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Noida News: पारस टियरा में नई वित्तीय प्रणाली लागू, हर महीने पता चलेगा- कितना क्या हुआ खर्च
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निवासियों ने सरकार से की आईएफएमएस एओए को हैंडओवर करने की मांग
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-137 स्थित पारस टिएरा सोसाइटी में नई वित्तीय प्रणाली लागू होने के बाद अब हर महीने निवासियों को जानकारी मिल सकेगी कि उनका पैसा कहां और कितना खर्च हुआ। एओए का कहना है इस व्यवस्था से जहां एक ओर पारदर्शिता आएगी, वहीं, लोगों में विश्वास बढ़ेगा।
एओए अध्यक्ष सुखपाल सिंह राणा ने बताया कि नई प्रणाली के तहत हर महीने की 10 से 15 तारीख के बीच सोसाइटी का संपूर्ण आय एवं व्यय विवरण निवासियों के साथ साझा किया जाता है। सोसाइटी में रहने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट्स खातों का स्वतंत्र रूप से निरीक्षण और समीक्षा करते हैं। यदि किसी प्रकार की कमी, अनियमितता या भ्रष्टाचार दिखने पर वे इसे सार्वजनिक कर सकते हैं। हर महीने की 15 से 22 तारीख के बीच निवासियों को अकाउंट्स, वाउचर्स, बिल्स एवं अन्य वित्तीय दस्तावेजों के निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराया जाता है। कोई भी निवासी व्यक्तिगत रूप से रिकॉर्ड का सत्यापन कर सकता है।
राणा ने बताया कि सोसाइटी के विज़ुअल स्ट्रक्चरल इंस्पेक्शन में यह बात सामने आई है कि अगर फेसाड रिपेयर समेत कुछ आवश्यक मरम्मत करा दी जाएं तो यह सोसाइटी आसपास की बेहतर सोसाइटियों में शामिल हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस पर काम किया जा रहा है।
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मेंटेनेंस वृद्धि के बोले अध्यक्ष
सोसाइटी में मेंटेनेंस चार्ज में हुई वृद्धि को लेकर अध्यक्ष ने दो टूक कहा कि कैम शुल्क 2.20 रुपये प्रति वर्गफुट से बढ़ाकर 2.95 रुपये किया गया है, जबकि सिंकिंग फंड 0.10 रुपये से बढ़ाकर 0.80 रुपये प्रति वर्गफुट किया गया है। इसके अतिरिक्त सीमित स्तर पर डीजी संबंधित अतिरिक्त चार्ज लगाए गए हैं, ताकि जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा व्यवस्थाएं स्थिर रखी जा सकें। उनका कहना है कि यह कैम वृद्धि अस्थायी है और भूतपूर्व बोर्ड द्वारा छोड़े गए 14 करोड़ के डेफिसिट को पूरा करने के बाद पुनः लगभग 3.30 रुपये प्रति वर्ग फुट पर लाया जाना चाहिए। जीबीएम सर्वोपरि है, वही निर्णय करेगी।
हर साल होती है करीब एक करोड़ रुपये के डीजल की खपत
सोसाइटी में हर साल करीब 90 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का डीजल खरीदा जाता है। इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए माई गेट ऐप के माध्यम से पूर्व सूचना जारी की जाती है कि किस दिन, किस समय और कितनी मात्रा में डीजल आने वाला है। सचिव विकास सालार ने कहा कि कोई भी निवासी डीजल की मात्रा और गुणवत्ता स्वयं आकर जांच सकता है। इससे खरीद प्रक्रिया में विश्वास और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित होते हैं।
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-137 स्थित पारस टिएरा सोसाइटी में नई वित्तीय प्रणाली लागू होने के बाद अब हर महीने निवासियों को जानकारी मिल सकेगी कि उनका पैसा कहां और कितना खर्च हुआ। एओए का कहना है इस व्यवस्था से जहां एक ओर पारदर्शिता आएगी, वहीं, लोगों में विश्वास बढ़ेगा।
एओए अध्यक्ष सुखपाल सिंह राणा ने बताया कि नई प्रणाली के तहत हर महीने की 10 से 15 तारीख के बीच सोसाइटी का संपूर्ण आय एवं व्यय विवरण निवासियों के साथ साझा किया जाता है। सोसाइटी में रहने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट्स खातों का स्वतंत्र रूप से निरीक्षण और समीक्षा करते हैं। यदि किसी प्रकार की कमी, अनियमितता या भ्रष्टाचार दिखने पर वे इसे सार्वजनिक कर सकते हैं। हर महीने की 15 से 22 तारीख के बीच निवासियों को अकाउंट्स, वाउचर्स, बिल्स एवं अन्य वित्तीय दस्तावेजों के निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराया जाता है। कोई भी निवासी व्यक्तिगत रूप से रिकॉर्ड का सत्यापन कर सकता है।
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राणा ने बताया कि सोसाइटी के विज़ुअल स्ट्रक्चरल इंस्पेक्शन में यह बात सामने आई है कि अगर फेसाड रिपेयर समेत कुछ आवश्यक मरम्मत करा दी जाएं तो यह सोसाइटी आसपास की बेहतर सोसाइटियों में शामिल हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस पर काम किया जा रहा है।
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सोसाइटी में मेंटेनेंस चार्ज में हुई वृद्धि को लेकर अध्यक्ष ने दो टूक कहा कि कैम शुल्क 2.20 रुपये प्रति वर्गफुट से बढ़ाकर 2.95 रुपये किया गया है, जबकि सिंकिंग फंड 0.10 रुपये से बढ़ाकर 0.80 रुपये प्रति वर्गफुट किया गया है। इसके अतिरिक्त सीमित स्तर पर डीजी संबंधित अतिरिक्त चार्ज लगाए गए हैं, ताकि जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा व्यवस्थाएं स्थिर रखी जा सकें। उनका कहना है कि यह कैम वृद्धि अस्थायी है और भूतपूर्व बोर्ड द्वारा छोड़े गए 14 करोड़ के डेफिसिट को पूरा करने के बाद पुनः लगभग 3.30 रुपये प्रति वर्ग फुट पर लाया जाना चाहिए। जीबीएम सर्वोपरि है, वही निर्णय करेगी।
हर साल होती है करीब एक करोड़ रुपये के डीजल की खपत
सोसाइटी में हर साल करीब 90 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का डीजल खरीदा जाता है। इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए माई गेट ऐप के माध्यम से पूर्व सूचना जारी की जाती है कि किस दिन, किस समय और कितनी मात्रा में डीजल आने वाला है। सचिव विकास सालार ने कहा कि कोई भी निवासी डीजल की मात्रा और गुणवत्ता स्वयं आकर जांच सकता है। इससे खरीद प्रक्रिया में विश्वास और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित होते हैं।