा में महिलाओं से संबंधित कोई शिकायत अब तक नहीं मिली है, मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। -अभय कुमार मिश्र, डीसीपी ट्रैफिक

सोनम

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