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Noida News: अवैध कॉल सेंटर के जरिए विदेशियों को निशाना बनाते थे ठग, 16 गिरफ्तार
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- टेक सपोर्ट के नाम पर पीड़ितों की डिवाइस का एक्सेस हासिल करते, फिर बैंक खातों की जानकारी लेते थे
- मुख्यत: अमेरिका और यूरोप के नागरिक होते थे निशाने पर
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। तकनीकी मदद के नाम पर अमेरिका और यूरोप के नागरिकों से अवैध कॉल सेंटर के जरिए ठगी करने वाले 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने बृहस्पतिवार को कार्रवाई के दौरान आरोपियों से लैपटॉप, मोबाइल समेत अन्य दस्तावेज भी बरामद किए हैं। आरोपी अब तक करीब तीन सौ से अधिक विदेशी नागरिकों के साथ ठगी कर चुके हैं।
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि इनपुट के आधार पर टीम ने सेक्टर-16 में छापा मारा था। इस दौरान 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपी इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर टेक सपोर्ट के नाम से पेड विज्ञापन चलाते थे। इनमें टोल-फ्री नंबर लिखा होता था। जब कोई विदेशी नागरिक अपने लैपटॉप और कंप्यूटर के लिए तकनीकी सपोर्ट के लिए उस पर कॉल करता था तो आरोपी उनका डिवाइस हैक होने की बात कहते। इसके बाद स्क्रीन शेयरिंग ऐप के जरिए पीड़ित के सिस्टम तक पहुंच बनाते और कंप्यूटर स्क्रीन को ब्लैक कर देते थे। स्क्रीन एक्सेस मिलने के बाद आरोपी पीड़ित की बैंकिंग जानकारी हासिल करते थे और फिर खाते में जमा रकम के बारे में पता लगाते थे। पुलिस के अनुसार, अगर खाते में कम पैसा होता था तो वे 100 से 500 अमेरिकी डॉलर तक वसूल लेते थे। वहीं अगर खाते में अधिक राशि होती थी तो मामला तथाकथित सीनियर एजेंट को ट्रांसफर कर दिया जाता था और फिर और बड़े स्तर पर ठगी की जाती थी। डीसीपी ने बताया कि गैंग के लोगों से पूछताछ में कई जानकारियां सामने आईं हैं।
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गैंग के इन लोगों को पुलिस ने किया गिरफ्तार- विवेक ठाकुर (दिल्ली, 32 वर्ष), गौरव सिंह (नोएडा, 36 वर्ष), गौरव गुप्ता (नोएडा, 29 वर्ष), अभिषेक मसीह (दिल्ली, 30 वर्ष), अश्वनी कुमार (दिल्ली, 30 वर्ष), रोहन शर्मा (दिल्ली, 23 वर्ष), संत कुमार (दिल्ली, 23 वर्ष), उपेंद्र सिंह उर्फ रोहित सिंह (गौतमबुद्धनगर, 33 वर्ष), अंकुश चौरसिया (गाजियाबाद, 34 वर्ष), आयुष चौबे (गाजियाबाद, 32 वर्ष), सुदीप सिंह (ग्रेटर नोएडा वेस्ट, 30 वर्ष), अनुपम सक्सेना (गाजियाबाद, 44 वर्ष), अभिषेक मौर्य (ग्रेटर नोएडा वेस्ट, 32 वर्ष), शिवम पाठक (गौतमबुद्धनगर, 27 वर्ष), प्रदीप कुमार सिंह (जालंधर, 36 वर्ष), वरुण गुप्ता (दिल्ली, 30 वर्ष)
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आरोपियों से लैपटॉप, मोबाइल समेत अन्य डिवाइस बरामद
आरोपियों के पास से लैपटॉप, डेस्कटॉप, मॉनिटर, मोबाइल फोन, माइक्रोफोन हेडफोन समेतअन्य उपकरण बरामद किए हैं। इन उपकरणों के जरिए इन लोगों ने कॉल सेंटर का सेटअप तैयार कर रखा था और फोन कर ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे थे। आरोपी अब तक करोड़ों की ठगी कर चुके हैं। पुलिस अब बरामद डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच कराएगी। पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान कर रही है।
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डॉलर और क्रिप्टो करेंसी में आती थी रकम, पुलिस गिरोह का विदेशी नेटवर्क खंगाल रही
पुलिस जांच में पता चला है कि तकनीकी सहायता के नाम पर विदेशी नागरिकों से आरोपी डॉलर, गिफ्ट कूपन और क्रिप्टो करेंसी मंगवाते थे। इनके पास हवाला के माध्यम से भारतीय मुद्रा में कैश आता था। दरअसल इन आरोपियों ने कई विदेशी अकाउंट किराए पर ले रखे थे। इनमें डॉलर में पैसे ट्रांजैक्शन किए जाते थे फिर किराए के अकाउंट वाले अपना कमीशन काटकर भारत में हवाला के माध्यम से ऑनलाइन रकम भेज देते थे। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का सरगना वरुण गुप्ता है। उसने ही अवैध कॉल सेंटर शुरू किया था और बाद में कई लोगों को काम पर रखा था। इस मामले में साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों पर बीएनएस समेत आईटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस गिरोह के विदेशी नेटवर्क को खंगाल रही है।
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- मुख्यत: अमेरिका और यूरोप के नागरिक होते थे निशाने पर
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। तकनीकी मदद के नाम पर अमेरिका और यूरोप के नागरिकों से अवैध कॉल सेंटर के जरिए ठगी करने वाले 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने बृहस्पतिवार को कार्रवाई के दौरान आरोपियों से लैपटॉप, मोबाइल समेत अन्य दस्तावेज भी बरामद किए हैं। आरोपी अब तक करीब तीन सौ से अधिक विदेशी नागरिकों के साथ ठगी कर चुके हैं।
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि इनपुट के आधार पर टीम ने सेक्टर-16 में छापा मारा था। इस दौरान 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपी इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर टेक सपोर्ट के नाम से पेड विज्ञापन चलाते थे। इनमें टोल-फ्री नंबर लिखा होता था। जब कोई विदेशी नागरिक अपने लैपटॉप और कंप्यूटर के लिए तकनीकी सपोर्ट के लिए उस पर कॉल करता था तो आरोपी उनका डिवाइस हैक होने की बात कहते। इसके बाद स्क्रीन शेयरिंग ऐप के जरिए पीड़ित के सिस्टम तक पहुंच बनाते और कंप्यूटर स्क्रीन को ब्लैक कर देते थे। स्क्रीन एक्सेस मिलने के बाद आरोपी पीड़ित की बैंकिंग जानकारी हासिल करते थे और फिर खाते में जमा रकम के बारे में पता लगाते थे। पुलिस के अनुसार, अगर खाते में कम पैसा होता था तो वे 100 से 500 अमेरिकी डॉलर तक वसूल लेते थे। वहीं अगर खाते में अधिक राशि होती थी तो मामला तथाकथित सीनियर एजेंट को ट्रांसफर कर दिया जाता था और फिर और बड़े स्तर पर ठगी की जाती थी। डीसीपी ने बताया कि गैंग के लोगों से पूछताछ में कई जानकारियां सामने आईं हैं।
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गैंग के इन लोगों को पुलिस ने किया गिरफ्तार- विवेक ठाकुर (दिल्ली, 32 वर्ष), गौरव सिंह (नोएडा, 36 वर्ष), गौरव गुप्ता (नोएडा, 29 वर्ष), अभिषेक मसीह (दिल्ली, 30 वर्ष), अश्वनी कुमार (दिल्ली, 30 वर्ष), रोहन शर्मा (दिल्ली, 23 वर्ष), संत कुमार (दिल्ली, 23 वर्ष), उपेंद्र सिंह उर्फ रोहित सिंह (गौतमबुद्धनगर, 33 वर्ष), अंकुश चौरसिया (गाजियाबाद, 34 वर्ष), आयुष चौबे (गाजियाबाद, 32 वर्ष), सुदीप सिंह (ग्रेटर नोएडा वेस्ट, 30 वर्ष), अनुपम सक्सेना (गाजियाबाद, 44 वर्ष), अभिषेक मौर्य (ग्रेटर नोएडा वेस्ट, 32 वर्ष), शिवम पाठक (गौतमबुद्धनगर, 27 वर्ष), प्रदीप कुमार सिंह (जालंधर, 36 वर्ष), वरुण गुप्ता (दिल्ली, 30 वर्ष)
आरोपियों से लैपटॉप, मोबाइल समेत अन्य डिवाइस बरामद
आरोपियों के पास से लैपटॉप, डेस्कटॉप, मॉनिटर, मोबाइल फोन, माइक्रोफोन हेडफोन समेतअन्य उपकरण बरामद किए हैं। इन उपकरणों के जरिए इन लोगों ने कॉल सेंटर का सेटअप तैयार कर रखा था और फोन कर ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे थे। आरोपी अब तक करोड़ों की ठगी कर चुके हैं। पुलिस अब बरामद डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच कराएगी। पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान कर रही है।
डॉलर और क्रिप्टो करेंसी में आती थी रकम, पुलिस गिरोह का विदेशी नेटवर्क खंगाल रही
पुलिस जांच में पता चला है कि तकनीकी सहायता के नाम पर विदेशी नागरिकों से आरोपी डॉलर, गिफ्ट कूपन और क्रिप्टो करेंसी मंगवाते थे। इनके पास हवाला के माध्यम से भारतीय मुद्रा में कैश आता था। दरअसल इन आरोपियों ने कई विदेशी अकाउंट किराए पर ले रखे थे। इनमें डॉलर में पैसे ट्रांजैक्शन किए जाते थे फिर किराए के अकाउंट वाले अपना कमीशन काटकर भारत में हवाला के माध्यम से ऑनलाइन रकम भेज देते थे। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का सरगना वरुण गुप्ता है। उसने ही अवैध कॉल सेंटर शुरू किया था और बाद में कई लोगों को काम पर रखा था। इस मामले में साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों पर बीएनएस समेत आईटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस गिरोह के विदेशी नेटवर्क को खंगाल रही है।