Air India: क्या अहमदाबाद हादसे ने बिगाड़ा 'गणित', एअर इंडिया को करीब ₹15,000 करोड़ के रिकॉर्ड घाटे की आशंका
Air India Financial Results: टाटा ग्रुप की उम्मीदों और सिंगापुर एयरलाइंस के भरोसे पर चल रही एअर इंडिया अचानक गहरे भंवर में फंस गई है। जो एयरलाइन कल तक मुनाफे की उड़ान भरने को तैयार थी, अब खबर है कि वह इतिहास के सबसे बड़े घाटे की ओर बढ़ रही है। सूत्रों के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक एअर इंडिया को ₹15,000 करोड़ (1.6 अरब डॉलर) का रिकॉर्डतोड़ नुकसान हो सकता है। ऐसा क्या हुआ जो एअरलाइन को ऐसे हालात में लेकर आ गया? आइए, इस बारे में विस्तार से जानें।
विस्तार
टाटा समूह और सिंगापुर एयरलाइंस के स्वामित्व वाली एअर इंडिया एक बार फिर गहरे वित्तीय संकट में घिरती नजर आ रही है। पिछले साल अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे और भू-राजनीतिक तनावों के चलते एयरलाइन 31 मार्च, 2026 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में रिकॉर्ड 1.6 अरब डॉलर (करीब 15,000 करोड़ रुपये) का घाटा दर्ज कर सकती है। यह जानकारी मामले से जुड़े सूत्रों ने दी है, जो एयरलाइन के टर्नअराउंड प्लान को लगे इस बड़े झटके की पुष्टि करते हैं।
एअर इंडिया की इस हालत का सबसे बड़ा जिम्मेदार अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे को माना जा रहा है। जून में हुए उस दिल दहला देने वाले ड्रीमलाइनर क्रैश ने न सिर्फ 240 जिंदगियों को खत्म किया, बल्कि एयरलाइन की बरसों की साख को भी मटियामेट कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस एक हादसे ने एयरलाइन के 'टर्नअराउंड प्लान' की कमर तोड़ दी है।
मुनाफे की उम्मीदों पर फिरा पानी
यह अनुमानित घाटा एअर इंडिया के लिए एक बड़ा यू-टर्न है क्योंकि जून में हुए ड्रीमलाइनर हादसे से पहले एयरलाइन मुनाफे की ओर बढ़ रही थी। एयरलाइन ने इस वित्त वर्ष में परिचालन ब्रेक-इवन हासिल करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब मुनाफा हासिल करना दूर की कौड़ी नजर आ रही है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, एअर इंडिया, जो टाटा समूह और सिंगापुर एयरलाइंस लिमिटेड का एक संयुक्त उद्यम है, के लिए यह साल बेहद उथल-पुथल भरा रहा है। पिछले तीन वर्षों में एयरलाइन को कुल 32,210 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, और पिछले साल ही इसने 10,000 करोड़ रुपये की नई वित्तीय सहायता मांगी थी।
ये भी पढ़ें: PSUs: क्या सरकारी तेल-गैस कंपनियां वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हैं? केंद्रीय मंत्री पुरी ने ये कहा
दोहरी मार: विमान हादसा और एयरस्पेस प्रतिबंध
एयरलाइन की बैलेंस शीट पर सबसे गहरी चोट जून में हुए ड्रीमलाइनर क्रैश ने पहुंचाई, जिसमें 240 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। इस हादसे ने एयरलाइन की उस प्रगति को मटियामेट कर दिया जो उसने वर्षों की मेहनत से हासिल की थी। इसके अलावा, भारत के साथ सैन्य झड़प के बाद पाकिस्तान द्वारा अपने हवाई क्षेत्र को भारतीय एयरलाइनों के लिए बंद करने से भी एअर इंडिया की कमाई पर बुरा असर पड़ा है। इस प्रतिबंध के कारण यूरोप और अमेरिका के लिए उड़ानों को लंबे रूट से जाना पड़ रहा है, जिससे परिचालन लागत में भारी वृद्धि हुई है।
ये भी पढ़ें: Report: वैश्विक अनिश्चितताओं का सामना कैसे कर रहा भारत? देश की अर्थव्यवस्था पर आरबीआई ने ये कहा
बोर्ड की नाराजगी और नेतृत्व में बदलाव
बढ़ते घाटे और धीमी रिकवरी को देखते हुए एअर इंडिया का बोर्ड प्रबंधन के मौजूदा प्लान से नाखुश है। सूत्रों के अनुसार, प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत एक नई पंचवर्षीय योजना, जिसमें केवल तीसरे वर्ष में मुनाफे का अनुमान लगाया गया था, को बोर्ड ने खारिज कर दिया है। बोर्ड ने टर्नअराउंड के लिए अधिक आक्रामक दृष्टिकोण की मांग की है। इस बीच, टाटा समूह ने मौजूदा मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कैंपबेल विल्सन की जगह लेने के लिए नए नेतृत्व की तलाश शुरू कर दी है, हालांकि यह खोज हादसे की जांच रिपोर्ट आने तक जारी रहने की संभावना है।
ये भी पढ़ें: Trump Modi Relations: अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक साल में कई बार बदले सुर? अब दावोस में भी PM मोदी का जिक्र किया
सिंगापुर एयरलाइंस पर दबाव
एअर इंडिया का यह संकट उसके साझेदार सिंगापुर एयरलाइंस लिमिटेड के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। विस्तारा का एअर इंडिया में विलय होने के बाद सिंगापुर एयरलाइंस के पास अब इसमें 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी है। एअर इंडिया के खराब प्रदर्शन का सीधा असर सिंगापुर एयरलाइंस की कमाई पर भी पड़ रहा है, भले ही वह पुनर्गठन योजना के तहत एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस को इन-हाउस लाने में एअर इंडिया की मदद कर रही है। भारतीय विमानन बाजार में एक प्रतिद्वंद्वी एयरलाइन द्वारा उड़ानों को बड़े पैमाने पर रद्द करने और हवाई यात्रियों में बढ़ी चिंता ने भी एअर इंडिया के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं।