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गौतम बुद्ध नगर: 1000 एकड़ बढ़ा प्राकृतिक खेती का दायरा, लागत में आई कमी; हर साल नए किसान पद्धति से जुड़ रहे

Wed, 08 Jul 2026 02:16 PM IST
Vijay Singh Pundir मो. सफीक खान, अमर उजाला, नोएडा
मो. सफीक खान, अमर उजाला, नोएडा Published by: Vijay Singh Pundir Updated Wed, 08 Jul 2026 02:16 PM IST
सार

प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसान धान, गेहूं, बाजरा, सरसों, दालों के साथ टमाटर, भिंडी, लौकी, मिर्च समेत अन्य मौसमी सब्जियों की खेती कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस पद्धति में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं होने से खेती की लागत में काफी कमी आई है।

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Scope of natural farming in Gautam Buddha Nagar has expanded by 1,000 acres since November 2024
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की बढ़ती लागत के बीच जिले के किसान अब प्राकृतिक खेती की ओर रुख प्राकृतिक कर रहे हैं। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) के तहत गौतम बुद्ध नगर में नवंबर 2024 से अब तक प्राकृतिक खेती का दायरा 1000 एकड़ बढ़ा है। कृषि विभाग का कहना है कि प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान और खेतों पर प्रदर्शन के कारण हर साल नए किसान इस पद्धति से जुड़ रहे हैं।

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प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसान धान, गेहूं, बाजरा, सरसों, दालों के साथ टमाटर, भिंडी, लौकी, मिर्च समेत अन्य मौसमी सब्जियों की खेती कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस पद्धति में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं होने से खेती की लागत में काफी कमी आई है।
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जिला कृषि अधिकारी विवेक दुबे ने बताया कि प्राकृतिक खेती में गोबर, गोमूत्र, जीवामृत, घनजीवामृत और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विभाग किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण देकर इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
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ग्राम सोहरखा के किसान सुशील भारद्वाज पिछले चार वर्षों के प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस पद्धति को अपनाने में कुछ चुनौतियां जरूर आई, लेकिन धीरे-धीरे अनुभव बढ़ने के साथ अच्छे परिणाम मिलने लगे। मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला है। दादरी क्षेत्र के ग्राम बमबाबर के किसान मुकेश नागर पांच वर्षों से प्राकृतिक तरीके से खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह अनाज और सब्जियों की खेती खेती करते हैं। खेती की लागत में कमी आई है।

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