इंजीनियर युवराज का आखिरी Video: 'ऐसे ही रह बेटा.. गाड़ी बुलवाई है', सीढ़ी पर बैठ रेस्क्यू टीम देती रही निर्देश
बीते शुक्रवार की रात घने कोहरे में सेक्टर-150 के पास 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार निर्माणाधीन गड्ढे में गिरकर डूब गई। नए वायरल वीडियो में युवराज फोन की फ्लैशलाइट जलाकर और हवा में घुमाकर लोकेशन बताते दिख रहे हैं, जबकि रेस्क्यू टीम के जवान पास ही सीढ़ी पर बैठे दिशा-निर्देश दे रहे थे।
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ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 के पास हुए एक दुखद हादसे में फंसे सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में सामने आए नए वीडियो बचाव कार्य पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। शुक्रवार रात को हुई इस घटना में, युवराज की कार भारी जलभराव वाले एक गड्ढे या अंडरपास में फंस गई थी, जिसके कारण कार पानी में डूब गई और उनकी मौत हो गई। एनडीआरएफ की टीम ने घटना के लगभग तीन दिन बाद कार को पानी से बाहर निकाला।
इंजीनियर युवराज की मौत से पहले का आखिरी वीडियो वायरल
हाल ही में सामने आए एक वीडियो फुटेज में युवराज को जंगलनुमा इलाके में फंसे हुए देखा जा सकता है। वे दूर से मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर मदद की गुहार लगाते दिखाई दे रहे हैं। फुटेज में यह भी स्पष्ट है कि वे अपनी लोकेशन बताने के लिए लगातार फोन की लाइट को हवा में घुमा रहे थे।
वीडियो का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि बचाव दल के कुछ कर्मचारी पास ही सीढ़ी पर बैठे हुए दिखाई देते हैं, लेकिन वे सही रास्ता खोजने में उलझे हुए नजर आ रहे हैं। सीढ़ी पर बैठे होने के बावजूद, ऐसा प्रतीत होता है कि बचाव दल युवराज की सटीक दिशा को लेकर भ्रमित था और वे स्थिति को समझने और आगे की कार्रवाई तय करने में मशक्कत करते दिख रहे थे। इस वजह से बचाव कार्य में हुई देरी को लेकर अब यह एक बड़ा सवाल बन गया है कि आखिर मदद मिलने में इतना वक्त क्यों लगा।
पिता ने बयां किया खौफनाक मंजर
सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी निवासी राजकुमार मेहता ने बताया कि करीब 12 बजे युवराज का फोन आया था। बेटे ने नाले में गिरने की बात कहकर बचाने की गुहार लगाई। पहले वे ऐस सिटी नाले के पास पहुंचे, लेकिन वहां नहीं मिला। लगभग 30 मिनट तक घटना स्थल को ढूंढते रहे। जब वे घटनास्थल पर पहुंचे तो देखा कि उनका पुत्र कार की छत पर लेटा हुआ था। सड़क से करीब 70 फीट दूर वह पानी के बीच में था। इस दौरान उन्होंने डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी। पुत्र बीच-बीच में बचाव की आवाज लगा रहा था। उन्होंने टार्च जलाकर अपने जिंदा होने का भी सबूत दिया।
युवराज की मौत का कौन है आखिर जिम्मेदार?
सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल के कर्मियों ने पहले रस्सी फेंककर बचाने का प्रयास किया, मगर रस्सी उस तक नहीं पहुंची। जो क्रेन बुलाई गई, वह भी उस तक नहीं पहुंच पाई, जिस कारण राहत बचाव कार्य में देरी हुई। मौके पर कोई गोताखोर भी नहीं पहुंचा। इस कारण वे अपनी आंखों के सामने ही बेटे को कार सहित डूबते हुए देख रहे थे। सफलता न मिलने पर एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवानों को बुलाया गया।
युवराज की मौत से पहले भी हो चुका था हादसा
कई घंटे के सर्च ऑपरेशन के बाद युवराज को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। जिस जगह पर हादसा हुआ है, वहां पहले भी एक ट्रक कोहरे के कारण फंस चुका था, बावजूद इसके सबक नहीं लिया गया। जिस बेसमेंट में हादसा हुआ, वहां हमेशा पानी भरा रहता है। इस घटना से पहले ट्रक हादसे के बाद भी कोई प्रयास नहीं किया गया। घटना स्थल के पास नाला भी खुला हुआ है, वहां कोई रिफ्लेक्टर और बैरिकेड भी नहीं था।
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