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Noida News: प्रदूषित पानी से सूरजपुर वेटलैंड के पेड-पौधों को नुकसान
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2024 में प्रदूषित पानी के कारण सूख गए थे हजारों पेड़
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सूरजपुर वेटलैंड में नाले का दूषित पानी जा रहा है, जिससे पेड़-पौधों को नुकसान पहुंच रहा है। कई पेड़ सूख चुके हैं। सूरजपुर वेटलैंड करीब 300 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इसमें से 60 हेक्टेयर वॉटर बॉडी है। वर्ष 2024 में नाले के गंदे व प्रदूषित पानी के कारण यहां के हजारों पेड़ सूख गए थे, जिसे अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। उसके बाद वन विभाग हरकत में आया और प्राधिकरण को गंदे पानी के नाले पर एसटीपी लगाने के लिए पत्र लिखा। साथ ही मई माह में गंदे पानी को वेटलैंड से बाइपास कर लोहिया नाले में डाला गया, लेकिन वेटलैंड में पानी की कमी होने पर नाले का गंदा पानी फिर से छोड़ा जा रहा है।
अफसरों का कहना है कि दूसरा कोई विकल्प नहीं होने पर पानी छोड़ा जाता है। वन विभाग के अफसरों का कहना है कि प्राधिकरण को समय-समय पर एसटीपी बनाने के लिए पत्र लिखा गया था। कुछ माह पहले निर्माण शुरू हो गया है। उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक एसटीपी शुरू हो जाएगा। उसके बाद नाले का प्रदूषित पानी वेटलैंड में नहीं आएगा।
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सूरजपुर वेटलैंड में नाले का दूषित पानी जा रहा है, जिससे पेड़-पौधों को नुकसान पहुंच रहा है। कई पेड़ सूख चुके हैं। सूरजपुर वेटलैंड करीब 300 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इसमें से 60 हेक्टेयर वॉटर बॉडी है। वर्ष 2024 में नाले के गंदे व प्रदूषित पानी के कारण यहां के हजारों पेड़ सूख गए थे, जिसे अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। उसके बाद वन विभाग हरकत में आया और प्राधिकरण को गंदे पानी के नाले पर एसटीपी लगाने के लिए पत्र लिखा। साथ ही मई माह में गंदे पानी को वेटलैंड से बाइपास कर लोहिया नाले में डाला गया, लेकिन वेटलैंड में पानी की कमी होने पर नाले का गंदा पानी फिर से छोड़ा जा रहा है।
अफसरों का कहना है कि दूसरा कोई विकल्प नहीं होने पर पानी छोड़ा जाता है। वन विभाग के अफसरों का कहना है कि प्राधिकरण को समय-समय पर एसटीपी बनाने के लिए पत्र लिखा गया था। कुछ माह पहले निर्माण शुरू हो गया है। उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक एसटीपी शुरू हो जाएगा। उसके बाद नाले का प्रदूषित पानी वेटलैंड में नहीं आएगा।
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