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Noida News: सपनों की ताकत भारी, संसाधनों से लाचार कुनाल

Mon, 06 Jul 2026 02:03 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jul 2026 02:03 AM IST
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The power of dreams is immense, yet Kunal is helpless due to a lack of resources.
- जर्मनी में वर्ल्ड गेम्स और एशियन गेम्स के लिए चयनित पावरलिफ्टर कुनाल नागर को महंगी किट, प्रशिक्षण और यात्रा खर्च की दरकार
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नितेश कुमार
ग्रेटर नोएडा। दनकौर क्षेत्र के डाकवाला गांव के रहने वाले पावरलिफ्टर कुनाल नागर ने राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। शानदार प्रदर्शन के दम पर उनका चयन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए हुआ है, लेकिन अब देश के लिए पदक जीतने का सपना आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। महंगी इक्विप्ड किट, प्रशिक्षण और यात्रा खर्च जुटाना खिलाड़ी और उसके किसान परिवार के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है। तेलंगाना के हैदराबाद स्थित गाचीबोवली स्टेडियम में 23 से 28 जून तक आयोजित राष्ट्रीय सब-जूनियर एवं जूनियर इक्विप्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में कुनाल ने 74 किलोग्राम भार वर्ग में कुल 619 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। इस प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन 19 से 25 जुलाई तक जर्मनी में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता और आगामी एशियन गेम्स के लिए हुआ है।
आर्थिक तंगी के बावजूद वह रोजाना घंटों अभ्यास कर रहे-
कुनाल ने बताया कि वह किसान परिवार से हैं। उनके पिता बालेश्वर नागर खेती कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित आय में घर का खर्च चलाना ही कठिन है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी के लिए जरूरी संसाधन जुटाना बड़ी चुनौती बन गया है। पावरलिफ्टिंग में इस्तेमाल होने वाली विशेष किट, बेल्ट, जूते, रिस्ट रैप, नी स्लीव और अन्य उपकरण काफी महंगे हैं। इनकी कीमत लाखों रुपये तक पहुंच जाती है। खिलाड़ी का कहना है कि अब तक उन्हें सरकारी स्तर पर अपेक्षित सहायता नहीं मिली है। आर्थिक तंगी के बावजूद वह रोजाना घंटों अभ्यास कर रहे हैं। निजी कोच की सुविधा नहीं होने से तकनीकी तैयारी भी स्वयं करनी पड़ रही है। उनका सपना अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगा बुलंद करना है।
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परिवार बना सबसे बड़ी ताकत-
कुनाल बताते हैं कि आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उनके पिता ने कभी उनका हौसला टूटने नहीं दिया। हर प्रतियोगिता में परिवार ने अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग किया। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी के लिए उन्हें सरकारी सहायता, बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरणों की जरूरत है, ताकि वह पूरी तैयारी के साथ देश का प्रतिनिधित्व कर सकें।
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