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Noida News: अमेरिका के टैरिफ से गिरा ऑर्डर का ग्राफ
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निर्यातक बोले-अमेरिका के खरीदार छूट की कर रहे मांग, मुनाफा भी कम हो गया
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने से शहर के निर्यातक परेशान हैं। उनका कहना है कि बार-बार टैरिफ में बदलाव से नए ऑर्डर कम मिल रहे हैं। जो मिल रहे हैं उनमें उत्पाद की संख्या कम कर दी है। साथ ही अमेरिका के खरीदार छूट मांग रहे हैं। शहर के निर्यातकों का मुनाफा भी कम हो गया है। ऐसे में अब निर्यातक अन्य देशों में भी अवसर तलाश रहे हैं। वहीं फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (फियो) का कहा कि प्रतिस्पर्धी देशों पर भी लगा तो अवसर बरकरार रहेंगे।
अमेरिका ने भारत समेत 9 देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। हालांकि अमेरिका ने भारत को 10 प्रतिशत टैरिफ की श्रेणी में रखा है। बाकी पड़ोसी देशों पर 12.50 प्रतिशत का टैरिफ लगा है। टैरिफ पर चैंबर ऑफ एक्सपोटर्स के महासचिव विकास शर्मा का कहना है कि अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने का असर कारोबार पर पड़ रहा है। नए ऑर्डर मिल रहे हैं लेकिन 25 प्रतिशत कम हो गए हैं। अमेरिका के खरीदार कम ऑर्डर दे रहे हैं। साथ ही वो कीमतों पर छूट भी मांग रहे हैं।
उनका कहना है कि परेशान निर्यातक छूट तक देने को मजबूर हैं। टैरिफ के कारण मुनाफा भी कम हो गया है। अमेरिका के अलावा अन्य देशों में भी निर्यातक के अवसर तलाश रहे हैं लेकिन वहां अमेरिका जैसे कारोबार नहीं हो सकता। अमेरिका की पूंजी आय भी काफी ज्यादा हैं।
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फियो के अध्यक्ष एससी रल्हन का कहना है कि अमेरिका ने भारत को अलग से निशाना नहीं बनाया बल्कि भारत को 10 प्रतिशत टैरिफ वाली श्रेणी में रखा है। चीन, वियतनाम, थाईलैंड, तुर्की, यूएई, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अन्य समेत कई प्रतिस्पर्धी निर्यातक देशों को 12.5 प्रतिशत उच्च टैरिफ की श्रेणी में रखा है। इसका फायदा भारत को मिलेगा। कहा कि टेक्सटाइल, गारमेंट्स, लेदर और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में भारत के कई प्रत्यक्ष प्रतिस्पर्धी देश बांग्लादेश, कंबोडिया, पाकिस्तान, श्रीलंका, इंडोनेशिया और मलेशिया हैं। यहां 10 प्रतिशत टैरिफ लागू किया है। ऐसे में इसका नुकसान भारत के निर्यातकों को नहीं होगा।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने से शहर के निर्यातक परेशान हैं। उनका कहना है कि बार-बार टैरिफ में बदलाव से नए ऑर्डर कम मिल रहे हैं। जो मिल रहे हैं उनमें उत्पाद की संख्या कम कर दी है। साथ ही अमेरिका के खरीदार छूट मांग रहे हैं। शहर के निर्यातकों का मुनाफा भी कम हो गया है। ऐसे में अब निर्यातक अन्य देशों में भी अवसर तलाश रहे हैं। वहीं फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (फियो) का कहा कि प्रतिस्पर्धी देशों पर भी लगा तो अवसर बरकरार रहेंगे।
अमेरिका ने भारत समेत 9 देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। हालांकि अमेरिका ने भारत को 10 प्रतिशत टैरिफ की श्रेणी में रखा है। बाकी पड़ोसी देशों पर 12.50 प्रतिशत का टैरिफ लगा है। टैरिफ पर चैंबर ऑफ एक्सपोटर्स के महासचिव विकास शर्मा का कहना है कि अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने का असर कारोबार पर पड़ रहा है। नए ऑर्डर मिल रहे हैं लेकिन 25 प्रतिशत कम हो गए हैं। अमेरिका के खरीदार कम ऑर्डर दे रहे हैं। साथ ही वो कीमतों पर छूट भी मांग रहे हैं।
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उनका कहना है कि परेशान निर्यातक छूट तक देने को मजबूर हैं। टैरिफ के कारण मुनाफा भी कम हो गया है। अमेरिका के अलावा अन्य देशों में भी निर्यातक के अवसर तलाश रहे हैं लेकिन वहां अमेरिका जैसे कारोबार नहीं हो सकता। अमेरिका की पूंजी आय भी काफी ज्यादा हैं।
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फियो के अध्यक्ष एससी रल्हन का कहना है कि अमेरिका ने भारत को अलग से निशाना नहीं बनाया बल्कि भारत को 10 प्रतिशत टैरिफ वाली श्रेणी में रखा है। चीन, वियतनाम, थाईलैंड, तुर्की, यूएई, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अन्य समेत कई प्रतिस्पर्धी निर्यातक देशों को 12.5 प्रतिशत उच्च टैरिफ की श्रेणी में रखा है। इसका फायदा भारत को मिलेगा। कहा कि टेक्सटाइल, गारमेंट्स, लेदर और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में भारत के कई प्रत्यक्ष प्रतिस्पर्धी देश बांग्लादेश, कंबोडिया, पाकिस्तान, श्रीलंका, इंडोनेशिया और मलेशिया हैं। यहां 10 प्रतिशत टैरिफ लागू किया है। ऐसे में इसका नुकसान भारत के निर्यातकों को नहीं होगा।