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ग्रेनो में फ्रॉड का नया तरीका: PMEGP लोन के नाम पर जरूरतमंदों को फंसाते थे जालसाज, करोड़ों ठगी के बाद खुला राज

माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Thu, 14 May 2026 04:47 PM IST
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सार

नोएडा पुलिस और साइबर सेल ने पीएमईजीपी योजना के तहत सब्सिडी लोन दिलाने का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। छह आरोपियों को गिरफ्तार कर मोबाइल फोन और कॉलिंग डाटा बरामद किया गया।
 

Six accused of gang involved in cyber fraud worth crores in name of PMEGP loan arrested in Greater Noida
नोएडा साइबर ठगी का खुलासा - फोटो : अमर उजाला GFX
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विस्तार

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत सब्सिडी लोन दिलाने का झांसा देकर देशभर के लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का थाना बिसरख पुलिस और साइबर सेल ने पर्दाफाश किया है। संयुक्त कार्रवाई करते हुए पुलिस ने गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 18 की-पैड मोबाइल फोन, छह स्मार्ट फोन और 15 रजिस्टर कॉलिंग डाटा बरामद किए गए हैं। आरोपी सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन चलाकर बेरोजगार युवाओं और लोन की तलाश कर रहे लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।

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डीसीपी सेंट्रल नोएडा शैलेन्द सिंह ने बताया कि थाना बिसरख पुलिस और साइबर सेल टीम ने मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर संयुक्त कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान कृष्णा काउंटी टॉवर-ए, सेक्टर-1 की छत से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान धर्मराज राठौर, रवि कुमार, किशन राठौर, अक्षय, किरण नायर और किरण बाबू राठौर के रूप में हुई है। 

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सभी आरोपी मूल रूप से कर्नाटक के बीजापुर और विजयपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं तथा ग्रेटर नोएडा में रहकर साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित कर रहे थे। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे इंस्टाग्राम, फेसबुक समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आधार कार्ड और पैन कार्ड से संबंधित आकर्षक विज्ञापन चलाते थे। विज्ञापन इस तरह तैयार किए जाते थे कि बेरोजगार युवक, छोटे कारोबारी और लोन की जरूरत वाले लोग आसानी से प्रभावित हो जाएं। जैसे ही कोई व्यक्ति विज्ञापन पर क्लिक करता था, उसके सामने आरोपियों का मोबाइल नंबर दिखाई देता था। इसके बाद गिरोह के सदस्य खुद को सरकारी योजना से जुड़े अधिकृत लोन अधिकारी बताकर बातचीत शुरू करते थे। 

सब्सिडी आधारित होम लोन व व्यवसायिक लोन का देते थे झांसा
आरोपी लोगों को बताते थे कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत उन्हें सब्सिडी आधारित होम लोन या व्यवसायिक लोन बेहद कम ब्याज दर पर दिलाया जाएगा। विश्वास जीतने के लिए आरोपी सरकारी योजनाओं और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी भाषा का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद फाइल चार्ज, प्रोसेसिंग फीस, बीमा, एनओसी, जीएसटी और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर लोगों से अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई जाती थी। आरोपी प्रति व्यक्ति दो लाख से चार लाख रुपये तक की रकम वसूलते थे। रकम जमा होने के बाद आरोपी मोबाइल नंबर बंद कर देते थे या पीड़ितों को अलग-अलग बहाने देकर टालते रहते थे। 

इस प्रकार गिरोह ने देशभर के अनेक लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी की है। पुलिस अब विभिन्न बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि अब तक कितने लोग गिरोह का शिकार बने हैं। साइबर अपराध से बचने के लिए गिरोह बेहद शातिर तरीके अपनाता था। आरोपी अधिकतर की-पैड मोबाइल फोन का उपयोग करते थे ताकि उनकी डिजिटल ट्रैकिंग कम हो सके। इसके अलावा वह लगातार सिम कार्ड बदलते रहते थे। जिससे पुलिस के लिए उनकी लोकेशन ट्रेस करना कठिन हो जाता था। 

आरोपियों के पास 18 की-पैड मोबाइल फोन
पुलिस ने आरोपियों के पास से 18 की-पैड मोबाइल फोन और छह स्मार्ट फोन बरामद किए हैं। बरामद 15 रजिस्टरों में कॉलिंग डाटा, संभावित शिकार लोगों की सूची, बैंक खातों की जानकारी और लेनदेन का रिकॉर्ड दर्ज मिला है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन एक कथित “बॉस” के निर्देश पर किया जा रहा था। गिरोह के सदस्य मोबाइल फोन के जरिए उससे संपर्क में रहते थे और उसी के निर्देश पर लोगों को कॉल करते थे। ठगी से प्राप्त रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। जिससे जांच एजेंसियों को रकम का वास्तविक स्रोत पता न चल सके। पुलिस अब गिरोह के मास्टरमाइंड और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है।

आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई
गिरफ्तार आरोपियों में धर्मराज राठौर 12वीं पास है, जबकि अन्य आरोपी 6वीं से लेकर बीएससी तक शिक्षित हैं। पढ़े-लिखे होने के बावजूद आरोपी सुनियोजित तरीके से साइबर अपराध में शामिल थे। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह काफी समय से सक्रिय था और सोशल मीडिया एल्गोरिदम का इस्तेमाल कर जरूरतमंद लोगों तक पहुंच बनाता था। पुलिस ने इस मामले में थाना बिसरख में प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन, बैंक खातों, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल डाटा की फोरेंसिक जांच करा रही है। संभावना जताई जा रही है कि जांच में कई अन्य राज्यों से जुड़े पीड़ितों और सहयोगियों की जानकारी सामने आ सकती है। लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले किसी भी लोन, सरकारी योजना या सब्सिडी संबंधी विज्ञापन पर आंख बंद कर भरोसा न करें। किसी भी प्रकार की प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज या अग्रिम भुगतान करने से पहले संबंधित संस्था, बैंक या सरकारी वेबसाइट की सत्यता अवश्य जांच लें। 
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