सरकारी स्कूल की सच्चाई: पांच साल से बन रहे पांच कमरे, अबतक नहीं हुआ काम पूरा; बाहर बैठ पढ़ने पर मजबूर छात्राएं
हरियाणा के पुन्हाना जिले में सरकारी स्कूल में पांच साल से पांच कमरे अभी तक नहीं बन पाए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिक्षा विभाग मामले को दबाने में लगा हुआ है। वहीं छात्राएं बाहर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। इस पर ग्रामीणों ने जांच की मांग की है।
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सरकारी स्कूलों में निर्माण कार्यों में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर विभाग की लापरवाही एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हरियाणा के पुन्हाना जिले के कई स्कूलों में वर्षों पहले स्वीकृत निर्माण कार्य आज तक अधर में लटके हुए हैं, लेकिन न तो शिक्षा विभाग और न ही जिला प्रशासन इस ओर गंभीर दिखाई दे रहा है। विभागीय स्तर पर कमेटी बनाकर जांच शुरू तो की जाती है, पर फाइलें महीनों तक धूल फांकती रहती हैं। उपमंडल के ऐसे कई स्कूलों की जांच फाइलें जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में धूल फांक रही है।
स्कूल स्टाफ से लेकर अधिकारियों तक मिलीभगत
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्यों में अनियमितताओं की मिलीभगत स्कूल स्टाफ से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों तक फैली हुई है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। बिसरू गांव का सरकारी गर्ल्स स्कूल भी भ्रष्टाचार और लापरवाही की कहानी बयां कर रहा है। स्कूल में पांच वर्ष पहले शुरू किए गए पांच कमरों का निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो पाया है। अधूरे पड़े कमरों के कारण छात्राओं को खुले में या बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। बरसात के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं।
2020-21 में मिली थी पांच कमरों को मंजूरी
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2020-21 में स्कूल के विस्तार के लिए पांच कमरों की स्वीकृति मिली थी। शुरुआत में निर्माण कार्य तेजी से चला, लेकिन कुछ ही महीनों बाद काम रुक-रुककर चलने लगा। थोड़े समय बाद ठेकेदार साइट छोड़कर चला गया और तब से निर्माण पूरी तरह ठप है। अधूरी दीवारें और छत रहित कमरे आज खंडहर में बदल चुके हैं।
लाखों के बिल हुए पास
गांव के जुबेर, जाहिद, खालिद, कामिल सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं हुई हैं। उनके अनुसार घटिया सामग्री उपयोग की गई और लाखों रुपये के बिल पास करा लिए गए, जबकि मौके पर काम अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल के कमरों के निर्माण को लेकर वो कई बार स्कूल के प्रधानाचार्य से भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
भ्रष्टाचार की परतें ऊपर तक
स्कूल प्रशासन के मुताबिक निर्माण कार्य पूर्व प्रधानाचार्य के कार्यकाल में हुआ। ग्रामीणों ने आरोप लगाया की पूर्व प्रधानाचार्य व ठेकेदार ने मिलकर निर्माण राशि में गबन किया है। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार की परतें ऊपर तक जाती हैं और विजिलेंस जांच ही सच सामने ला सकती है।
बाहर बैठकर पढ़ने को मजबूर छात्राएं
स्कूल प्रशासन ने भी माना कि छात्राओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन कमरों की कमी के कारण बच्चों को बेहद कठिन परिस्थितियों में पढ़ना पड़ता है। कई बार कक्षाएं शिफ्टों में लगानी पड़ती हैं। इससे पढ़ाई प्रभावित होती है और छात्राओं का बैठना-उठना भी परेशानी भरा हो जाता है।
अधिकारी बोले- जानकारी नहीं मुझे
मामला जानकारी में नहीं है। यदि कमरों का निर्माण कार्य अधूरा है तो विभाग के एसडीओ से इसकी स्थिति की रिपोर्ट ली जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्यवाही की जाएगी। -सगीर अहमद, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी नूंह।