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Noida News: प्रदेश में छाई सहकारी शुगर मिल, 2.49 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ
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- 10.51% रिकवरी से रचा नया इतिहास, 22 हजार क्विंटल अतिरिक्त चीनी का हुआ उत्पादन
- बेहतर प्रबंधन, आधुनिक तकनीक और किसानों के सहयोग से पिराई सत्र 2025-26 में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। बामनीखेड़ा गांव स्थित सहकारी शुगर मिल ने पिराई सत्र 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है। हरियाणा की सभी सहकारी चीनी मिलों में से सर्वाधिक 10.51 प्रतिशत शुगर रिकवरी हासिल कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि न केवल मिल के लिए गौरव का विषय है, बल्कि पूरे प्रदेश के सहकारी क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।
बेहतर प्रबंधन और रणनीति से मिली सफलता : इस सफलता के पीछे उपायुक्त एवं शुगर मिल के अध्यक्ष डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ के मार्गदर्शन और प्रबंध निदेशक द्विजा के नेतृत्व में अपनाई गई सुनियोजित रणनीति को अहम माना जा रहा है। मिल प्रबंधन ने आधुनिक तकनीकी संचालन, सतत मॉनिटरिंग और कार्यप्रणाली में सुधार के जरिए उत्पादन और रिकवरी दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की।
रिकवरी में रिकॉर्ड वृद्धि: प्रबंध निदेशक द्विजा ने बताया कि पिछले पिराई सत्र 2024-25 में मिल की रिकवरी 9.61 प्रतिशत रही थी, जिसे इस बार बढ़ाकर 10.51 प्रतिशत तक पहुंचाया गया है। इस वृद्धि से करीब 22 हजार क्विंटल अतिरिक्त चीनी का उत्पादन संभव हो पाया है, जो मिल की दक्षता को दर्शाता है। पिराई सत्र के दौरान लगभग 23.63 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई की गई, जिससे करीब 2.49 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ। बेहतर प्रबंधन और उच्च रिकवरी दर के चलते मिल को चालू सत्र में लगभग 8.50 करोड़ रुपये का लाभ भी हुआ है।
किसानों और कर्मचारियों का सराहनीय योगदान: मिल प्रबंधन ने इस उपलब्धि का श्रेय क्षेत्र के किसानों, अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया है। सभी ने समन्वय और टीम भावना के साथ कार्य करते हुए पिराई सत्र को सफल बनाया। साथ ही तकनीकी सुधार, मशीनरी के रखरखाव और संचालन में दक्षता ने भी अहम भूमिका निभाई।
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- बेहतर प्रबंधन, आधुनिक तकनीक और किसानों के सहयोग से पिराई सत्र 2025-26 में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। बामनीखेड़ा गांव स्थित सहकारी शुगर मिल ने पिराई सत्र 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है। हरियाणा की सभी सहकारी चीनी मिलों में से सर्वाधिक 10.51 प्रतिशत शुगर रिकवरी हासिल कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि न केवल मिल के लिए गौरव का विषय है, बल्कि पूरे प्रदेश के सहकारी क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।
बेहतर प्रबंधन और रणनीति से मिली सफलता : इस सफलता के पीछे उपायुक्त एवं शुगर मिल के अध्यक्ष डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ के मार्गदर्शन और प्रबंध निदेशक द्विजा के नेतृत्व में अपनाई गई सुनियोजित रणनीति को अहम माना जा रहा है। मिल प्रबंधन ने आधुनिक तकनीकी संचालन, सतत मॉनिटरिंग और कार्यप्रणाली में सुधार के जरिए उत्पादन और रिकवरी दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की।
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रिकवरी में रिकॉर्ड वृद्धि: प्रबंध निदेशक द्विजा ने बताया कि पिछले पिराई सत्र 2024-25 में मिल की रिकवरी 9.61 प्रतिशत रही थी, जिसे इस बार बढ़ाकर 10.51 प्रतिशत तक पहुंचाया गया है। इस वृद्धि से करीब 22 हजार क्विंटल अतिरिक्त चीनी का उत्पादन संभव हो पाया है, जो मिल की दक्षता को दर्शाता है। पिराई सत्र के दौरान लगभग 23.63 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई की गई, जिससे करीब 2.49 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ। बेहतर प्रबंधन और उच्च रिकवरी दर के चलते मिल को चालू सत्र में लगभग 8.50 करोड़ रुपये का लाभ भी हुआ है।
किसानों और कर्मचारियों का सराहनीय योगदान: मिल प्रबंधन ने इस उपलब्धि का श्रेय क्षेत्र के किसानों, अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया है। सभी ने समन्वय और टीम भावना के साथ कार्य करते हुए पिराई सत्र को सफल बनाया। साथ ही तकनीकी सुधार, मशीनरी के रखरखाव और संचालन में दक्षता ने भी अहम भूमिका निभाई।